उत्तर बिहार में पिछले करीब 40 घंटे से लगातार हो रही बारिश के बीच अब लोगों के लिए राहत के संकेत मिलने लगे हैं। मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार के कई इलाकों में लगातार बारिश के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है, निचले इलाकों में जलजमाव की स्थिति बनी है और सड़कों पर आवाजाही भी प्रभावित हुई है। हालांकि मौसम विभाग और कृषि मौसम वैज्ञानिकों के पूर्वानुमान के अनुसार शुक्रवार 25 सितंबर की दोपहर बाद बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। मुजफ्फरपुर में शुक्रवार को मध्यम बारिश का पूर्वानुमान है, जबकि शनिवार को बारिश के एक-दो दौर हो सकते हैं।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के मौसम वैज्ञानिक डॉ. ए. सत्तार के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से उत्तर बिहार में बारिश का दौर तेज हुआ। लगातार बारिश के कारण जहां लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं शुक्रवार की दोपहर के बाद मौसम में धीरे-धीरे सुधार की संभावना जताई गई है। बारिश की रफ्तार कम होने से जलजमाव वाले क्षेत्रों में भी पानी निकलने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
मुजफ्फरपुर शहर में लगातार बारिश का असर कई प्रमुख इलाकों में दिखाई दिया। स्टेशन रोड, आमगोला, अखाड़ाघाट और बालूघाट जैसे निचले इलाकों में पानी जमा होने से लोगों को परेशानी हुई। सड़क पर पानी जमा रहने के कारण पैदल चलने वालों के साथ दोपहिया और छोटे वाहनों को भी आवाजाही में दिक्कत हुई। लगातार बारिश के कारण बाजार और मुख्य सड़कों पर भी सामान्य दिनों की तुलना में गतिविधियां प्रभावित रहीं।
पानी टंकी चौक इलाके में बारिश के दौरान एक विशाल पेड़ गिरने से भी परेशानी बढ़ गई। पेड़ गिरने से कुछ समय के लिए आवागमन प्रभावित हुआ और बिजली आपूर्ति पर भी असर पड़ा। बारिश के बीच पेड़ गिरने की घटनाएं शहर के उन हिस्सों में अतिरिक्त परेशानी पैदा करती हैं, जहां पहले से सड़क पर पानी जमा हो। स्थानीय स्तर पर ऐसे स्थानों पर यातायात और बिजली व्यवस्था को सामान्य करने के लिए संबंधित विभागों को काम करना पड़ा।
मुजफ्फरपुर में 24 सितंबर को सुबह साढ़े आठ बजे तक पिछले 24 घंटे में 19 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। इस दौरान अधिकतम तापमान 24.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 7.2 डिग्री कम था। अधिक नमी और लगातार बादल छाए रहने के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार के लिए मौसम विभाग ने सामान्यतः बादल छाए रहने के साथ मध्यम बारिश का पूर्वानुमान दिया है।
लगातार बारिश का एक सकारात्मक असर खरीफ फसलों पर भी पड़ा है। उत्तर बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में इस समय धान की फसल खेतों में है और पर्याप्त नमी धान के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इस बारिश से धान की फसलों को काफी लाभ पहुंचा है। हालांकि जहां खेतों में पहले से पर्याप्त पानी है, वहां अत्यधिक जलभराव फसल के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है, इसलिए किसानों के लिए खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी भी महत्वपूर्ण होगी।
मौसम में बदलाव के पीछे बंगाल की खाड़ी में बना मौसम तंत्र अहम माना जा रहा है। इसी तंत्र के प्रभाव से बिहार के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं। 25 सितंबर को राज्य के कई हिस्सों में बारिश जारी रहने का पूर्वानुमान था, जबकि इसके बाद बारिश की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना बताई गई है। हालांकि अलग-अलग जिलों में मौसम का असर एक जैसा नहीं रहेगा और स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।
पटना समेत बिहार के 16 जिलों में भी 25 सितंबर को बारिश, मेघ गर्जन और वज्रपात की संभावना को लेकर चेतावनी जारी की गई थी। पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज और कैमूर में भारी बारिश को लेकर भी चेतावनी दी गई। इससे साफ है कि उत्तर बिहार में शुक्रवार दोपहर के बाद राहत के संकेत मिलने के बावजूद पूरे राज्य में मौसम तुरंत पूरी तरह साफ होने की संभावना नहीं है।
उत्तर बिहार में लगातार बारिश के कारण तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है। बारिश और पुरवा हवा के प्रभाव से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली है। मुजफ्फरपुर में 24 सितंबर का अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे रहा। लगातार बादल और बारिश के कारण दिन के समय भी मौसम में ठंडक महसूस की गई। हालांकि बारिश का दौर कम होने के बाद तापमान में दोबारा बढ़ोतरी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
शुक्रवार दोपहर के बाद बारिश की गति कम होने की संभावना लोगों के लिए इसलिए भी राहत देने वाली है क्योंकि लगातार बारिश से शहर के निचले हिस्सों में जमा पानी के कारण रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं। यदि बारिश रुकती है तो नगर क्षेत्र में जलनिकासी के लिए भी समय मिलेगा और सड़कों पर जमा पानी धीरे-धीरे कम हो सकता है। हालांकि जहां जलनिकासी की व्यवस्था कमजोर है, वहां बारिश थमने के बाद भी कुछ समय तक जलजमाव बना रह सकता है।
मौसम विभाग के मौजूदा पूर्वानुमान के अनुसार 26 सितंबर को मुजफ्फरपुर में एक-दो दौर की बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। इसके बाद 27 सितंबर को भी बारिश की संभावना बनी हुई है, जबकि 28 सितंबर से मौसम अपेक्षाकृत साफ होने के संकेत हैं। इसका मतलब यह है कि शुक्रवार दोपहर बाद मिलने वाली राहत को पूरी तरह बारिश की समाप्ति नहीं माना जा सकता।
इस बीच मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को जलजमाव वाले रास्तों पर अनावश्यक आवाजाही से बचने की जरूरत है। लगातार बारिश के बाद बिजली के खंभों, खुले तारों और जलमग्न सड़कों के आसपास विशेष सावधानी जरूरी है। तेज हवा और मेघ गर्जन के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होने से भी बचना चाहिए। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में तेज हवा और वज्रपात की संभावना को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
ग्रामीण इलाकों में किसानों के लिए भी मौसम की यह स्थिति मिश्रित असर वाली है। पर्याप्त बारिश से धान की फसल को पानी मिल रहा है और सिंचाई की जरूरत कम हो सकती है, लेकिन लगातार पानी जमा रहने की स्थिति में खेतों से अतिरिक्त पानी निकालना जरूरी होगा। खासकर निचले खेतों में जलभराव लंबे समय तक रहने पर पौधों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए बारिश की स्थिति को देखते हुए खेतों में पानी के स्तर पर नजर रखना महत्वपूर्ण है।
उत्तर बिहार में पिछले करीब 40 घंटे से बने बारिश के इस दौर ने शहरों से लेकर गांवों तक मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। मुजफ्फरपुर में तापमान सामान्य से नीचे चला गया है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है। दूसरी ओर जलजमाव और पेड़ गिरने जैसी घटनाओं ने परेशानी भी बढ़ाई है। अब शुक्रवार दोपहर बाद बारिश की रफ्तार कम होने के पूर्वानुमान से लोगों को राहत की उम्मीद है।
फिलहाल मौसम पूरी तरह साफ होने में थोड़ा समय लग सकता है। शुक्रवार के बाद भी शनिवार और रविवार को कहीं-कहीं बारिश या गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। इसलिए राहत के संकेत मिलने के बावजूद लोगों को अगले कुछ दिनों तक मौसम पर नजर रखनी होगी। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जलजमाव की स्थिति पूरी तरह समाप्त होने तक सावधानी बरतना जरूरी रहेगा।










