जल जीवन मिशन या कमीशन मिशन! महोबा में टंकी हादसे के बाद अखिलेश यादव का सरकार पर तीखा हमला

महोबा में टेस्टिंग के अगले दिन पानी की टंकी फटने से जल जीवन मिशन की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। घटना पर अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार को घेरते भ्रष्टाचार से जोड़ा है

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी टेस्टिंग के अगले दिन फट गई। इस घटना ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए, जबकि Akhilesh Yadav ने सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

UP Politics: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से सामने आई एक घटना ने जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जैतपुर ब्लॉक के ग्राम नगाराडांग में बनी पानी की टंकी टेस्टिंग के महज एक दिन बाद ही फट गई। इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे सीधा भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए जल जीवन मिशन को ‘कमीशन मिशन’ करार दिया है।

यह मामला सिर्फ एक टंकी के फटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीण इलाकों में जहां लोग वर्षों से साफ पानी की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहां इस तरह की घटनाएं भरोसे को गहरा झटका देती हैं।

क्या है महोबा का पूरा मामला

महोबा जिले के जैतपुर ब्लॉक के ग्राम नगाराडांग में नमामि गंगे योजना के अंतर्गत जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल योजना पर काम चल रहा था। इसी योजना के तहत वर्ष 2025 में एक पानी की टंकी का निर्माण कराया गया। 3 फरवरी को टंकी को पहली बार टेस्टिंग के लिए पानी से भरा गया।

ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब जल्द ही उन्हें नियमित रूप से नल से पानी मिलने लगेगा। लेकिन 4 फरवरी को दोपहर करीब तीन बजे अचानक टंकी फट गई। देखते ही देखते हजारों लीटर पानी बहकर बर्बाद हो गया। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल जरूर खड़ा हो गया।

टेस्टिंग के बाद ही क्यों फट गई टंकी

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब टंकी को टेस्टिंग के बाद सुरक्षित माना गया, तो वह अगले ही दिन कैसे फट गई। आमतौर पर ऐसी टंकियों को कई स्तर पर जांचा जाता है। निर्माण सामग्री, डिजाइन और क्षमता की पूरी जांच के बाद ही इन्हें उपयोग में लाया जाता है।

इस घटना ने यह शक और गहरा कर दिया है कि कहीं न कहीं निर्माण में लापरवाही हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि काम के दौरान गुणवत्ता से समझौता किया गया। अगर समय रहते जांच और निगरानी ठीक से होती, तो शायद यह हादसा टल सकता था।

अखिलेश यादव का तीखा तंज

घटना सामने आते ही अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अखबार में छपी खबर को साझा किया। उन्होंने लिखा कि महोबा में भाजपा के भ्रष्टाचार का बोझ पानी की टंकी नहीं उठा पाई।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यहां बुलडोजर नहीं चलेगा, क्योंकि भ्रष्टाचार की पाइपलाइन महोबा से लखनऊ तक जलापूर्ति नहीं बल्कि धनापूर्ति कर रही है। अखिलेश यादव ने साफ शब्दों में कहा कि यह जल मिशन नहीं, बल्कि कमीशन मिशन बन चुका है।

उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई। विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा है, वहीं सत्तापक्ष पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।

जल जीवन मिशन पर उठते सवाल

जल जीवन मिशन का मकसद हर घर तक साफ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। केंद्र और राज्य सरकारें इस योजना को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करती रही हैं। लेकिन महोबा जैसी घटनाएं इस दावे पर सवालिया निशान लगा रही हैं।

ग्रामीण इलाकों में पानी की टंकी फटना सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं मानी जा सकती। यह सीधे तौर पर सरकारी पैसे के इस्तेमाल और काम की गुणवत्ता से जुड़ा मामला है। अगर निर्माण मजबूत होता, तो टेस्टिंग के बाद टंकी का फटना संभव नहीं होता।

ग्राम प्रधान की शिकायत

घटना के बाद ग्राम प्रधान गायत्री ने मामले को गंभीरता से उठाया। उन्होंने जिला अधिकारी गजल भारद्वाज और अपर जिला अधिकारी नमामि गंगे को लिखित शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि निर्माण कार्य में बड़े स्तर पर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है।

ग्राम प्रधान ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।

मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल देखने को मिली है। बताया जा रहा है कि योजना को लेकर चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत और प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के बीच भी तीखी बहस हुई है।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 30 दिनों के भीतर सभी गांवों में जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके बाद काम में तेजी जरूर लाई गई, लेकिन सवाल यह है कि क्या तेजी के चक्कर में गुणवत्ता से समझौता तो नहीं किया गया।

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