Premanand Ji Maharaj: आलस और मोबाइल से कैसे पाएँ छुटकारा

Premanand Ji Maharaj: आलस और मोबाइल से कैसे पाएँ छुटकारा

प्रेमानंद महाराज ने आलस और डिजिटल निर्भरता से छुटकारा पाने का तरीका बताया। उनका मानना है कि आलस कोई रोग नहीं बल्कि अभ्यास की कमी है। संकल्प, आत्म-अनुशासन और मोबाइल का संतुलित उपयोग जीवन में ऊर्जा और सक्रियता लाने का मार्ग है।

Premanand Ji Maharaj Teachings: डिजिटल युग में मोबाइल और आलस ने जीवनशैली को प्रभावित किया है, जिसके समाधान के लिए प्रेमानंद महाराज ने सरल और प्रभावी उपाय साझा किए। कहां, कब और किसके साथ लागू होता है – यह तरीका बच्चों, युवाओं और वृद्ध सभी के लिए उपयोगी है। क्या करना चाहिए – संकल्प, अभ्यास और आत्म-अनुशासन अपनाएं। क्यों यह जरूरी है – मोबाइल पर अत्यधिक निर्भरता मानसिक और शारीरिक आलस्य बढ़ाती है। महाराज जी बताते हैं कि अलार्म पर निर्भर रहने के बजाय संकल्प से उठना और अभ्यास जीवन में ऊर्जा और स्थिरता लाने का सबसे कारगर तरीका है।

आलस कोई रोग नहीं, बल्कि अभ्यास का दोष है

एक भक्त ने जब महाराज जी से पूछा कि आलस और मोबाइल की आदत से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है, तो उन्होंने इसे गहरी समझ और सरल भाषा में समझाया। प्रेमानंद महाराज के अनुसार, आलस कोई प्राकृतिक रोग नहीं है। यह अभ्यास में कमी या अभ्यास का दोष है, जिसे व्यक्ति अपनी इच्छा और संकल्प से नियंत्रित कर सकता है।

महाराज जी कहते हैं कि जैसे भूख और नींद पर नियंत्रण संभव है, वैसे ही अभ्यास और संकल्प से आलस को भी मात दी जा सकती है। उनका कहना है कि सही अभ्यास से 8 घंटे की नींद को 3 घंटे में भी पर्याप्त महसूस किया जा सकता है। यही कारण है कि आलस पर विजय पाने का मूल सूत्र है – कम बोलो, कम खाओ और कम सोओ।

अलार्म नहीं, संकल्प से खुलती है नींद

प्रेमानंद महाराज ने सुबह जल्दी उठने के लिए अलार्म का उपयोग कभी नहीं किया। उनका मानना है कि संकल्प और आत्म-अनुशासन ही नींद को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका है। महाराज जी बताते हैं कि सुबह उठने के लिए पहले रजाई फेंकें और अगर फिर भी नींद आती है तो खड़े होकर पानी पीकर ताजगी महसूस करें।

उन्होंने कहा कि संकल्प ही सबसे बड़ी शक्ति है। यदि कोई व्यक्ति दृढ़ संकल्प के साथ तय करता है कि सुबह 3.30 बजे उठना है, तो वह समय पर उठेगा। परमात्मा भी उस संकल्प की पूर्ति में सहायक होते हैं। अभ्यास और निरंतर प्रयास से यह संभव हो जाता है।

मोबाइल से दूरी, जीवन में सुधार

महाराज जी का संदेश स्पष्ट है कि मोबाइल का उपयोग संतुलन के साथ होना चाहिए। जितना लाभ फोन से लिया जा सकता है, उतना ही हानि भी संभव है। मोबाइल पर अत्यधिक निर्भरता से मानसिक और शारीरिक आलस्य बढ़ता है, इसलिए इसे नियंत्रित करना आवश्यक है।

प्रेमानंद महाराज के अनुसार, बच्चों, युवाओं और वृद्ध सभी के लिए अभ्यास और संकल्प ही जीवन को सक्रिय और स्वस्थ बनाने का उपाय है। आलस और डिजिटल निर्भरता को दूर कर जीवन में ऊर्जा और स्थिरता लाई जा सकती है।

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