रेत और पत्थर गिले शिकवे भूलना, एहसान याद रखना

रेत और पत्थर गिले शिकवे भूलना, एहसान याद रखना

दोस्ती और रिश्तों में अक्सर छोटी मोटी बातें, झगड़े और गलतफहमियाँ हो जाती हैं। लेकिन एक मजबूत रिश्ता वही होता है जो इन कड़वी यादों को भुलाकर, अच्छी यादों को संजोकर रखे। यह कहानी दो दोस्तों की है जो हमें बताती है कि हमें किसी की बुराई और अच्छाई को कहाँ और कैसे याद रखना चाहिए।

मुख्य कहानी 

दो बहुत पुराने और गहरे दोस्त एक रेगिस्तान से होकर गुजर रहे थे। सफर लंबा और थका देने वाला था। चलते चलते किसी बात पर दोनों के बीच बहस हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि गुस्से में आकर एक दोस्त ने दूसरे दोस्त के गाल पर जोर से थप्पड़ मार दिया।

जिस दोस्त को थप्पड़ लगा, उसे बहुत दुख हुआ और दिल को गहरी चोट पहुँची। लेकिन उसने अपने दोस्त से कुछ नहीं कहा। वह चुपचाप थोड़ा आगे गया और रेगिस्तान की 'रेत' (Sand) पर अपनी उंगली से लिखा, 'आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे थप्पड़ मारा।'

इसके बाद वे दोनों फिर चुपचाप आगे बढ़ने लगे।

कुछ देर बाद उन्हें रेगिस्तान में एक नखलिस्तान (Oasis) दिखाई दिया, जहाँ पानी का तालाब था। दोनों ने वहां रुककर नहाने और थकान मिटाने का फैसला किया।

जिस दोस्त को थप्पड़ लगा था, वह तालाब में नहाने गया। अचानक उसका पैर फिसला और वह दलदल में फंसने लगा। वह डूब रहा था और घबराकर चिल्लाने लगा। उसके दोस्त ने बिना एक पल गंवाए तुरंत पानी में छलांग लगा दी और बड़ी मशक्कत के बाद उसे डूबने से बचा लिया।

जब वह दोस्त खतरे से बाहर आ गया और उसकी सांस में सांस आई, तो उसने पास ही पड़े एक बड़े से 'पत्थर' (Stone) पर किसी नुकीली चीज से कुरेद कर लिखा, 'आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मेरी जान बचाई।'

यह देखकर, थप्पड़ मारने और जान बचाने वाले दोस्त ने हैरान होकर पूछा, 'दोस्त, जब मैंने तुम्हें मारा था, तब तुमने रेत पर लिखा था। और अब जब मैंने तुम्हारी जान बचाई, तो तुमने पत्थर पर लिखा। ऐसा क्यों?'

दूसरे दोस्त ने मुस्कुराते हुए बहुत ही सुंदर जवाब दिया, 'जब कोई हमें दुख दे या तकलीफ पहुंचाए, तो हमें उसे रेत पर लिखना चाहिए, ताकि माफी की हवाएं उसे आसानी से मिटा सकें। लेकिन जब कोई हमारे साथ कुछ अच्छा करे या हम पर कोई उपकार करे, तो हमें उसे पत्थर पर लिखना चाहिए, जहाँ कोई भी हवा उसे कभी मिटा न सके और वह हमेशा के लिए अमर हो जाए।'

सीख 

यह कहानी हमें जीवन जीने की एक बहुत ही सकारात्मक कला सिखाती है। अगर हम खुश रहना चाहते हैं और अपने रिश्तों को लंबा चलाना चाहते हैं, तो हमें 'माफ करने' और 'भूलने' की आदत डालनी होगी। दूसरों की गलतियों और कड़वी यादों को रेत की तरह जल्दी मिटा देना चाहिए, लेकिन उनके द्वारा किए गए अच्छे कामों और एहसानों को पत्थर की लकीर की तरह हमेशा याद रखना चाहिए। जो इंसान गिले शिकवे भुलाकर कृतज्ञता (Gratitude) के साथ जीता है, उसका जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहता है।

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