झारखंड में 22 प्रतियोगी परीक्षाएं रद्द होने के बाद उनसे नियुक्त 2,394 अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाओं पर संकट मंडरा रहा है। अभी सेवा समाप्ति का आदेश जारी नहीं हुआ है। नियुक्तियां खत्म होने पर प्रशासन, पुलिस और सचिवालय के कामकाज पर असर पड़ सकता है।
रांची: झारखंड सरकार की ओर से 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द किए जाने के बाद इन परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त या चयनित 2,394 अधिकारियों और कर्मचारियों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। हालांकि, संबंधित विभागों ने अभी तक इनकी सेवाएं समाप्त करने का औपचारिक आदेश जारी नहीं किया है। ऐसे में ये अधिकारी फिलहाल तकनीकी रूप से सेवा में बने हुए हैं, लेकिन आगे की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यदि सरकार इन नियुक्तियों को समाप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाती है, तो राज्य के कई विभागों में बड़ी संख्या में पद एक साथ खाली हो सकते हैं। इससे पहले से अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी झेल रहे प्रशासनिक तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।
22 परीक्षाओं के रद्द होने से हजारों नियुक्तियां प्रभावित
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी नियुक्तियों को लेकर चल रही प्रक्रिया के बीच 22 परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया है। इन परीक्षाओं के जरिए अलग-अलग सरकारी विभागों में नियुक्तियां हुई थीं। अब परीक्षा रद्द होने के बाद इन नियुक्तियों की वैधता और संबंधित कर्मचारियों की सेवा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
हालांकि परीक्षा रद्द करने का फैसला हो चुका है, लेकिन नियुक्त कर्मचारियों और अधिकारियों को सेवा से हटाने के लिए संबंधित विभागों की ओर से अभी तक अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है। इसलिए वर्तमान समय में उनकी स्थिति को लेकर कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
सरकार यदि सेवा समाप्ति का आदेश जारी करती है, तो एक साथ बड़ी संख्या में अधिकारियों के हटने से विभागीय कामकाज पर असर पड़ सकता है।
854 ASO को सचिवालय में प्रवेश नहीं मिला
इस पूरे मामले का असर झारखंड सचिवालय में दिखाई देने लगा है। सचिवालय सेवा के 854 सहायक प्रशाखा पदाधिकारी यानी ASO पिछले करीब आठ महीने से काम कर रहे थे। ये अधिकारी विभिन्न विभागों की फाइलों और प्रशासनिक कामकाज से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व संभाल रहे थे।
रिपोर्ट के अनुसार, इन अधिकारियों को सचिवालय में प्रवेश नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन किया। यदि इन 854 ASO की सेवाएं समाप्त होती हैं, तो सचिवालय के कई विभागों में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद खाली हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में मौजूदा प्रशाखा पदाधिकारियों और दूसरे कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ सकती है। इससे फाइलों के निपटारे और विभागीय कार्यों की गति प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
342 राजपत्रित अधिकारी भी प्रभावित
22 परीक्षाओं के रद्द होने से 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा के प्रोबेशन पर तैनात 342 राजपत्रित अधिकारियों का भविष्य भी प्रभावित हुआ है। इनमें 207 राज्य प्रशासनिक सेवा, 35 पुलिस सेवा, 56 वित्त सेवा और 44 अन्य राजपत्रित सेवाओं से जुड़े अधिकारी शामिल हैं।
इन अधिकारियों ने विभिन्न विभागों और जिलों में प्रशिक्षण तथा फील्ड जिम्मेदारियों के तहत काम शुरू कर दिया था। यदि उनकी सेवाएं समाप्त होती हैं, तो संबंधित विभागों में स्वीकृत पदों की तुलना में कार्यरत अधिकारियों की संख्या और कम हो जाएगी।
इसका असर प्रशासनिक फैसलों, सरकारी योजनाओं की निगरानी, फाइलों के निपटारे और स्थानीय स्तर पर सरकारी सेवाओं के संचालन पर पड़ सकता है।
डिप्टी कलेक्टर के पदों पर बढ़ सकता है दबाव
राज्य प्रशासनिक सेवा में पहले से ही बड़ी संख्या में पद खाली बताए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में राज्य प्रशासनिक सेवा के करीब 1,450 स्वीकृत पद हैं। इनमें बेसिक ग्रेड यानी डिप्टी कलेक्टर के लगभग 850 पद शामिल हैं।
इन पदों में करीब 250 पहले से रिक्त बताए जा रहे हैं। वहीं, 11वीं-13वीं सिविल सेवा के तहत चयनित 207 अधिकारियों को हटाए जाने की स्थिति में प्रशासनिक स्तर पर रिक्तियों का दबाव और बढ़ सकता है।

इन अधिकारियों ने अक्टूबर 2025 में योगदान दिया था। इसके बाद उन्हें प्रशासनिक प्रशिक्षण दिया गया और मार्च 2026 में फील्ड ट्रेनिंग के लिए अलग-अलग जिलों में भेजा गया। कई अधिकारियों को प्रखंड और अंचल स्तर की जिम्मेदारियां भी सौंपी गई थीं।
ऐसे में इनकी सेवाएं समाप्त होने पर उन जिम्मेदारियों को दूसरे अधिकारियों को संभालना पड़ सकता है।
डीएसपी रैंक में भी बढ़ेगी रिक्तियों की समस्या
इस फैसले का असर पुलिस प्रशासन पर भी पड़ने की आशंका है। राज्य पुलिस सेवा के 35 अधिकारी भी प्रभावित होने वाले अधिकारियों में शामिल हैं।
झारखंड में डीएसपी रैंक के करीब 35 पद पहले से रिक्त बताए जा रहे हैं। यदि नए नियुक्त 35 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त होती हैं, तो खाली पदों की संख्या लगभग 70 तक पहुंच सकती है।
ऐसी स्थिति में पुलिस विभाग को कानून-व्यवस्था, जांच, प्रशासनिक जिम्मेदारियों और विभिन्न अभियानों के संचालन में अतिरिक्त मानव संसाधन की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
समाज कल्याण और खाद्य सुरक्षा विभाग भी प्रभावित
परीक्षाओं के रद्द होने का प्रभाव सिर्फ प्रशासनिक और पुलिस विभाग तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के 64 पद भी प्रभावित बताए जा रहे हैं।
यदि इन पदों पर कार्यरत अधिकारियों की सेवाएं समाप्त होती हैं, तो समाज कल्याण विभाग की योजनाओं और परियोजनाओं के संचालन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। बाल विकास और महिला एवं बाल कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों की निगरानी में भी मानव संसाधन की कमी चुनौती बन सकती है।
इसी तरह फूड सेफ्टी अफसर के 56 पद और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा से जुड़े बीएसओ, एलडीसी तथा अन्य श्रेणियों के करीब 1,078 पद भी प्रभावित होने की बात सामने आई है।
सरकारी फाइलों के निपटारे पर पड़ सकता है असर
एक साथ हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों के हटने की स्थिति में सबसे बड़ा असर सरकारी कामकाज की गति पर पड़ सकता है। जिन विभागों में पहले से कर्मचारियों की कमी है, वहां अतिरिक्त जिम्मेदारी मौजूदा अधिकारियों को संभालनी पड़ सकती है।
फाइलों की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन, वरिष्ठ अधिकारियों को प्रस्ताव भेजना, प्रशासनिक आदेश तैयार करना और विभिन्न योजनाओं की निगरानी जैसे काम प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि, अभी सेवा समाप्ति का अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि 2,394 अधिकारियों की सेवाएं निश्चित रूप से समाप्त हो जाएंगी। आगे की स्थिति सरकार और संबंधित विभागों के औपचारिक फैसलों पर निर्भर करेगी।
सरकार के सामने प्रशासनिक संतुलन की चुनौती
यदि नियुक्तियां रद्द करने के बाद सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया पूरी होती है, तो सरकार के सामने एक साथ दो चुनौतियां होंगी। पहली चुनौती संबंधित नियुक्तियों से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं को संभालना होगी, जबकि दूसरी चुनौती खाली होने वाले पदों के कारण सरकारी कामकाज को सुचारु बनाए रखना होगी।
विशेष रूप से जिला प्रशासन, पुलिस, सचिवालय, समाज कल्याण और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में कर्मचारियों की कमी का असर सीधे आम लोगों तक पहुंचने वाली सरकारी सेवाओं पर पड़ सकता है।
फिलहाल सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। सेवा समाप्ति के औपचारिक आदेश जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने अधिकारी और कर्मचारी वास्तव में प्रभावित होंगे और विभागों में रिक्तियों की स्थिति कितनी गंभीर होगी।










