जम्मू-कश्मीर भर्ती घोटाला, अग्निशमन विभाग के 103 कर्मचारी बर्खास्त, जानें वजह

जम्मू-कश्मीर भर्ती घोटाला, अग्निशमन विभाग के 103 कर्मचारी बर्खास्त, जानें वजह

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने भर्ती घोटाले पर सख्त कार्रवाई करते हुए अग्निशमन विभाग के 103 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। यह फैसला 2020 भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और एसीबी जांच के बाद लिया गया।

Recruitment Scam: जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने भर्ती घोटाले के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज डिपार्टमेंट (Fire and Emergency Services Department) के 103 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। यह कार्रवाई 2020 की भर्ती प्रक्रिया में सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद की गई है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के निर्देश पर यह फैसला लिया गया, जिससे सरकार ने साफ संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह मामला सामने आने के बाद राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

उपराज्यपाल के आदेश से हुई कार्रवाई

सोमवार को जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने अग्निशमन विभाग के 103 कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश दिया। यह निर्णय सरकार द्वारा गठित एक जांच समिति की रिपोर्ट और उसके बाद एंटी-करप्शन ब्यूरो (Anti-Corruption Bureau) की विस्तृत जांच के आधार पर लिया गया।

जांच में यह साफ हो गया था कि वर्ष 2020 में फायरमैन और ड्राइवरों की भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया था। इन अनियमितताओं के कारण नियुक्तियां शुरू से ही अवैध मानी गईं।

2020 की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल

फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज डिपार्टमेंट में वर्ष 2020 में हुई भर्ती प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। शिकायतें मिल रही थीं कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी और कुछ उम्मीदवारों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया गया।

इन्हीं शिकायतों के आधार पर सरकार ने एक विशेष जांच समिति गठित की थी। समिति की रिपोर्ट आने के बाद मामले को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सौंपा गया, जिसने तकनीकी और दस्तावेजी जांच के जरिए पूरे घोटाले की परतें खोलीं।

जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताएं

एंटी-करप्शन ब्यूरो की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती परीक्षा की ओएमआर शीट्स (OMR Sheets) में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई थी। इसके अलावा उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई इमेजेज को भी जाली तरीके से बदला गया।

जांच में यह भी पाया गया कि मेरिट लिस्ट में जानबूझकर हेरफेर किया गया ताकि कुछ खास उम्मीदवारों को चयन का लाभ मिल सके। यह पूरी प्रक्रिया एक आपराधिक साजिश (criminal conspiracy) के तहत अंजाम दी गई थी।

106 उम्मीदवारों के पक्ष में परिणाम में हेरफेर

एसीबी की रिपोर्ट में बताया गया कि कुल 106 उम्मीदवारों के पक्ष में परिणाम में हेरफेर की पुष्टि हुई है। इन उम्मीदवारों को उनके वास्तविक अंकों से कहीं ज्यादा अंक दिए गए थे, ताकि वे चयन सूची में ऊपर आ सकें। जांच एजेंसी ने इसे संगठित धोखाधड़ी करार दिया और कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार का मामला है।

नियुक्तियां शुरू से ही मानी गईं अवैध

जम्मू-कश्मीर गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में प्रधान सचिव चंद्राकर भारती ने स्पष्ट किया कि इन 106 उम्मीदवारों की नियुक्तियां धोखाधड़ी और आपराधिक तरीकों से हासिल की गई थीं। इसलिए इन नियुक्तियों को शुरुआत से ही अमान्य माना गया है।

आदेश में कहा गया कि ऐसे कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि यह सार्वजनिक विश्वास और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पवित्रता को भी नुकसान पहुंचाता है।

तीन नियुक्तियां पहले ही हो चुकी थीं रद्द

सरकारी आदेश में यह भी बताया गया कि पहचाने गए 106 अवैध रूप से नियुक्त उम्मीदवारों में से तीन की नियुक्ति पहले ही रद्द की जा चुकी थी।

शेष 103 उम्मीदवारों के मामले में अब अंतिम कार्रवाई की गई है और उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। यह फैसला किसी व्यक्तिगत आधार पर नहीं, बल्कि जांच में सामने आए तथ्यों और कानूनी निष्कर्षों के आधार पर लिया गया है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार का सख्त संदेश

इस कार्रवाई के जरिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भर्ती घोटालों के खिलाफ उसकी नीति जीरो टॉलरेंस (zero tolerance) की है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा पहले भी कई बार कह चुके हैं कि सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

भविष्य की भर्तियों पर पड़ेगा असर

इस फैसले का असर आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर की सभी भर्ती प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। प्रशासन अब चयन प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर जोर दे रहा है। सूत्रों के अनुसार, भविष्य में OMR आधारित परीक्षाओं और मेरिट लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

हालांकि 103 कर्मचारियों की सेवा समाप्ति एक कठोर कदम है, लेकिन इसे उन हजारों उम्मीदवारों के लिए राहत के रूप में भी देखा जा रहा है, जो ईमानदारी से परीक्षा में शामिल हुए थे और चयन से वंचित रह गए।

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