J&K बजट सत्र में अनोखा नजारा, भाजपा विधायक को मिला NC का समर्थन

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र में अनोखा नजारा देखने को मिला, जब भाजपा विधायक देवयानी राणा के बजट भाषण पर सत्ता पक्ष NC के विधायक भी समर्थन में दिखे।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र में अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब भाजपा विधायक देवयानी राणा ने उमर अब्दुल्ला सरकार के बजट की आलोचना की और सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक भी उनके भाषण पर समर्थन जताते दिखे।

Jammu-Kashmir: जम्मू कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शनिवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने सियासी हलकों से लेकर आम जनता तक का ध्यान खींच लिया। आमतौर पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामे के लिए जाने जाने वाले सदन में इस बार एक अलग ही माहौल नजर आया। भाजपा की नई विधायक देवयानी राणा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के 2026-27 के बजट की जमकर आलोचना कर रही थीं, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायक भी मेज थपथपाकर उनके भाषण का समर्थन करते दिखाई दिए।

पहला भाषण और भावुक शुरुआत

जम्मू के नगरोटा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक बनीं देवयानी राणा के लिए यह मौका बेहद खास था। विधानसभा में यह उनका पहला बजट भाषण था। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने अपने दिवंगत पिता और वरिष्ठ नेता देवेंद्र सिंह राणा को श्रद्धांजलि देकर की। इस भावुक पल ने सदन के माहौल को कुछ देर के लिए गंभीर और संवेदनशील बना दिया।

देवयानी राणा ने कहा कि उनके पिता ने हमेशा जनता की सेवा को सर्वोपरि रखा और वही मूल्य वह अपने राजनीतिक जीवन में आगे बढ़ाना चाहती हैं। उनके इस बयान पर सदन में मौजूद कई विधायकों ने सहमति जताई और मेज थपथपाकर उनका हौसला बढ़ाया।

आपदा प्रबंधन बजट पर सीधा सवाल

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश किए गए 2026-27 के बजट पर चर्चा करते हुए देवयानी राणा ने सबसे पहले आपदा प्रबंधन के लिए आवंटित फंड में की गई कटौती का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रति बेहद संवेदनशील क्षेत्र बनता जा रहा है।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब बाढ़, भूस्खलन और खराब मौसम जैसी आपदाएं लगातार बढ़ रही हैं, ऐसे में आपदा प्रबंधन के बजट में कटौती करना बेहद चिंताजनक है। यह न केवल गलत संदेश देता है, बल्कि भविष्य में होने वाली आपदाओं से निपटने की तैयारियों को भी कमजोर करता है।

जलवायु परिवर्तन

देवयानी राणा ने अपने भाषण में यह भी कहा कि जम्मू कश्मीर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। कभी अचानक भारी बारिश, तो कभी बर्फबारी और भूस्खलन आम हो गए हैं। ऐसे हालात में राहत व्यवस्था, बेहतर तैयारी और मजबूत बुनियादी ढांचे की पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार खुद मानती है कि जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती है, तो फिर आपदा प्रबंधन फंड में कटौती क्यों की गई। उन्होंने मांग की कि इस फैसले पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।

नगरोटा की बाढ़ 

अपने भाषण को और ज्यादा प्रभावशाली बनाते हुए देवयानी राणा ने नगरोटा विधानसभा क्षेत्र में हाल ही में आई बाढ़ का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस आपदा में तीन साल की एक बच्ची और 28 साल के एक युवक की जान चली गई।

उन्होंने बेहद सख्त शब्दों में कहा कि लोगों की मौत को सेब की पेटियों की तरह नहीं गिना जाएगा। हर एक जान की कीमत है और सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेकर भविष्य में ठोस कदम उठाए जाएं।

सफाई कर्मचारियों की हालत पर चिंता

देवयानी राणा ने सिर्फ आपदा प्रबंधन ही नहीं, बल्कि सफाई कर्मचारियों की स्थिति पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक शौचालयों और स्वच्छता सेवाओं में काम करने वाले कर्मचारी बेहद कठिन परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।

उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार ने कभी यह सोचा है कि इन कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल रहा है या नहीं। क्या उन्हें सम्मानजनक कामकाजी हालात मिल रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार इन कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करे और यह सुनिश्चित करे कि उन्हें उनका हक मिले।

बिजली व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी

बजट चर्चा के दौरान देवयानी राणा ने बिजली व्यवस्था का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग की हालत चिंताजनक है और इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) और बुनियादी ढांचे के विकास की कमी के कारण बिजली संकट बना हुआ है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक लोग बिजली कटौती से परेशान हैं, लेकिन बजट में इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम नजर नहीं आते।

जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी की याद

अपने पहले ही भाषण में देवयानी राणा ने सरकार और सदन के सभी सदस्यों को जनप्रतिनिधि होने की जिम्मेदारी की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि जनता ने हम सभी को इस सदन में उनकी सेवा के लिए भेजा है।

उन्होंने साफ कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान ईमानदारी और तत्परता से किया जाना चाहिए। सिर्फ आंकड़ों और भाषणों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर बदलाव दिखना चाहिए।

सदन में मिला अप्रत्याशित समर्थन

देवयानी राणा के भाषण के दौरान एक और दिलचस्प दृश्य देखने को मिला। आमतौर पर विपक्ष की आलोचना पर सत्ता पक्ष की ओर से विरोध देखने को मिलता है, लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ।

स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने देवयानी को बोलने का मौका देते हुए कहा कि सदन को उनके पहले भाषण में उनका हौसला बढ़ाना चाहिए। इसके बाद भाजपा विधायकों ने तो मेज थपथपाई ही, सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई विधायक भी तालियां बजाते नजर आए।

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