फ्रांस में एक गंभीर शोषण मामले में पूर्व बैंक मैनेजर को 25 साल की सजा सुनाई गई है। आरोपी पर अपनी पार्टनर को वर्षों तक मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देने और जबरन अवैध गतिविधियों में धकेलने का आरोप साबित हुआ।
पेरिस: फ्रांस में एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाले यौन शोषण मामले में अदालत ने 51 वर्षीय पूर्व बैंक मैनेजर गिलौम बुची को 25 साल जेल की सजा सुनाई है। आरोपी पर अपनी पार्टनर को वर्षों तक शारीरिक, मानसिक और यौन हिंसा के जरिए नियंत्रित करने और उसे जबरन सैकड़ों पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर करने का आरोप सिद्ध हुआ है।
यह मामला न केवल फ्रांस में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिला सुरक्षा और जबरन यौन शोषण की बहस को फिर से केंद्र में ले आया है।
कैसे शुरू हुआ शोषण का सिलसिला?
पीड़िता, 42 वर्षीय लेटेसिया आर, ने अदालत में बताया कि यह पूरा मामला 2015 में क्रिसमस के दौरान शुरू हुआ था। शुरुआत में आरोपी ने इसे “सेक्स गेम” और आपसी सहमति वाला रिश्ता बताकर उसे मानसिक रूप से नियंत्रित किया।
लेकिन धीरे-धीरे यह रिश्ता एक भयावह शोषण में बदल गया, जिसमें महिला को अजनबियों, सहकर्मियों और यहां तक कि आरोपी के परिचितों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाने लगा।
487 पुरुषों से मुलाकात: पीड़िता का दर्दनाक बयान
पीड़िता ने कोर्ट में कहा कि उसे इतने अधिक पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया कि उसने 487 के बाद गिनती करना ही बंद कर दिया।
उसने बताया कि कई बार उसे एक ही दिन में दर्जनों लोगों के साथ संबंध बनाने पड़े। कुछ मौकों पर यह संख्या 24 घंटे में 10 से 14 तक पहुंच जाती थी।
उसने यह भी कहा कि आरोपी पूरे समय स्थिति को नियंत्रित करता था—किससे मिलना है, कब मिलना है और कितना पैसा लिया जाएगा, सब कुछ उसी के नियंत्रण में था।
हिंसा, डर और मानसिक नियंत्रण का इस्तेमाल
कोर्ट में पेश किए गए सबूतों के अनुसार, आरोपी न केवल पीड़िता पर मानसिक दबाव डालता था बल्कि शारीरिक हिंसा भी करता था।
पीड़िता ने बताया कि जब वह किसी भी तरह से विरोध करती थी, तो उसे मुक्कों और लातों से पीटा जाता था। कई बार उसके साथ यौन हिंसा के दौरान आरोपी फोन पर मौजूद रहता था और पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करता था।
अभियोजन पक्ष ने यह भी बताया कि आरोपी महिला को धमकियां देता था कि यदि उसने विरोध किया तो उसे जान से मार दिया जाएगा।
प्रसव के बाद भी नहीं रुका उत्पीड़न
मामले का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि पीड़िता ने बताया कि 2017 में बेटी के जन्म के तुरंत बाद भी उसका शोषण जारी रहा।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के अगले ही दिन उसे एक ट्रक ड्राइवर के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया।
पीड़िता चार बच्चों की मां है, हालांकि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बच्चे उस समय उसके साथ रह रहे थे या नहीं।
अदालत में पेश किए गए चौंकाने वाले सबूत
अदालत में कई ऑडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल सबूत पेश किए गए, जिनमें पीड़िता की चीखें और रोने की आवाजें सुनाई देती हैं।
इन रिकॉर्डिंग्स में यह भी सामने आया कि कई बार यौन हिंसा के दौरान उसे छड़ी, बेल्ट और लकड़ी के डंडों से पीटा जाता था। जांचकर्ताओं ने एक लकड़ी के उपकरण पर खून के निशान भी पाए।
इसके अलावा, पीड़िता की सूजी हुई और चोटिल तस्वीरें भी अदालत में प्रस्तुत की गईं, जिसने मामले की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया।

आरोपी का बचाव और अदालत की सख्त टिप्पणी
गिलौम बुची ने अदालत में अपने बचाव में कहा कि यह सब “आपसी सहमति” से हो रहा था और उसे कभी नहीं लगा कि वह किसी को नुकसान पहुंचा रहा है।
हालांकि, अभियोजन पक्ष ने उसके खिलाफ मैसेज और वॉइस रिकॉर्डिंग पेश कीं, जिनमें वह पीड़िता को धमकी देता हुआ सुनाई देता है।
अदालत ने माना कि यह मामला सहमति का नहीं बल्कि लंबे समय तक चले जबरन नियंत्रण, हिंसा और यौन शोषण का है।
सजा और कानूनी फैसला
चार घंटे से अधिक चली सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को 25 साल जेल की सजा सुनाई। फैसले के अनुसार, उसे अपनी सजा का कम से कम दो-तिहाई हिस्सा पूरा करने के बाद ही पैरोल के लिए आवेदन करने की अनुमति होगी।
अभियोजन पक्ष ने पहले उम्रकैद की मांग की थी, यह कहते हुए कि आरोपी समाज के लिए गंभीर खतरा हो सकता है।
गिसेल पेलिकॉट केस से मिली प्रेरणा
पीड़िता लेटेसिया ने बताया कि उसने यह मामला सार्वजनिक रूप से लड़ने का फैसला फ्रांस की गिसेल पेलिकॉट से प्रेरित होकर लिया।
Gisèle Pelicot वही महिला हैं, जिनके मामले ने 2024 में अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया था, जब उनके पति ने उन्हें नशीला पदार्थ देकर कई पुरुषों द्वारा यौन शोषण करवाया था।
लेटेसिया ने कहा कि पेलिकॉट की खुली सुनवाई की हिम्मत ने उन्हें अपनी कहानी सामने लाने की ताकत दी।
यौन हिंसा और सहमति पर वैश्विक बहस
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि “सहमति” और “जबरदस्ती” के बीच की रेखा कितनी स्पष्ट है, खासकर तब जब मानसिक दबाव, धमकी और हिंसा का इस्तेमाल किया जाए।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह केस दिखाता है कि आधुनिक समाज में भी घरेलू संबंधों के भीतर गंभीर शोषण छिपा रह सकता है।
महिला अधिकार और न्याय प्रणाली पर असर
फ्रांस में इस मामले ने महिला सुरक्षा कानूनों और घरेलू हिंसा के मामलों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। मानवाधिकार संगठनों ने कहा है कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच और सख्त सजा जरूरी है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और अपराधियों को रोकने के लिए मजबूत संदेश दिया जा सके।










