झुंझुनूं में रजिस्ट्रेशन मामले में गड़बड़ी, 600 से ज्यादा गाड़ियों को जारी हुए पुराने VIP नंबर

झुंझुनूं में रजिस्ट्रेशन मामले में गड़बड़ी, 600 से ज्यादा गाड़ियों को जारी हुए पुराने VIP नंबर
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झुंझुनूं और प्रदेश के कई जिलों में परिवहन विभाग ने नष्ट और पुराने वाहनों के फर्जी बैकलॉग के जरिए नई गाड़ियों को जारी किए गए नंबरों का भौतिक सत्यापन शुरू कर दिया है। सोमवार को 60 वाहनों की जांच की गई। 

Jhunjhunu: झुंझुनूं में परिवहन विभाग ने पुराने और नष्ट वाहनों के नंबरों के फर्जी बैकलॉग का खुलासा किया। पिछले दो साल में बिना सही दस्तावेजों के कई नंबर नई गाड़ियों को जारी किए गए। झुंझुनूं जिले में 659 और पूरे प्रदेश में लगभग 8 हजार वाहनों की संख्या में यह गड़बड़ी सामने आई।

सरकार ने 2018 में रिटेंशन/स्वेपिंग योजना शुरू की थी। इसके तहत पुरानी गाड़ी का नंबर नई गाड़ी में लगाया जा सकता है, बशर्ते पुराने वाहन के आरसी और सभी दस्तावेज जमा किए गए हों। लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से कई लोगों ने मोटी रकम देकर वीआईपी नंबर बिना दस्तावेज के हासिल कर लिए।

आरसी से चेसिस नंबर मिलान

भौतिक सत्यापन के तहत वाहनों के चेसिस और इंजन नंबर का आरसी से मिलान किया गया। यह जांच यह सुनिश्चित करने के लिए की गई कि जिस वाहन का नंबर नई गाड़ी को मिला, वह वाहन नष्ट हुआ या बेच दिया गया था या नहीं।

सोमवार को जिला परिवहन कार्यालय में 60 वाहनों की जांच की गई। इनमें कुछ वाहनों के बैकलॉग अन्य जिलों से झुंझुनूं में भरे गए थे। उदाहरण के लिए, नागौर की गाड़ी का बैकलॉग झुंझुनूं में किया गया और खेतड़ी की जीप आरजेएस 0009 का बैकलॉग भी झुंझुनूं में दर्ज किया गया।

सत्यापन के दौरान भारी भीड़ जमा हुई और व्यवस्था बनाए रखने के लिए लाइन लगानी पड़ी। निरीक्षण में अधिकारियों ने देखा कि कई वाहनों के नंबर बिना बैकलॉग और आवश्यक दस्तावेजों के जारी किए गए थे।

 तीन कर्मचारियों को किया निलंबित 

जांच में यह सामने आया कि कई अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण वाहन मालिकों ने महंगी नई गाड़ियों के लिए पुराने वीआईपी नंबर हासिल किए। परिवहन आयुक्त ने इस साल मई में तत्कालीन झुंझुनूं डीटीओ मक्खनलाल जांगिड़ समेत तीन कर्मचारियों को निलंबित किया था।

अब परिवहन विभाग ने उन सभी वाहनों के मालिकों को नोटिस भेजा है। 29 और 30 दिसंबर को वाहन मालिक भौतिक सत्यापन के लिए बुलाए गए हैं। जो लोग सत्यापन नहीं कराएंगे, उनकी आरसी निरस्त कर दी जाएगी।

दस्तावेज बिना नंबर जारी

प्रदेश में 1990 से पहले के वाहनों के 7 डिजिट नंबर थे। इन्हें ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज करने को बैकलॉग कहा जाता है। बैकलॉग के लिए वाहन का आरसी, इंश्योरेंस और पोल्यूशन सर्टिफिकेट जरूरी होता है। इसके अलावा वाहन मालिक का सत्यापन भी आवश्यक है।

लेकिन इस मामले में अधिकारियों ने इन नियमों की अनदेखी की। बिना दस्तावेज और सत्यापन के मोटी रकम लेकर पुराने नंबर नई गाड़ियों को दिए गए। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की गंभीर चेतावनी है।

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