कर्नाटक में वाल्मीकि निगम मामले को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर हमला तेज कर दिया है। पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु ने मंत्री बी. नागेंद्र पर सवाल उठाते हुए उन्हें रामायण की शपथ लेने की चुनौती दी और इस्तीफे की मांग दोहराई।
बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में कथित वाल्मीकि निगम घोटाले को लेकर सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार का पुराना इतिहास होने का आरोप लगाते हुए 1948 के जीप विवाद से लेकर कर्नाटक महार्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े मामले तक का जिक्र किया। उन्होंने मंत्री बी. नागेंद्र को अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए रामायण की शपथ लेने की चुनौती भी दी।
1948 के जीप विवाद से वाल्मीकि निगम मामले तक का जिक्र
बेंगलुरु स्थित बीजेपी के प्रदेश कार्यालय जगन्नाथ भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्रीरामुलु ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में भ्रष्टाचार का सिलसिला पुराना है और इसकी शुरुआत 1948 के जीप विवाद से जोड़ते हुए उन्होंने मौजूदा वाल्मीकि निगम मामले तक का संदर्भ दिया।
श्रीरामुलु ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल के दौरान सामने आए जीप विवाद का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 1948 के मामले में तत्कालीन ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त वीके कृष्ण मेनन द्वारा सैन्य जीपों की खरीद के लिए एक विदेशी कंपनी के साथ किए गए कथित अनुबंध का हवाला दिया।
हालांकि, श्रीरामुलु के ये आरोप राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं और वाल्मीकि निगम मामले में लगाए गए आरोपों तथा उनकी कानूनी स्थिति को संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
नागेंद्र को रामायण की शपथ लेने की चुनौती
बीजेपी नेता ने कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि यदि वह भ्रष्टाचार के आरोपों में शामिल नहीं हैं तो उन्हें महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण की शपथ लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
श्रीरामुलु ने आरोप लगाया कि वाल्मीकि समुदाय के कल्याण के लिए निर्धारित धन का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। उन्होंने दावा किया कि यह धन उन योजनाओं के लिए था जिनका उद्देश्य समुदाय के लोगों के सामाजिक और आर्थिक विकास में मदद करना था।
उन्होंने आरोप लगाया कि कथित तौर पर बड़ी रकम अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई और उसका इस्तेमाल विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया गया। श्रीरामुलु ने यह भी आरोप लगाया कि धन के कथित दुरुपयोग में महंगी कारों और सोने की खरीद जैसे खर्च शामिल थे।
इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
187 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मुद्दा
श्रीरामुलु ने कथित 187 करोड़ रुपये के वाल्मीकि निगम मामले को लेकर कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में तत्कालीन मंत्री बी. नागेंद्र को जेल भी जाना पड़ा था और विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कथित वित्तीय अनियमितताओं को स्वीकार किया था।
बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि अब सरकार इस मामले में भ्रष्टाचार नहीं होने की बात कह रही है। उन्होंने इसे कांग्रेस के दोहरे रवैये का उदाहरण बताया।
श्रीरामुलु ने कहा कि वाल्मीकि समुदाय के लिए निर्धारित धन का उद्देश्य लोगों के कल्याण और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए योजनाएं चलाना था। उनके अनुसार, यदि इस राशि के दुरुपयोग के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह संबंधित समुदाय के साथ गंभीर अन्याय होगा।
चुनावी इस्तेमाल के भी लगाए आरोप
बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि निगम की कथित तौर पर दुरुपयोग की गई राशि का इस्तेमाल लोकसभा चुनाव के दौरान कुछ क्षेत्रों में किया गया। उन्होंने बल्लारी, कोप्पल, रायचूर, बीदर और कलबुर्गी जैसे इलाकों का नाम लेते हुए इन आरोपों की जांच की मांग उठाई।
श्रीरामुलु ने सवाल किया कि क्या कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया पैसा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दिल्ली स्थित आवास तक पहुंचा था। हालांकि, यह आरोप श्रीरामुलु के राजनीतिक बयान के रूप में सामने आया है और इसे स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि कथित लेनदेन से संबंधित विवरण रिकॉर्ड में मौजूद हैं और सरकार को पूरे मामले की पारदर्शी जांच करानी चाहिए।
नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग
श्रीरामुलु ने मुख्यमंत्री से बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में वाल्मीकि समुदाय के हितों को लेकर गंभीर है तो किसी अन्य योग्य व्यक्ति को मंत्री बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने नागेंद्र को पद पर बनाए रखने पर भी सवाल उठाया और कहा कि जब तक मंत्री अपने खिलाफ लगे आरोपों से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाते, तब तक बीजेपी इस मुद्दे को उठाती रहेगी।
बीजेपी नेता ने कहा कि पार्टी विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखेगी।
‘मनुवादी’ टिप्पणी पर भी पलटवार
मंत्री नागेंद्र द्वारा बीजेपी नेताओं को कथित तौर पर ‘मनुवादी’ कहे जाने के आरोप पर भी श्रीरामुलु ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नागेंद्र को राजनीतिक जीवन के अलग-अलग चरणों में उन्हीं बीजेपी नेताओं का समर्थन मिला था, जिन्हें वह अब अपने खिलाफ साजिश करने वाला बता रहे हैं।
श्रीरामुलु ने सवाल किया कि अगर बीजेपी नेता उनके खिलाफ हैं तो पहले उन्हें समर्थन क्यों दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि नागेंद्र वाल्मीकि समुदाय का नाम लेकर अपने खिलाफ लगे आरोपों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने इस तरह की राजनीति को बंद करने की मांग की और कहा कि असली मुद्दा कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच है।
कर्मचारी की मौत के बाद बढ़ा था विवाद
वाल्मीकि निगम से जुड़ा विवाद निगम के कर्मचारी पी. चंद्रशेखर की आत्महत्या के बाद और गंभीर हो गया था। इस घटना ने निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया।
श्रीरामुलु ने चंद्रशेखर के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि परिवार अभी भी दुख से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी इस मामले में जवाबदेही तय होने तक अपना आंदोलन जारी रखेगी।
उनका कहना था कि पार्टी विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाएगी और सड़क पर भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेगी।
बीजेपी ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया
श्रीरामुलु ने स्पष्ट किया कि बीजेपी की मांग केवल राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी मंत्री नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखेगी। बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष नरसिम्हा नायक उर्फ राजू गौड़ा, एसटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बंगारू हनुमंतु और पूर्व विधायक के. शिवाना गौड़ा नायक भी इस दौरान मौजूद रहे।
कर्नाटक की राजनीति में वाल्मीकि निगम से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता के आरोप अब कांग्रेस और बीजेपी के बीच बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुके हैं। बीजेपी जहां मामले में सरकार और मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है, वहीं आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया से होना बाकी है।
आने वाले दिनों में इस मामले की जांच, सरकार की कार्रवाई और बीजेपी के विरोध प्रदर्शन कर्नाटक की राजनीति में अहम मुद्दे बने रह सकते हैं। खासकर वाल्मीकि समुदाय से जुड़े कल्याणकारी फंड के कथित इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग राजनीतिक बहस के केंद्र में बनी हुई है।











