पटना: बिहार में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत राज्य में 11 लाख से अधिक आवासों को मंजूरी दी गई है। इसी क्रम में गुरुवार को 2.35 लाख तैयार मकानों का गृह प्रवेश कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हिस्सा लिया।
सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से बिहार के उन परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, जो लंबे समय से कच्चे मकान या आवास की समस्या से जूझ रहे हैं। नए आवासों के निर्माण और मंजूरी का यह अभियान ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
गुरुवार को आयोजित गृह प्रवेश कार्यक्रम में 2 लाख 35 हजार परिवारों ने अपने नए घर में प्रवेश किया। यह सिर्फ मकान मिलने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए लंबे इंतजार के बाद अपने पक्के घर का सपना पूरा होने का अवसर भी रहा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम के दौरान आवास योजना के तहत बिहार में हुए काम और आने वाले समय की योजनाओं की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि बिहार का कोई भी गरीब परिवार पक्के मकान से वंचित न रहे। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य में अब तक किए गए काम का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 से 2026 के बीच बिहार के लिए करीब 50 लाख आवासों का आवंटन किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवारों को भी योजना का लाभ दिया गया जो पहले आवास से वंचित रह गए थे।
सम्राट चौधरी ने अपने पिछले कार्यकाल का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 2024 में उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित परिवारों का मुद्दा उठाया था। उनके अनुसार, वर्ष 2018 के सर्वे के आधार पर करीब 19 लाख परिवार ऐसे थे जिन्हें आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया था। बाद के वर्षों में इन परिवारों को योजना के दायरे में लाने का प्रयास किया गया।
आवास योजना के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों स्तर से राशि उपलब्ध कराई जाती है। मुख्यमंत्री के अनुसार बिहार के लिए करीब 16 हजार करोड़ रुपये की राशि आवास योजना के तहत समर्पित की गई है। इसमें केंद्र से मिलने वाली राशि के साथ राज्य सरकार की हिस्सेदारी भी शामिल है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है। केंद्र सरकार के अनुसार PMAY-G के तहत देशभर में करोड़ों आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं और बड़ी संख्या में मकानों का निर्माण पूरा भी हो चुका है। ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मई 2026 में बताया था कि योजना के तहत 4.95 करोड़ आवास के लक्ष्य के मुकाबले करीब 3.91 करोड़ आवासों को मंजूरी दी जा चुकी थी और 3 करोड़ से अधिक मकानों का निर्माण पूरा हो चुका था।
इस योजना में महिलाओं की भागीदारी पर भी जोर दिया गया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक PMAY-G के तहत स्वीकृत करीब 75 प्रतिशत मकान महिलाओं के नाम पर या संयुक्त स्वामित्व में हैं। इससे ग्रामीण परिवारों में महिलाओं की संपत्ति संबंधी स्थिति को मजबूत करने में भी मदद मिलती है।
बिहार में 2.35 लाख परिवारों का एक साथ गृह प्रवेश ऐसे समय हुआ है जब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दे रही है। पक्का मकान मिलने के साथ बिजली, पानी, शौचालय, सड़क और अन्य सुविधाओं को जोड़ने पर भी जोर दिया जाता है, ताकि गरीब परिवारों के जीवन स्तर में व्यापक सुधार हो सके।
कच्चे मकान में रहने वाले परिवारों के लिए पक्का घर केवल चार दीवारों का निर्माण नहीं होता। बारिश के दौरान छत टपकने, गर्मी में अत्यधिक परेशानी और सर्दियों में असुरक्षित आवास जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। साथ ही परिवार को सामाजिक सुरक्षा और स्थायित्व का एहसास भी होता है।
सरकार के अनुसार आवास योजना का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। मंजूरी मिलने के बाद निर्माण की प्रगति के अनुसार राशि उपलब्ध कराई जाती है। इससे लाभार्थी चरणबद्ध तरीके से अपना मकान पूरा कर पाते हैं।
बिहार में अब 11 लाख से अधिक नए आवासों की मंजूरी से आने वाले समय में बड़ी संख्या में परिवारों को पक्का मकान मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे ग्रामीण विकास के व्यापक अभियान का हिस्सा बताया है और कहा है कि गरीबों के कल्याण के लिए विकास का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
आवास योजना का विस्तार बिहार के ग्रामीण इलाकों में रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है। मकान निर्माण के दौरान स्थानीय स्तर पर राजमिस्त्री, मजदूर और निर्माण सामग्री से जुड़े कारोबार को काम मिलता है। इसके अलावा नया मकान बनने के बाद परिवार अपनी अन्य जरूरतों पर भी खर्च कर पाता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
हालांकि इतनी बड़ी संख्या में आवासों का लक्ष्य पूरा करना प्रशासन के लिए भी चुनौती है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि स्वीकृत आवास समय पर पूरे हों, निर्माण की गुणवत्ता बनी रहे और वास्तविक पात्र परिवारों को ही योजना का लाभ मिले। साथ ही लाभार्थियों को किश्तों के भुगतान में अनावश्यक परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखना होगा।
बिहार में 2.35 लाख परिवारों का गृह प्रवेश इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि योजना के तहत स्वीकृत मकानों का निर्माण पूरा होने के बाद लाभार्थियों को वास्तविक आवास उपलब्ध कराया गया है। वहीं 11 लाख से ज्यादा नए आवासों की मंजूरी से यह संकेत मिलता है कि आने वाले चरणों में भी बड़ी संख्या में परिवारों को पक्के घर मिल सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराने को केंद्र सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में बताया है। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण भारत में कोई भी गरीब परिवार स्थायी आवास से वंचित न रहे।
बिहार सरकार भी आवास योजना को ग्रामीण विकास के व्यापक एजेंडे से जोड़ रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मुताबिक सरकार का उद्देश्य केवल मकान उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के जीवन में स्थायी सुधार लाना है। ऐसे में आने वाले समय में आवास योजना के साथ दूसरी बुनियादी सुविधाओं पर भी जोर बढ़ने की उम्मीद है।
फिलहाल 2.35 लाख परिवारों के नए घर में प्रवेश और 11 लाख से अधिक आवासों की मंजूरी बिहार के ग्रामीण गरीब परिवारों के लिए बड़ी खबर है। जिन परिवारों के पास अब तक पक्का घर नहीं था, उनके लिए यह योजना सुरक्षित आवास और बेहतर जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।











