कांकेर में ग्रामीणों ने लाठी-डंडे से 10 ईसाई परिवारों के घरों में की तोड़फोड़, पुलिस जांच में जुटी

कांकेर में ग्रामीणों ने लाठी-डंडे से 10 ईसाई परिवारों के घरों में की तोड़फोड़, पुलिस जांच में जुटी
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कांकेर जिले के पुसागांव में ईसाई परिवारों के घरों में तोड़फोड़ से तनाव बढ़ गया। प्रशासन और पुलिस ने बड़ी संख्या में बल तैनात कर हालात काबू में किए। क्षेत्र में पहले भी धर्म परिवर्तन और शव दफनाने को लेकर विवाद हो चुके हैं।

Chhattisgarh: कांकेर जिले के पुसागांव में रविवार रात ईसाई परिवारों के दस घरों में तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। कुछ ग्रामीण लाठी-डंडों से लैस होकर ईसाई समुदाय के घरों में घुस गए। इस दौरान काफी नुकसान हुआ और हंगामा मचा। मामला आमाबेड़ा पुलिस स्टेशन इलाके का है।

पुलिस ने तुरंत गांव में बड़ी संख्या में बल तैनात किया। प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस गांव में जमीनी हालात पर नजर रख रहे हैं। अधिकारी दोनों पक्षों, गांव वालों और धर्मांतरित लोगों, के बीच विवाद को शांत करने और समझौता कराने की कोशिश कर रहे हैं।

पहले भी हुए थे विवाद

इससे पहले आमाबेड़ा क्षेत्र के बड़ेतेवड़ा गांव में शव दफनाने को लेकर आदिवासी और ईसाई समुदाय के बीच हिंसक झड़प हुई थी। आदिवासी लोगों ने ईसाई समुदाय को डंडों से भगा दिया, जबकि धर्मांतरित लोगों ने जवाबी कार्रवाई में आदिवासी समाज के लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।

कांकेर एसपी निखिल रखेजा ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। दो-तीन घरों को नुकसान पहुंचा। पुलिस ने दंगाइयों का वीडियो फुटेज भी हासिल किया। स्थिति सामान्य होने के बाद पीड़ितों की शिकायत मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

बड़ेतेवड़ा में पहले भी हुआ विवाद

7 नवंबर 2025 को कोडेकुर्सी गांव में शव दफनाने को लेकर विवाद हुआ था। गांव में एक व्यक्ति की मौत के बाद परिजन उसे ईसाई रीति-रिवाज के अनुसार दफनाना चाहते थे। लेकिन कुछ ग्रामीणों ने विरोध किया। मजबूरी में शव को अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखा गया।

15 दिसंबर 2025 को बड़ेतेवड़ा गांव में भी शव दफनाने को लेकर तनाव बढ़ा। ईसाई परंपरा के अनुसार शव दफन किया गया, लेकिन गांव के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। धीरे-धीरे विवाद उग्र हो गया।

16 और 17 दिसंबर को हालात और बिगड़ गए। बड़ी संख्या में ग्रामीण जुटे और पुलिस पर पथराव किया। कुछ जगह आगजनी भी हुई। पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। कई पुलिसकर्मी घायल हुए और उन्हें अस्पताल भेजा गया।

प्रशासन और पुलिस का हस्तक्षेप

18 दिसंबर को जिला प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में शव को कब्र से निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। इस दौरान भीड़ ने विरोध जारी रखा और पुलिस पर पथराव किया। वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। गांव में धारा 163 जैसी प्रतिबंधात्मक व्यवस्था लागू की गई।

अधिकारियों ने साफ किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है। किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन लगातार ग्रामीणों और धर्मांतरित समुदाय के बीच वार्ता कर शांति बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।

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