'सवाना' के जंगल में सर्दियाँ शुरू हो चुकी थीं। सारे जानवर अपनी-अपनी गुफाओं और घोसलों में छिपकर ठंड से बच रहे थे। लेकिन 'जाम्बो' नाम के जिराफ़ के लिए सर्दी का मतलब था एक बड़ी मुसीबत। उसकी गर्दन इतनी लंबी थी कि वह हमेशा ठंड से ठिठुरती रहती थी।
कहानी
जाम्बो बहुत प्यारा और मिलनसार जिराफ़ था, लेकिन सर्दी आते ही वह उदास हो जाता था। उसके शरीर पर तो घने बाल थे, लेकिन उसकी लंबी, पतली गर्दन पर हवा बहुत तेज़ लगती थी। वह दिन भर 'आच्छीं! आच्छीं!' करके छींकता रहता।
एक दिन, जाम्बो की हालत देखकर उसके सबसे अच्छे दोस्त, 'चिंपू बंदर' को एक आईडिया आया। चिंपू ने अपनी दोस्त 'बुलबुल चिड़िया' से कहा, 'हमें जाम्बो के लिए कुछ करना होगा। उसकी गर्दन ठंड से अकड़ गई है।'
बुलबुल ने कहा, 'क्यों न हम उसके लिए एक मफलर बनाएँ?'
चिंपू हँसा, 'मफलर? उसकी गर्दन के लिए तो कंबल भी छोटा पड़ेगा!'
लेकिन फिर उन्हें यह आईडिया पसंद आया। उन्होंने तय किया कि वे जाम्बो के लिए दुनिया का सबसे लंबा और सबसे रंगीन मफलर बुनेंगे।
जंगल के सभी जानवरों को यह बात पता चली तो सब मदद के लिए आगे आए।
- 'भेड़ मौसी' ने अपना सबसे मुलायम और रंग-बिरंगा ऊन दिया।
- 'बया पक्षी' (Weaver Bird) ने अपनी मज़बूत चोंच से ऊन कातने में मदद की।
- 'मकड़ी रानी' ने बुनाई के लिए अपनी सबसे अच्छी कलाइयाँ इस्तेमाल कीं।
काम शुरू हुआ। एक बड़े से बरगद के पेड़ के नीचे 'बुनाई केंद्र' बनाया गया। चिंपू बंदर सबसे ऊँची डाल पर बैठकर नाप लेता था कि मफलर कितना लंबा हो गया है।
दिन-रात काम चला। जानवरों की एक टीम ऊन के गोले लाती, दूसरी टीम बुनती। मफलर लंबा होता गया... एक मीटर, दस मीटर, पचास मीटर! यह एक रंगीन सांप जैसा दिखने लगा था जो पेड़ से लटक रहा था।
आखिरकार, एक हफ्ते की मेहनत के बाद, मफलर तैयार हो गया। वह पूरे 100 मीटर लंबा था और इंद्रधनुष के सातों रंगों से बना था।
सभी जानवर मिलकर उस भारी-भरकम मफलर को उठाकर जाम्बो के पास ले गए। जाम्बो ठंड से कांप रहा था।
जब चिंपू और बुलबुल ने उड़कर उस मफलर का एक सिरा जाम्बो के कान के पास पकड़ा और बाकी जानवरों ने नीचे से उसे लपेटना शुरू किया, तो यह एक मज़ेदार नज़ारा था। एक चक्कर, दो चक्कर... बीस चक्कर! पूरी गर्दन मफलर में ढक गई।
मफलर इतना मुलायम और गर्म था कि जाम्बो को तुरंत राहत महसूस हुई। उसकी छींकें बंद हो गईं। उसने अपनी लंबी गर्दन झुकाई और अपनी नम आँखों से सबको धन्यवाद दिया।
'दोस्तों, तुम सबने मेरे लिए जो किया है, उसे मैं कभी नहीं भूलूँगा। यह सिर्फ़ एक मफलर नहीं, यह तुम्हारे प्यार की गर्माहट है।'
उस दिन के बाद से जाम्बो पूरे जंगल में अपना रंगीन मफलर लपेटकर शान से घूमता। वह मफलर इतना लंबा था कि कभी-कभी उसका पिछला सिरा ज़मीन पर लटकता रहता, जिसे छोटे खरगोश अपनी रजाई बनाकर सो जाते थे।
सीख
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि 'सच्चे दोस्त वही होते हैं जो आपकी परेशानी को अपनी परेशानी समझें और उसे दूर करने के लिए मिलकर कोशिश करें। एकता और सहयोग से बड़ा से बड़ा और मुश्किल से मुश्किल काम भी आसान हो जाता है।'











