MD ड्रग्स माफिया रमेश विश्नोई ने पूछताछ में बताया कि वह गूगल से फैक्ट्री की जगह ढूंढता था। दो महीने में ठिकाना बदलता, मोबाइल-सिम बदलता और करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर चुका था।
Jaipur: आईजी (ANTF) विकास कुमार ने बताया कि राजस्थान के टॉप-10 वांटेड अपराधियों में शामिल MD ड्रग्स के मास्टरमाइंड रमेश कुमार विश्नोई उर्फ अनिल उर्फ रामलाल (31), निवासी धोरीमन्ना, बाड़मेर को गिरफ्तार किया गया है। रमेश दिसंबर 2025 से कोलकाता में किराए के फ्लैट में रह रहा था और खुद को केमिकल बिजनेसमैन व केमिस्ट्री टीचर बताता था।
वह कोलकाता में नए बिजनेस की आड़ में ड्रग्स नेटवर्क को फैलाने की कोशिश कर रहा था। AGTF टीम ने कड़ी मेहनत और तकनीकी निगरानी के बाद उसे दबिश देकर गिरफ्तार किया। रमेश 12वीं फेल है, लेकिन राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक की जेलों में सजा काट चुका है। उसके खिलाफ कुल 36 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
सप्लायर से बना ड्रग्स फैक्ट्री का पार्टनर
स्पेशल पूछताछ में रमेश ने बताया कि वह पहले महाराष्ट्र जेल में बंद डॉ. बीरजू के कहने पर MD ड्रग्स की सप्लाई करता था। वह गुजरात और महाराष्ट्र से ड्रग्स लाकर राजस्थान में बेचता था, लेकिन इसमें मुनाफा कम और जोखिम ज्यादा था।
करीब डेढ़ साल पहले डॉ. बीरजू ने उसे MD ड्रग्स बनाने का फॉर्मूला दिया। इसके बदले दोनों के बीच पार्टनरशिप तय हुई। MD ड्रग्स बनाने में मदद के लिए डॉ. बीरजू ने एक केमिस्ट भी उपलब्ध कराया, जिससे रमेश खुद फैक्ट्री चलाने लगा।
गूगल से ढूंढता था फैक्ट्री की जगह

रमेश ने बताया कि वह MD ड्रग्स बनाने के लिए सुनसान और सुरक्षित जगहों की तलाश करता था। इसके लिए वह गूगल सर्च का इस्तेमाल करता था। खाली पड़ी बड़ी जगहों पर बने छोटे कमरों को वह टारगेट करता था।
जगह पसंद आने पर वहां जाकर बिजली सप्लाई और आसपास के माहौल की जानकारी लेता था। खुद को केमिकल बिजनेसमैन बताकर मालिक से मिलता और दो महीने के लिए कमरा किराए पर ले लेता था। वह एक कमरे के लिए डेढ़ लाख रुपए महीना तक किराया देने को तैयार रहता था।
दो महीने में बदल देता था ठिकाना
रमेश हर फैक्ट्री को सिर्फ दो महीने तक ही चलाता था। इस दौरान वह 40 से 50 किलो MD ड्रग्स तैयार कर लेता था। किसी को शक न हो, इसलिए काम पूरा होते ही जगह खाली कर देता था और दूसरी लोकेशन पर चला जाता था।
आईजी विकास कुमार ने बताया कि MD ड्रग्स बनाने की प्रक्रिया आसान है और इसके केमिकल बाजार में आसानी से मिल जाते हैं। एक बार में 10 किलो MD ड्रग्स बनाई जाती थी। एक किलो बनाने में करीब 1 लाख रुपए खर्च होते थे, जिसे 29 लाख रुपए तक में बेचा जाता था।
करोड़ों की संपत्ति
रमेश ने अवैध कमाई से पश्चिमी राजस्थान में दर्जनभर से ज्यादा फैक्ट्रियां लगाईं। गांव में आलीशान मकान, दो ट्यूबवेल, फार्महाउस, दुकानें और मार्बल फैक्ट्री खरीद ली। करीब 25 करोड़ रुपए की संपत्ति खड़ी कर ली थी।
वह हर 10 दिन में मोबाइल और सिम बदल देता था। पत्नी से रोज बात करने का दावा करता है, लेकिन कहता है कि इस्तेमाल किए गए तरीके को कोई एजेंसी ट्रैक नहीं कर सकती थी। नाकाबंदी से बचने के लिए वह हमेशा हवाई सफर करता था।











