Colombia में राष्ट्रपति चुनाव से पहले सुरक्षा और हिंसा सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। सशस्त्र समूहों की बढ़ती गतिविधियों के बीच उम्मीदवार Iván Cepeda और Abelardo de la Espriella अलग-अलग रणनीतियों के साथ मतदाताओं के सामने हैं।
बोगोटा: कोलंबिया में राष्ट्रपति चुनाव 2026 केवल सत्ता परिवर्तन की लड़ाई नहीं है, बल्कि देश के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण मोड़ भी माना जा रहा है। दशकों से सशस्त्र संघर्ष, मादक पदार्थों की तस्करी और आपराधिक गिरोहों की हिंसा से जूझ रहे इस दक्षिण अमेरिकी देश में सुरक्षा इस बार चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है।
रविवार को होने वाले मतदान में मतदाता दो अलग-अलग दृष्टिकोणों के बीच चुनाव करेंगे। एक ओर वामपंथी सीनेटर इवान सेपेदा हैं, जो बातचीत और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की वकालत करते हैं। दूसरी ओर दक्षिणपंथी कारोबारी और वकील अबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला हैं, जो अपराधियों के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई और कठोर कानून व्यवस्था की बात कर रहे हैं।
विस्थापन और हिंसा से जूझ रहे नागरिक
कोलंबिया के कई इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह चुनाव सीधे उनके जीवन और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। राजधानी बोगोटा के एक सहायता केंद्र में शरण लेने वाली एडिलमा मार्टिनेज फ्लोरेस उन हजारों लोगों में शामिल हैं जिन्हें हिंसा के कारण अपना घर छोड़ना पड़ा।
उनके अनुसार, सशस्त्र आपराधिक समूहों ने स्थानीय निवासियों को धमकी भरे पर्चे बांटे और इलाका खाली करने का आदेश दिया। धमकियों के बाद लोगों के पास अपना घर और सामान छोड़कर भागने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
एडिलमा का कहना है कि उनके भाई की हत्या केवल इसलिए कर दी गई क्योंकि उन्होंने रंगदारी देने से इनकार कर दिया था। यह घटना उनके बच्चों के सामने हुई, जिसने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
छह दशक पुराना संघर्ष, लेकिन नई चुनौतियां
कोलंबिया पिछले लगभग 60 वर्षों से सशस्त्र संघर्ष का सामना कर रहा है। इस दौरान सरकारी बलों, विद्रोही संगठनों, अर्धसैनिक समूहों और ड्रग कार्टेलों के बीच संघर्ष में लाखों लोग प्रभावित हुए हैं।
हालांकि शांति स्थापित करने के कई प्रयास किए गए, लेकिन हाल के वर्षों में हालात फिर से बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में अवैध सशस्त्र समूहों की सदस्य संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है।
इन समूहों में कोलंबिया की पूर्व विद्रोही संगठन FARC के असंतुष्ट गुट, नेशनल लिबरेशन आर्मी (ELN) और क्लान डेल गोल्फो जैसे संगठन शामिल हैं। इन समूहों ने ग्रामीण क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाया है, जहां मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध खनन बड़े पैमाने पर होता है।
शांति वार्ता बनाम सैन्य कार्रवाई
राष्ट्रपति चुनाव के दोनों प्रमुख उम्मीदवार हिंसा और सुरक्षा के मुद्दे पर बिल्कुल अलग दृष्टिकोण रखते हैं।
इवान सेपेदा वर्तमान राष्ट्रपति की "टोटल पीस" नीति के प्रमुख समर्थकों में माने जाते हैं। उनका मानना है कि सशस्त्र समूहों के साथ बातचीत और सामाजिक सुधारों के जरिए स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है। उन्होंने 2016 के ऐतिहासिक शांति समझौते में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके तहत हजारों FARC लड़ाकों ने हथियार छोड़ दिए थे।

सेपेदा का कहना है कि सुरक्षा केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं आएगी। इसके लिए गरीबी, बेरोजगारी, असमानता और सरकारी उपस्थिति की कमी जैसे मूल कारणों को भी दूर करना होगा।
इसके विपरीत, अबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला का मानना है कि शांति वार्ता ने सशस्त्र समूहों को मजबूत होने का मौका दिया है। उनका वादा है कि यदि वे सत्ता में आते हैं तो 10 बड़े मेगा-कारागार बनाएंगे, सैन्य अभियान तेज करेंगे और अपराधियों के साथ बातचीत समाप्त कर देंगे।
बढ़ते विस्थापन ने बढ़ाई चिंता
बोगोटा प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार 2024 और 2025 के बीच जबरन विस्थापन के मामलों में लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह स्थिति पिछले दो दशकों में सबसे गंभीर मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोकीन उत्पादन में वृद्धि, शांति समझौते के बाद खाली हुए क्षेत्रों में सरकारी नियंत्रण की कमी और सुरक्षा रणनीति की कमजोरियां इस स्थिति के प्रमुख कारण हैं।
देश के प्रशांत तट क्षेत्र से आए एरिन गाम्बोआ बताते हैं कि उनके सौतेले भाई को सशस्त्र समूह अपने साथ ले गए और उसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। उनका कहना है कि कई क्षेत्रों में आपराधिक गिरोह, विद्रोही संगठन और अन्य सशस्त्र समूह अवैध खनन तथा ड्रग तस्करी के नियंत्रण के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
चुनाव प्रचार में अमेरिका की भूमिका भी चर्चा में
इस चुनाव में अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से अबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला का समर्थन किया है।
ट्रंप ने कहा है कि यदि दे ला एस्प्रिएला चुनाव जीतते हैं तो कोलंबिया को अमेरिका का पूरा सहयोग मिलेगा। उन्होंने इवान सेपेदा को "कट्टर वामपंथी" बताते हुए उनकी आलोचना भी की है।
वामपंथी दलों ने इस समर्थन को विदेशी हस्तक्षेप करार दिया है, जबकि दे ला एस्प्रिएला के समर्थक इसे अमेरिका और कोलंबिया के बीच मजबूत सहयोग का संकेत मानते हैं।
युवा मतदाताओं में सेपेदा की लोकप्रियता
जहां दे ला एस्प्रिएला सुरक्षा और कठोर कार्रवाई के मुद्दे पर समर्थन जुटा रहे हैं, वहीं युवा मतदाताओं के बीच इवान सेपेदा की लोकप्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है।
कई छात्रों और युवा पेशेवरों का मानना है कि केवल सैन्य कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है। उनके अनुसार शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को आपराधिक समूहों से दूर रखा जा सकता है।
युवा मतदाता यह भी मानते हैं कि लंबे समय तक चलने वाली शांति के लिए संवाद और विकास दोनों आवश्यक हैं।
चुनाव परिणाम तय करेंगे कोलंबिया की दिशा
राष्ट्रपति चुनाव 2026 कोलंबिया के लिए एक निर्णायक क्षण साबित हो सकता है। मतदाता यह तय करेंगे कि देश हिंसा और असुरक्षा से निपटने के लिए बातचीत और सामाजिक सुधारों का रास्ता अपनाएगा या फिर कठोर सुरक्षा नीतियों और सैन्य कार्रवाई पर भरोसा करेगा।
चुनाव का परिणाम न केवल कोलंबिया की घरेलू राजनीति बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी प्रभाव डाल सकता है। ऐसे समय में जब देश बढ़ती हिंसा, विस्थापन और अपराध से जूझ रहा है, करोड़ों नागरिकों की उम्मीदें इस चुनाव से जुड़ी हुई हैं।











