रूस में 18 से 20 सितंबर तक संसदीय चुनाव हो रहे हैं। 450 सीटों वाली स्टेट ड्यूमा के लिए मतदान में यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। युद्ध-विरोधी याब्लोको पार्टी पार्टी-लिस्ट चुनाव से बाहर है और OSCE पर्यवेक्षक मौजूद नहीं हैं।
मॉस्को: रूस में 18 सितंबर 2026 से तीन दिवसीय संसदीय चुनाव शुरू हो गया है। यह 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद पहला स्टेट ड्यूमा चुनाव है। मतदान 18 से 20 सितंबर तक होगा और 450 सीटों वाली संसद के लिए प्रतिनिधि चुने जाएंगे।
450 सीटों के लिए हो रहा है मतदान
रूस के निचले सदन स्टेट ड्यूमा में कुल 450 सीटें हैं। इनमें 225 सीटों के लिए मतदाता राजनीतिक दलों की सूची पर वोट करते हैं, जबकि बाकी 225 सीटों पर अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से उम्मीदवार चुने जाते हैं। इस बार करीब 11.1 करोड़ मतदाता मतदान के पात्र हैं और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध है।
मतदान 18 सितंबर से शुरू होकर 20 सितंबर तक चलेगा। रूस के अलग-अलग समय क्षेत्रों के कारण मतदान चरणबद्ध तरीके से शुरू हुआ है। शुरुआती नतीजे मतदान खत्म होने के बाद सामने आने लगेंगे।
इस चुनाव के साथ कई क्षेत्रों में स्थानीय चुनाव भी हो रहे हैं। 11 क्षेत्रों में गवर्नर और 39 क्षेत्रों में क्षेत्रीय विधानसभाओं के सदस्यों का चुनाव होना है।
यूनाइटेड रशिया का संसद में दबदबा
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन वाली सत्तारूढ़ यूनाइटेड रशिया पार्टी मौजूदा ड्यूमा में सबसे बड़ी ताकत है। 2021 के चुनाव में पार्टी ने दो-तिहाई से ज्यादा सीटें जीती थीं और इस बार भी उसके संसद में अपना दबदबा बनाए रखने की उम्मीद जताई जा रही है।
यूनाइटेड रशिया के उम्मीदवारों की सूची में विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं। पार्टी ने यूक्रेन युद्ध में रूस के प्रयासों और राष्ट्रपति पुतिन की नीतियों का समर्थन किया है।
पुतिन ने चुनाव के पहले पार्टी के लिए समर्थन जताते हुए कहा था कि उसका कर्तव्य यूक्रेन में युद्ध में जीत के लिए हर संभव प्रयास करना है। क्रेमलिन चुनाव को रूस की राजनीतिक व्यवस्था और सरकार के लिए जनता के समर्थन को प्रदर्शित करने के अवसर के रूप में पेश कर रहा है।
कौन-कौन सी पार्टियां मैदान में हैं?
यूनाइटेड रशिया के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDPR), ए जस्ट रशिया और न्यू पीपल जैसी पार्टियां भी चुनाव लड़ रही हैं।
इनमें से कई दल संसद में लंबे समय से मौजूद हैं और यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर क्रेमलिन की नीति का समर्थन करते रहे हैं। कम्युनिस्ट पार्टी और LDPR रूस की राजनीति में पुरानी ताकतें हैं, जबकि न्यू पीपल अपेक्षाकृत नई पार्टी है।
इस चुनाव में याब्लोको पार्टी की अनुपस्थिति खास तौर पर चर्चा में है। पार्टी को रूस में युद्ध का खुला विरोध करने वाली प्रमुख राजनीतिक ताकत के रूप में देखा जाता रहा है।
याब्लोको को पार्टी सूची से हटाया गया
याब्लोको रूस की पंजीकृत पार्टियों में ऐसी पार्टी रही है जिसने यूक्रेन युद्ध का विरोध किया है और बातचीत के जरिए संघर्ष खत्म करने की वकालत की है। अगस्त 2026 में रूस की सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी की उम्मीदवार सूची का पंजीकरण रद्द कर दिया।
अदालत के फैसले में चुनाव संबंधी नियमों और प्रचार सामग्री से जुड़े मामलों का हवाला दिया गया। वहीं, याब्लोको ने अपने निष्कासन को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है और कहा है कि उसके युद्ध-विरोधी रुख की वजह से उसे चुनावी प्रक्रिया से हटाया गया। इन दावों की व्याख्या को लेकर पार्टी और रूसी अधिकारियों के बीच मतभेद हैं।
याब्लोको के कुछ उम्मीदवारों को व्यक्तिगत निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की अनुमति मिली है। हालांकि, पार्टी के तौर पर वह 450 सीटों की पार्टी-लिस्ट प्रतियोगिता में शामिल नहीं है।

यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों में भी मतदान
इस चुनाव का सबसे विवादित पहलू यूक्रेन के उन क्षेत्रों में मतदान है, जिन पर रूस का कब्जा है। रूस डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिजिया के अपने नियंत्रण वाले हिस्सों में भी चुनाव करा रहा है। क्रीमिया में भी मतदान हो रहा है, जिसे रूस ने 2014 में अपने में शामिल करने का दावा किया था।
रूस ने 2022 में डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिजिया को अपने क्षेत्र में शामिल करने का दावा किया था। हालांकि, यूक्रेन और अधिकांश अंतरराष्ट्रीय समुदाय रूस के इस दावे को मान्यता नहीं देते। रूस का इन चारों क्षेत्रों पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण भी नहीं है।
यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन यानी OSCE के चुनाव निगरानी संस्थान ODIHR ने कहा है कि यूक्रेन के अस्थायी रूप से कब्जे वाले क्षेत्रों में रूस की ओर से कराए जाने वाले चुनाव अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैधता नहीं रखते।
OSCE पर्यवेक्षकों को नहीं बुलाया गया
रूस ने इस बार स्टेट ड्यूमा चुनाव के लिए OSCE के चुनाव पर्यवेक्षकों को आमंत्रित नहीं किया। OSCE/ODIHR ने 6 अगस्त को कहा था कि पर्यवेक्षकों को आमंत्रित नहीं करने का फैसला अंतरराष्ट्रीय चुनावी प्रतिबद्धताओं को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।
OSCE के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी चुनाव प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद कर सकती है। संगठन ने रूस में स्वतंत्र नागरिक निगरानी और चुनावी प्रक्रिया की सार्वजनिक जांच से जुड़ी सीमाओं पर भी चिंता जताई है।
पुतिन ने ऑनलाइन डाला वोट
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को ऑनलाइन मतदान के जरिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। चुनाव के दौरान क्रेमलिन ने इसे राजनीतिक प्रक्रिया में जनता की भागीदारी और देश की एकजुटता दिखाने वाले अवसर के तौर पर पेश किया है।
हालांकि, चुनाव के माहौल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग आकलन सामने आए हैं। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि प्रमुख युद्ध-विरोधी राजनीतिक विकल्प के चुनाव से बाहर होने से मतदाताओं के सामने विकल्प सीमित हुए हैं। दूसरी ओर, रूसी अधिकारी चुनाव को संवैधानिक और नियमित राजनीतिक प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
चुनाव का यूक्रेन युद्ध से सीधा संबंध
यह चुनाव रूस के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह यूक्रेन पर 2022 के पूर्ण पैमाने के हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है। युद्ध अब चुनावी राजनीति का केंद्रीय मुद्दा बन चुका है।
पुतिन और सत्तारूढ़ पार्टी चुनाव को देश की एकता और सैन्य अभियान के समर्थन से जोड़ रहे हैं। वहीं, युद्ध की आलोचना करने वाले नेताओं और संगठनों पर रूस में लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक दबाव की रिपोर्टें सामने आती रही हैं।
यूक्रेन ने रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों में मतदान को अवैध बताया है। OSCE/ODIHR ने भी इन क्षेत्रों में आयोजित किए जाने वाले चुनावों को अंतरराष्ट्रीय कानून और यूक्रेन की संप्रभुता से जुड़े दायित्वों के संदर्भ में अस्वीकार्य बताया है।
कब आएंगे नतीजे?
रूस में मतदान 20 सितंबर की शाम समाप्त होगा। इसके बाद शुरुआती नतीजे आने शुरू होंगे और 21 सितंबर तक चुनाव की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट होने की उम्मीद है।
यूनाइटेड रशिया की मौजूदा संसदीय स्थिति और चुनाव से पहले उपलब्ध राजनीतिक आकलनों को देखते हुए पार्टी के फिर से सबसे बड़ी ताकत बने रहने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम सीट संख्या आधिकारिक परिणाम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस चुनाव का महत्व केवल 450 सीटों के परिणाम तक सीमित नहीं है। यह रूस की घरेलू राजनीति, यूक्रेन युद्ध के प्रति क्रेमलिन के रुख और कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों को रूस में शामिल करने के दावे के संदर्भ में भी अंतरराष्ट्रीय निगाहों में है।










