जोधपुर मेयर चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस के पार्षद नगर निगम पहुंचे। भाजपा के साथ निर्दलीय पार्षद भी बस से आए। वोटिंग के बाद भाजपा पार्षदों को दोबारा निगम में भेजने पर कांग्रेस ने विरोध किया। मेयर पद का फैसला मतदान के बाद होगा।
जोधपुर: जोधपुर नगर निगम के मेयर पद के लिए शुक्रवार, 25 सितंबर को मतदान के बीच भाजपा और कांग्रेस के पार्षद नगर निगम पहुंच गए। दोनों दल अपने-अपने पार्षदों को बसों से मतदान केंद्र तक लेकर पहुंचे। भाजपा के साथ निर्दलीय पार्षदों की मौजूदगी ने मुकाबले को और महत्वपूर्ण बना दिया है। 100 सदस्यीय सदन में मेयर पद के लिए बहुमत का आंकड़ा 51 है। भाजपा ने मेयर पद के लिए प्रसन्नचंद मेहता को प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस की ओर से राजेंद्र सिंह सोलंकी मैदान में हैं। दोनों उम्मीदवारों के नामांकन को लेकर दर्ज आपत्तियां रिटर्निंग अधिकारी पहले ही खारिज कर चुके हैं, जिसके बाद 25 सितंबर को दोनों के बीच सीधा मुकाबला तय हुआ।
बसों से नगर निगम पहुंचे पार्षद
मतदान से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में पार्षदों को एकजुट रखने की कवायद दिखाई दी। भाजपा के पार्षद बस से नगर निगम पहुंचे। उनके साथ निर्दलीय पार्षद भी नजर आए। भाजपा के मेयर प्रत्याशी प्रसन्नचंद मेहता ने मतदान से पहले जीत का दावा किया। उन्होंने कहा कि सभी का समर्थन उनके साथ है और वे बोर्ड बनाने जा रहे हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस भी अपने पार्षदों और समर्थक निर्दलीय पार्षदों के समर्थन को लेकर आश्वस्त होने का दावा करती रही है। इस चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा और कांग्रेस की मूल संख्या बहुमत के आंकड़े से अलग है।
क्या है जोधपुर निगम का गणित?
जोधपुर नगर निगम के 100 सदस्यीय सदन में भाजपा के 45 और कांग्रेस के 44 पार्षद हैं। इसके अलावा 10 निर्दलीय और एक राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) का पार्षद है। बहुमत के लिए 51 पार्षदों का समर्थन जरूरी है।
चुनाव से पहले भाजपा ने निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया था। एक रिपोर्ट के अनुसार सात निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से भाजपा ने अपनी संख्या 45 से बढ़ाकर 52 होने का दावा किया था।
हालांकि, कांग्रेस की ओर से भी निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया गया। ऐसे में मतदान तक समर्थन का अंतिम गणित राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना रहा।
वोट डालने के बाद भाजपा पार्षदों को दोबारा अंदर भेजने पर विवाद
मतदान के दौरान नगर निगम परिसर में उस समय स्थिति गरमा गई जब भाजपा के कुछ पार्षदों को वोट डालने के बाद दोबारा निगम के अंदर ले जाने का मामला सामने आया।
कांग्रेस पार्षदों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि यदि कांग्रेस के पार्षदों को वोट डालने के बाद बाहर किया गया है तो भाजपा पार्षदों को दोबारा अंदर क्यों जाने दिया जा रहा है।
उपलब्ध चुनाव अपडेट के मुताबिक, भाजपा पार्षद को वोट देने के बाद बाहर किया गया था। इसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल ने निगम का गेट खोलकर पार्षदों को दोबारा अंदर ले जाने की कोशिश की। इस पर कांग्रेस पार्षदों ने आपत्ति जताई।
यह घटनाक्रम मतदान के दौरान दोनों दलों के बीच बढ़े तनाव को दर्शाता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस विवाद के बाद निर्वाचन अधिकारी की ओर से किसी अंतिम कार्रवाई या निर्णय का विवरण नहीं है।
प्रसन्नचंद मेहता कौन हैं?
भाजपा ने जोधपुर मेयर पद के लिए प्रसन्नचंद मेहता को उम्मीदवार बनाया है। मेहता वार्ड 82 से निर्वाचित पार्षद हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वे भाजपा संगठन में पहले जिलाध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे पदों पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
मेहता ने वार्ड 82 से कांग्रेस उम्मीदवार अरविंद परिहार को हराकर चुनाव जीता था। उनके राजनीतिक सफर को भाजपा संगठन से लंबे जुड़ाव और पार्टी के भीतर संगठनात्मक जिम्मेदारियों से जोड़ा जाता है।
मेयर चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते समय उनके साथ भाजपा के स्थानीय नेता और विधायक भी मौजूद रहे थे।
मेहता ने मतदान से पहले अपनी जीत का दावा किया और कहा कि उन्हें सभी का समर्थन प्राप्त है। हालांकि, अंतिम फैसला मतदान और मतगणना के बाद ही होना है।
राजेंद्र सोलंकी कांग्रेस के उम्मीदवार
कांग्रेस ने मेयर पद के लिए राजेंद्र सिंह सोलंकी को उम्मीदवार बनाया है। सोलंकी को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी नेताओं में गिना जाता है। वे जोधपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और शहरी सुधार न्यास (UIT) के अध्यक्ष रह चुके हैं।
उनकी राजनीतिक शुरुआत युवा कांग्रेस से हुई थी। वे पहले पार्षद भी रह चुके हैं और गहलोत सरकार के दौरान उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा भी मिला था।
सोलंकी ने इस बार पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा था। इसके बावजूद कांग्रेस ने उन्हें मेयर पद के लिए उम्मीदवार बनाया। इस वजह से उनका नामांकन स्थानीय निकाय चुनाव में पार्टी की रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा गया।
दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पर भाजपा और कांग्रेस ने एक-दूसरे के खिलाफ आपत्तियां भी दर्ज कराई थीं। रिटर्निंग अधिकारी ने दोनों पक्षों की आपत्तियों को खारिज कर दिया और दोनों उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी।
निर्दलीय पार्षदों पर टिकी नजर
जोधपुर मेयर चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। भाजपा के पास 45 और कांग्रेस के पास 44 पार्षद हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों को बहुमत के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है।
कुल 10 निर्दलीय पार्षदों और एक RLP पार्षद के कारण मेयर चुनाव का गणित सीधे तौर पर केवल भाजपा और कांग्रेस की संख्या से तय नहीं होता। मतदान के दौरान इन पार्षदों के रुख पर दोनों खेमों की नजर बनी हुई है।
भाजपा ने चुनाव से पहले कुछ निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया था। दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया। इसलिए दोनों दलों के दावों की वास्तविक स्थिति मतदान के बाद सामने आएगी।
नामांकन से मतदान तक सियासी हलचल
जोधपुर मेयर चुनाव को लेकर पिछले कई दिनों से दोनों दलों के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं। भाजपा ने प्रसन्नचंद मेहता को उम्मीदवार बनाया, जबकि कांग्रेस ने राजेंद्र सोलंकी के नाम पर भरोसा जताया। दोनों दलों ने अपने उम्मीदवारों के समर्थन में पार्षदों को एकजुट रखने पर जोर दिया।
21 सितंबर को रिटर्निंग अधिकारी ने दोनों प्रत्याशियों के खिलाफ दाखिल आपत्तियों को खारिज कर दिया था। इसके साथ ही 25 सितंबर को होने वाले चुनाव के लिए दोनों उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट हो गई थी।
राजस्थान के अन्य नगर निगमों में मेयर चुनाव के बाद अब जोधपुर, जयपुर और कोटा में 25 सितंबर को मतदान निर्धारित किया गया था। राज्य निर्वाचन प्रक्रिया के अनुसार इन चुनावों के परिणाम भी उसी दिन घोषित किए जाने हैं।
अब मतदान के बाद तय होगा मेयर
जोधपुर नगर निगम में मेयर पद के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता और कांग्रेस के राजेंद्र सिंह सोलंकी दोनों अपने-अपने समर्थन को लेकर दावे कर चुके हैं।
मतदान के दौरान भाजपा पार्षदों के दोबारा निगम परिसर में प्रवेश को लेकर कांग्रेस के विरोध ने चुनावी माहौल को और चर्चा में ला दिया। हालांकि, मेयर पद का अंतिम फैसला मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल 100 सदस्यीय सदन में 51 का बहुमत आंकड़ा, भाजपा और कांग्रेस के बीच सीटों का अंतर और निर्दलीय पार्षदों का समर्थन—तीनों कारक जोधपुर मेयर चुनाव के मुख्य केंद्र में हैं।











