JPSC-JSSC भर्ती रद्द मामले में हाईकोर्ट का फैसला, SIT जांच की निगरानी करेंगे रिटायर्ड जज

झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC-JSSC भर्ती रद्द मामले में रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को SIT जांच का मॉनिटर नियुक्त किया। अंतरिम रोक बरकरार है।

झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC-JSSC भर्ती रद्द मामले में रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को SIT जांच का मॉनिटर नियुक्त किया है। कोर्ट ने भर्ती रद्द करने के आदेश पर लगी अंतरिम रोक भी बरकरार रखी।

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई की। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को SIT जांच की निगरानी के लिए मॉनिटर नियुक्त किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इससे जांच प्रभावित नहीं होगी और अंतरिम रोक अगली सुनवाई तक जारी रहेगी।

SIT जांच पर रिटायर्ड जज रखेंगे नजर

झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC और JSSC से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने रिटायर्ड हाईकोर्ट जज गौतम कुमार चौधरी को SIT की जांच का मॉनिटर/ऑब्जर्वर नियुक्त किया है। यह व्यवस्था मुख्य रूप से जांच के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से की जाने वाली उत्पीड़न या अनुचित व्यवहार संबंधी शिकायतों को देखने के लिए की गई है।

कोर्ट ने साफ किया कि किसी अभ्यर्थी को SIT की ओर से समन किया जाना अपने आप में उत्पीड़न नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसी को कानून के अनुसार जांच आगे बढ़ाने और आवश्यक होने पर किसी व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाने का अधिकार है।

हालांकि, यदि किसी अभ्यर्थी को लगता है कि जांच के दौरान उसके साथ अनुचित व्यवहार किया जा रहा है, तो वह अपनी शिकायत रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी के समक्ष रख सकता है। शिकायत की जांच के बाद यदि वह सही पाई जाती है तो SIT प्रमुख को आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जानकारी दी जाएगी।

समन मिलने पर अभ्यर्थियों को जांच में सहयोग करना होगा

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मॉनिटर की नियुक्ति का मतलब किसी अभ्यर्थी को SIT की जांच से अलग करना नहीं है। अगर किसी नियुक्त अभ्यर्थी को SIT का समन मिलता है, तो उसे जांच में पूरा सहयोग करना होगा।

अदालत ने यह व्यवस्था इसलिए की है ताकि जांच अपनी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार चलती रहे और साथ ही अभ्यर्थियों की शिकायतों के लिए भी एक स्वतंत्र व्यवस्था मौजूद रहे। रिटायर्ड जज की निगरानी SIT की जांच में हस्तक्षेप के तौर पर नहीं होगी।

मॉनिटर की सहायता के लिए रिटायर्ड IPS अधिकारी आरके मल्लिक को नोडल अधिकारी बनाए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

भर्ती रद्द करने के आदेश पर रोक बरकरार

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले के खिलाफ पहले से जारी अंतरिम आदेश को बरकरार रखा है। मामले में JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, JSSC-CGL, CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की है। राज्य सरकार ने सुनवाई के दौरान भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के अपने फैसले के समर्थन में जवाबी हलफनामा भी दाखिल किया।

सरकार ने कहा- पूरी परीक्षा प्रक्रिया हुई दूषित

राज्य सरकार ने अपने जवाब में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के फैसले को सही ठहराया है। सरकार के अनुसार, परीक्षा की पूरी प्रक्रिया कथित अनियमितताओं से प्रभावित हो गई थी और ऐसे में निष्पक्ष तरीके से परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों तथा अनुचित तरीके से लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया था।

सरकार ने अपने शपथपत्र में परीक्षा रद्द करने के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया है। इसमें वानशिखा बनाम केंद्र सरकार मामले से जुड़े निर्देश का उल्लेख किया गया है। सरकार का तर्क है कि जब परीक्षा प्रक्रिया व्यापक रूप से प्रभावित हो और निष्पक्ष एवं अनुचित तरीके से सफल हुए अभ्यर्थियों को अलग करना संभव न हो, तब पूरी परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया जा सकता है।

ICN Technology पर भी उठे सवाल

सरकार के शपथपत्र के अनुसार, JSSC-CGL परीक्षा से जुड़े कई गोपनीय कार्य ICN Technology को सौंपे गए थे। इनमें प्रश्नपत्र की छपाई और परीक्षा केंद्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने जैसे महत्वपूर्ण काम शामिल थे।

सरकार के अनुसार, कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच जारी है। मामले में ICN Technology के CEO सोमांश प्रकाश समेत 28 लोगों की गिरफ्तारी की बात शपथपत्र में कही गई है। इसके अलावा 265 लोगों को नोटिस जारी किए जाने का भी उल्लेख है।

सरकार ने जांच के दौरान नेपाल, आसनसोल, कोलकाता, बिहार, झरिया और बोकारो समेत अलग-अलग स्थानों पर अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराने या रटाने से जुड़ी जानकारी सामने आने का दावा किया है। मामले की जांच अभी जारी है।

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