Vijay Kumar Sinha, जो Samrat Choudhary की सरकार में मंत्री हैं, का एक बार फिर दर्द सार्वजनिक मंच पर सामने आया है। सोमवार को वे Muzaffarpur स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए।
पटना: बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा मंगलवार (25 मई, 2026) को मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में शामिल हुए। “बिहार लीची संगम: बाग से निर्यात तक” नाम से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बिहार की प्रसिद्ध शाही लीची को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा करना था।
कार्यक्रम में किसानों, विशेषज्ञों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जहां लीची उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण और निर्यात जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
‘नया विद्यार्थी हूं… सीखने में लग रहा ज्यादा समय’—विजय सिन्हा
कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपने विभागीय अनुभव और जिम्मेदारियों को लेकर भावुक अंदाज में बात की। उन्होंने कहा कि वे कृषि विभाग में खुद को “नया विद्यार्थी” मानते हैं और सीखने की प्रक्रिया लगातार जारी है। उन्होंने कहा,
“इस पाठशाला (कृषि विभाग) का नया विद्यार्थी हूं। नए विद्यार्थी को सीखने की ज्यादा ललक रहती है। अब दिक्कत होती है कि पढ़ाई हम पढ़ते हैं और सवाल आ जाता है दूसरे सब्जेक्ट का…”
उनके इस बयान को प्रशासनिक जिम्मेदारियों और विभागीय चुनौतियों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
‘फिर मेरा एक्शन शुरू होता है’—किसानों के हितों पर जोर

विजय कुमार सिन्हा ने आगे कहा कि जब किसानों के हितों या उनके अधिकारों से जुड़ी कोई समस्या सामने आती है, तो वे तुरंत कार्रवाई करते हैं। उन्होंने कहा,
“जब हमारे किसानों और बिहार के लोगों को परेशान करने की मानसिकता सामने आती है, तो मैं उसे छोड़ता नहीं हूं। फिर मेरा एक्शन शुरू होता है और उस एक्शन से लोग परेशान होने लगते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि उनका स्वभाव परिस्थितियों के अनुसार नहीं बदलता और वे किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
‘विजय सिन्हा नहीं, अब विजय बिहारी हूं’—भावनात्मक टिप्पणी
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि विभागीय जिम्मेदारियों में बदलाव के बावजूद उनकी प्राथमिकताएं वही हैं। उन्होंने कहा,
“कुछ लोगों ने सोचा कि राजस्व विभाग से विजय सिन्हा हट गए तो राहत मिल गई। लेकिन अब मैं सिर्फ विजय सिन्हा नहीं, विजय बिहारी हूं… पूरे बिहार के लोगों की चिंता मेरी जिम्मेदारी है।”
उनके इस बयान को राजनीतिक और प्रशासनिक भूमिका में निरंतरता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
बिहार लीची को वैश्विक पहचान दिलाने की योजना
कृषि मंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भी इस कार्यक्रम को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन बिहार की शाही लीची को स्थानीय बागानों से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि बिहार देश का सबसे बड़ा लीची उत्पादक राज्य है और इससे लाखों किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है। कार्यक्रम में लीची उत्पादन बढ़ाने, बेहतर भंडारण तकनीक, निर्यात सुविधाओं और मूल्य संवर्धन पर विशेष चर्चा की गई।









