रूस से संभावित टकराव के बीच नाटो की तैयारी तेज, हथियारों से लेकर सुरक्षा ढांचे तक बढ़ेगा खर्च

यूरोप: यूक्रेन युद्ध के बीच नाटो देश रक्षा तैयारियां बढ़ा रहे हैं। 2035 तक GDP का 5% खर्च लक्ष्य है, जबकि यूरोपीय नाटो देशों का हथियार आयात 143% बढ़ा है।

यूक्रेन युद्ध के बीच नाटो के यूरोपीय सदस्य अपनी रक्षा और नागरिक सुरक्षा क्षमताएं बढ़ा रहे हैं। 2035 तक GDP का 5% रक्षा-सुरक्षा पर खर्च करने का लक्ष्य है। हथियार उत्पादन, सैन्य प्रशिक्षण, एयर डिफेंस और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर निवेश बढ़ रहा है।

वॉशिंगटन: यूक्रेन युद्ध के बीच यूरोप में सुरक्षा चिंताओं के बढ़ने के साथ नाटो देशों ने अपनी सैन्य और नागरिक सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने पर जोर बढ़ा दिया है। 18 और 19 सितंबर 2026 को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में नाटो की मिलिट्री कमेटी की बैठक हुई, जिसमें 32 सदस्य देशों के रक्षा प्रमुखों ने सामूहिक सुरक्षा, सैन्य क्षमता, तकनीक और यूक्रेन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बैठक की अध्यक्षता नाटो मिलिट्री कमेटी के चेयरमैन एडमिरल ज्यूसेप कावो द्रागोने ने की।

2035 तक GDP का 5% रक्षा और सुरक्षा पर खर्च

नाटो के सदस्य देशों ने 2025 में हेग में हुए शिखर सम्मेलन में 2035 तक हर साल अपने सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP का 5% रक्षा और सुरक्षा से जुड़े खर्च पर लगाने की प्रतिबद्धता जताई थी। इसमें कम से कम 3.5% GDP को सैन्य क्षमता और मुख्य रक्षा जरूरतों पर खर्च करने तथा 1.5% को रक्षा और सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण ढांचे की सुरक्षा, नागरिक तैयारी और लचीलेपन जैसे क्षेत्रों पर लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

नाटो के अनुसार, यह लक्ष्य केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य सैन्य बलों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ जरूरी बुनियादी ढांचे, रक्षा उद्योग, संचार नेटवर्क और संकट के समय समाज की प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना भी है। गठबंधन का कहना है कि यूरोप और कनाडा ने 2025 में अपने मुख्य रक्षा खर्च में वास्तविक रूप से करीब 20% की वृद्धि की थी।

यूक्रेन युद्ध से बदली यूरोप की सैन्य प्राथमिकताएं

रूस के 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने के हमले के बाद यूरोपीय देशों ने अपनी सैन्य क्षमताओं की समीक्षा तेज की है। युद्ध ने ड्रोन, मिसाइल, एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद की जरूरत को सामने रखा है।

हालिया विश्लेषणों में यह भी सामने आया है कि यूक्रेन युद्ध ने आधुनिक युद्ध में ड्रोन और अपेक्षाकृत कम लागत वाले हथियारों की भूमिका को बढ़ाया है। यूरोपीय देश अब ऐसी क्षमताओं पर भी ध्यान दे रहे हैं जिन्हें लंबे संघर्ष के दौरान तेजी से बनाया और दोबारा उपलब्ध कराया जा सके।

नाटो ने भी अपनी रक्षा औद्योगिक क्षमता बढ़ाने और हथियारों के उत्पादन को तेज करने के लिए कई पहल शुरू की हैं। गठबंधन का लक्ष्य ऐसी उत्पादन क्षमता विकसित करना है जिससे एयर डिफेंस और लंबी दूरी की मारक क्षमता समेत जरूरी सैन्य संसाधनों की मांग पूरी की जा सके।

ट्रंप के दबाव ने भी बढ़ाई रक्षा खर्च पर बहस

यूरोपीय रक्षा खर्च बढ़ाने की चर्चा में अमेरिका की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से नाटो के यूरोपीय सदस्यों से अपनी सुरक्षा पर अधिक खर्च करने और अमेरिका पर कम निर्भर रहने की मांग करते रहे हैं।

2025 के हेग सम्मेलन में नाटो देशों ने 5% GDP खर्च का लक्ष्य स्वीकार किया था। यह पहले निर्धारित 2% रक्षा खर्च के लक्ष्य की तुलना में बड़ा बदलाव था। नाटो ने इसे यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच रक्षा बोझ को अधिक संतुलित करने की दिशा में कदम बताया है।

हालांकि, सभी देशों के लिए इस लक्ष्य तक पहुंचना आसान नहीं है। सितंबर 2026 में अमेरिका के नाटो राजदूत मैथ्यू व्हिटेकर ने चेक गणराज्य के रक्षा खर्च को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई। चेक सरकार ने कहा है कि वह 2027 तक 2% के मौजूदा न्यूनतम लक्ष्य तक पहुंचने की दिशा में काम कर रही है।

जर्मनी और नॉर्वे में नागरिक सुरक्षा पर जोर

यूरोप की तैयारी केवल हथियारों और सैनिकों तक सीमित नहीं है। कई देश युद्ध या बड़े संकट की स्थिति में अस्पतालों, नागरिक सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहे हैं।

जर्मनी में शीत युद्ध के दौर से जुड़े पुराने चिकित्सा बंकरों और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को फिर इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बड़े हमले या बड़े पैमाने पर हताहतों की स्थिति में चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ने वाले दबाव से निपटना है।

नॉर्वे ने भी सैन्य और नागरिक स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया है। यूक्रेन युद्ध से मिली सीख के बीच यूरोपीय देशों के सामने यह सवाल प्रमुख हुआ है कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष में अस्पतालों, दवाओं, चिकित्सा कर्मियों और आपातकालीन परिवहन की क्षमता कैसे बनाए रखी जाए।

पोलैंड में सैन्य प्रशिक्षण बढ़ाने की तैयारी

रूस के साथ सीमा साझा करने वाले और यूक्रेन के करीबी नाटो सदस्य पोलैंड ने अपनी सैन्य तैयारियों में उल्लेखनीय विस्तार किया है। पोलिश सरकार ने 2027 तक हर साल करीब 1 लाख लोगों को स्वैच्छिक सैन्य प्रशिक्षण देने का लक्ष्य घोषित किया है। सरकार का उद्देश्य देश में प्रशिक्षित रिजर्व और नागरिक रक्षा क्षमता बढ़ाना है।

पोलैंड की सुरक्षा नीति में यूक्रेन युद्ध और नाटो की पूर्वी सीमा की सुरक्षा प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। सितंबर 2026 में प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने रूस की ओर से संभावित ड्रोन या रॉकेट आधारित हाइब्रिड हमलों की आशंका को लेकर भी चेतावनी दी है।

इसी अवधि में पोलैंड यूक्रेन और अन्य साझेदारों के साथ एक एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल गठबंधन में भी शामिल हुआ है। इसका उद्देश्य भविष्य में महंगे आयातित सिस्टम पर निर्भरता कम करने के लिए नई मिसाइल रक्षा क्षमता विकसित करना है।

ब्रिटेन में हथियार उत्पादन बढ़ाने की योजना

ब्रिटेन ने भी अपने रक्षा उद्योग की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई है। सरकार ने कम से कम छह नई म्यूनिशन और एनर्जेटिक्स फैक्ट्रियां बनाने तथा ब्रिटेन में निर्मित लंबी दूरी के हथियारों की खरीद बढ़ाने की घोषणा की है।

ब्रिटिश सरकार की 2025 की रणनीतिक रक्षा समीक्षा के तहत इन फैक्ट्रियों के लिए 1.5 अरब पाउंड के निवेश की घोषणा की गई थी। योजना में 7,000 तक ब्रिटेन में निर्मित लंबी दूरी के हथियारों की खरीद भी शामिल है।

हालांकि, सितंबर 2026 तक इन छह फैक्ट्रियों के सभी स्थानों का अंतिम चयन नहीं हुआ था। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने संसद को बताया कि इन परियोजनाओं की व्यवहार्यता से जुड़ा काम जारी है।

लिथुआनिया में करीब 5 हजार लोगों की सैन्य भर्ती

बाल्टिक क्षेत्र के नाटो सदस्य लिथुआनिया ने भी सैन्य प्रशिक्षण और अनिवार्य सेवा पर जोर बढ़ाया है। 2026 के लिए देश ने करीब 5,000 लोगों को सैन्य सेवा के लिए बुलाने की योजना बनाई है।

लिथुआनियाई सेना के अनुसार, 2026 की भर्ती पूरे वर्ष जारी रहने वाली है। इसमें अलग-अलग अवधि और कार्यक्रमों के तहत करीब 5,000 सैन्य भर्ती शामिल हैं।

बाल्टिक देशों के लिए रूस से जुड़ी सुरक्षा चिंताएं लंबे समय से महत्वपूर्ण रही हैं। ऐसे में इन देशों ने अपनी सेना, रिजर्व और अनिवार्य सैन्य सेवा की क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है।

यूरोप में हथियारों का आयात 143% बढ़ा

यूरोप की बदलती सुरक्षा नीति का असर हथियारों के अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI के अनुसार, 2016-20 की तुलना में 2021-25 के दौरान यूरोप के 29 नाटो देशों के प्रमुख हथियारों के आयात में 143% की वृद्धि हुई।

इस अवधि में इन 29 यूरोपीय नाटो देशों के हथियार आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 58% रही। SIPRI के मुताबिक, यूरोपीय देशों में रूस से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं के साथ-साथ अमेरिका की भविष्य की सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को लेकर अनिश्चितता ने भी हथियारों की मांग बढ़ाने में भूमिका निभाई।

पूरे यूरोप के प्रमुख हथियारों के आयात में 2021-25 के दौरान 2016-20 की तुलना में 210% की वृद्धि हुई। इस दौरान यूरोप दुनिया का सबसे बड़ा प्रमुख हथियार आयातक क्षेत्र बन गया। SIPRI के अनुसार, यूरोपीय देशों को मिले हथियारों में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 48% थी।

एयर डिफेंस और ड्रोन पर खास ध्यान

यूक्रेन युद्ध ने यूरोपीय देशों को एयर डिफेंस और ड्रोन युद्ध की अपनी क्षमताओं पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है। हालिया रिपोर्टों में यूरोपीय रक्षा अधिकारियों ने चिंता जताई है कि पारंपरिक सैन्य प्रणालियां तेजी से बदलती ड्रोन और मिसाइल तकनीक के सामने पर्याप्त नहीं हो सकतीं।

नाटो देशों के सामने एक बड़ी चुनौती एयर डिफेंस मिसाइलों और अन्य हथियारों के पर्याप्त भंडार की भी है। यूक्रेन में युद्ध ने दिखाया है कि लंबे संघर्ष में मिसाइलों और गोला-बारूद की खपत बहुत तेज हो सकती है। इसी कारण यूरोपीय देश महंगे अत्याधुनिक हथियारों के साथ कम लागत वाले और बड़ी संख्या में बनाए जा सकने वाले सिस्टम पर भी ध्यान दे रहे हैं।

रूस के साथ सीधे युद्ध की स्थिति नहीं

इन तैयारियों के बावजूद नाटो और रूस के बीच फिलहाल प्रत्यक्ष युद्ध नहीं चल रहा है। नाटो की आधिकारिक नीति इन निवेशों को सामूहिक रक्षा, प्रतिरोधक क्षमता और सदस्य देशों की सुरक्षा मजबूत करने से जोड़ती है।

नाटो के अनुसार, गठबंधन का उद्देश्य संभावित खतरों को रोकना और किसी सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में सामूहिक रक्षा सुनिश्चित करना है। 2025 के हेग शिखर सम्मेलन में रूस को यूरो-अटलांटिक सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक चुनौती बताया गया था।

इस बीच यूरोप में रक्षा खर्च, सैन्य प्रशिक्षण, हथियार उत्पादन और नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। यूक्रेन युद्ध ने इन तैयारियों को गति दी है, जबकि अमेरिका की ओर से यूरोपीय सहयोगियों से अधिक रक्षा खर्च की मांग ने नाटो के भीतर बोझ साझा करने की बहस को और तेज किया है।

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