झारखंड में CM हेमंत सोरेन के कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज हैं। संताल परगना और कोल्हान से झामुमो को नए मंत्री मिल सकते हैं, जबकि राजद और कांग्रेस कोटे में भी बदलाव की संभावनाएं चर्चा में हैं।
रांची: झारखंड की राजनीति में फिर से हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विदेश दौरे से लौटने के बाद राज्य में कैबिनेट विस्तार की संभावना बढ़ गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि झामुमो को संताल परगना और कोल्हान से दो नए मंत्री मिल सकते हैं। वहीं, राजद और कांग्रेस के कोटे में भी बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। इस विस्तार का असर राज्य की सत्तारूढ़ गठबंधन की राजनीति पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर लंबे समय से कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। अब ये चर्चाएं ठोस रूप लेने लगी हैं और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अंतिम निर्णय पर पहुंच सकते हैं। यह कदम न केवल संगठनात्मक संतुलन बनाएगा बल्कि आगामी चुनावों और राजनीतिक रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
झामुमो के लिए संताल परगना
यदि कैबिनेट विस्तार होता है, तो झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के दो विधायकों को मंत्री पद मिल सकता है। इनमें से एक विधायक संताल परगना क्षेत्र से और दूसरा कोल्हान क्षेत्र से हो सकता है। ये दोनों क्षेत्र झामुमो की राजनीतिक पकड़ के लिहाज से काफी मजबूत माने जाते हैं।
संताल परगना और कोल्हान दोनों ही आदिवासी राजनीति के केंद्र रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हमेशा क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों को प्राथमिकता देने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में कैबिनेट विस्तार के जरिए इन दोनों क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देना झामुमो की लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसके जरिए पार्टी न केवल संगठनात्मक मजबूती बनाएगी बल्कि सत्ता में मौजूदगी का भी संदेश देगी।
राजद कोटे के मंत्री संजय यादव पर संशय

कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं के बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) कोटे के मंत्री संजय यादव की स्थिति पर राजनीतिक संशय है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हेमंत सोरेन राजद कोटे में बदलाव कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो संजय यादव को मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है।
बिहार चुनाव के दौरान सीटों के बंटवारे और तालमेल न होने के कारण झामुमो और राजद के बीच खटास आई है। इसी कारण राजद कोटे में बदलाव की संभावना पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि राजद के लिए यह फैसला संवेदनशील और महत्वपूर्ण साबित होगा।
कांग्रेस कोटे में भी संभावित फेरबदल
कैबिनेट विस्तार का असर कांग्रेस कोटे पर भी पड़ने वाला है। फिलहाल कैबिनेट में कांग्रेस के चार मंत्री शामिल हैं। कांग्रेस के भीतर लंबे समय से असंतोष और दबाव की स्थिति बनी हुई है। कई विधायक मंत्री पद की मांग कर रहे हैं और नेतृत्व पर दबाव बना रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि कांग्रेस के भीतर यह दबाव संगठनात्मक मजबूती बनाए रखने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल करने का संकेत है। ऐसे में यदि कैबिनेट में कांग्रेस के कोटे में बदलाव होता है, तो पार्टी के भीतर उथल-पुथल हो सकती है।
कैबिनेट विस्तार से राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना
राज्य की राजनीति में कैबिनेट विस्तार हमेशा ही संवेदनशील मुद्दा रहा है। यह न केवल मंत्रियों की स्थिति पर असर डालता है बल्कि सत्ता और संगठन के भीतर संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।
झामुमो, कांग्रेस और राजद के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए हेमंत सोरेन के फैसले को बेहद सावधानी से लेने की आवश्यकता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि संताल परगना और कोल्हान जैसे आदिवासी केंद्रों को कैबिनेट में शामिल करना झामुमो की रणनीति का हिस्सा है, जबकि राजद और कांग्रेस के भीतर फेरबदल राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है।










