नैनीताल में ब्रह्म मुहूर्त में मां नंदा-सुनंदा की प्राण प्रतिष्ठा, दर्शन को उमड़ी भीड़

नैनीताल में ब्रह्म मुहूर्त में मां नंदा-सुनंदा की प्राण प्रतिष्ठा हुई। दर्शन के लिए सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।
नैनीताल में ब्रह्म मुहूर्त में मां नंदा-सुनंदा की प्राण प्रतिष्ठा, दर्शन को उमड़ी भीड़
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नैनीताल में 124वें नंदा देवी महोत्सव का मुख्य धार्मिक आयोजन शनिवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में मां नंदा-सुनंदा की प्राण प्रतिष्ठा के साथ शुरू हुआ। नयना देवी मंदिर परिसर में बनाए गए विशेष मंडप में वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद, घंटियों की गूंज और छोलिया कलाकारों के ढोल-दमाऊ की धुन के बीच विधि-विधान से दोनों देवियों की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन के पट खोले गए तो मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह होते-होते दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई और मंदिर परिसर का वातावरण मां नंदा-सुनंदा के जयकारों से गूंजता रहा।

नैनीताल में आयोजित होने वाला नंदा देवी महोत्सव कुमाऊं क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल है। इस वर्ष यह महोत्सव 16 सितंबर से शुरू हुआ है और 23 सितंबर तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ चलेगा। महोत्सव के दौरान मां नंदा और सुनंदा को बेटी के रूप में मायके नैनीताल आने की धार्मिक परंपरा से जोड़ा जाता है। इसी क्रम में कदली वृक्षों को मंगोली क्षेत्र से लाकर उनकी पूजा-अर्चना की गई और नगर भ्रमण के बाद उन्हें नयना देवी मंदिर परिसर तक पहुंचाया गया।

मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे थे। प्राण प्रतिष्ठा और आरती के बाद जैसे ही दर्शन शुरू हुए, भक्तों की कतार लगातार लंबी होती गई। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते हुए मां के जयकारे लगाते रहे। कई भक्तों ने मां को फूल, अक्षत और नारियल अर्पित कर पूजा-अर्चना की तथा परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक सूरज चढ़ने के साथ दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ती गई।

ब्रह्म मुहूर्त में हुए इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक नजर आया। मंदिर परिसर में शंख और घंटियों की आवाज के बीच पुरोहितों ने निर्धारित विधि से पूजा संपन्न कराई। इसके बाद मां नंदा-सुनंदा को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मंडप में विराजमान किया गया। लंबे समय से इस आयोजन का इंतजार कर रहे स्थानीय लोगों के साथ बाहर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

इस महोत्सव के लिए नैनीताल शहर में पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं। महोत्सव के दूसरे दिन मंगोली से कदली वृक्ष लाए गए थे। कदली वृक्षों की विधिवत पूजा के बाद तल्लीताल से मालरोड, मल्लीताल और बाजार क्षेत्र होते हुए शोभायात्रा निकाली गई थी। इस दौरान हजारों श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए। महिलाओं ने झोड़े की प्रस्तुति दी और श्रद्धालु भजन गाते हुए आगे बढ़ते रहे। कदली वृक्षों को मां नंदा-सुनंदा के प्रतीक के रूप में मंदिर परिसर तक पहुंचाया गया, जहां आगे की धार्मिक प्रक्रिया पूरी की गई।

महोत्सव की शुरुआत से ही नैनीताल में धार्मिक उत्साह के साथ कुमाऊं की लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिल रही है। झोड़ा-छोलिया, ढोल-दमाऊ और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान इस आयोजन को केवल पूजा तक सीमित नहीं रखते, बल्कि इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान से भी जोड़ते हैं। आयोजन से जुड़े कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों और श्रद्धालुओं की भागीदारी रहती है।

महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने भी सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारियां की हैं। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार 18 से 23 सितंबर तक आयोजित होने वाले महोत्सव के लिए पुलिसकर्मियों को मेला क्षेत्र में पर्याप्त दृश्यता बनाए रखने, श्रद्धालुओं और पर्यटकों से शालीन व्यवहार करने तथा भीड़ के बीच व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। शोभायात्रा और कदली वृक्षों के नगर भ्रमण के दौरान यातायात को सुचारु रखने के लिए डायवर्जन प्लान तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों ने मेला क्षेत्र का निरीक्षण भी किया है। सुरक्षा व्यवस्था को परखने के साथ शहर में फ्लैग मार्च भी निकाला गया। इसका उद्देश्य महोत्सव के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना तथा भीड़ के बीच किसी तरह की अव्यवस्था को रोकना है। नैनीताल जैसे पर्यटन शहर में धार्मिक आयोजन के दौरान स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भी मौजूद रहते हैं, इसलिए पुलिस के सामने सुरक्षा के साथ यातायात व्यवस्था बनाए रखने की भी जिम्मेदारी है।

मां नंदा-सुनंदा की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब महोत्सव के अगले कार्यक्रम भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होंगे। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार 19 से 22 सितंबर तक शाम 6:30 बजे पंचआरती और प्रसाद वितरण के बाद देवी पूजन और देवी भोग का आयोजन किया जाएगा। 20 सितंबर को दुर्गा सप्तशती पाठ और हवन के साथ कन्या पूजन होगा। 21 सितंबर को डीएसए मैदान में महाभंडारे का आयोजन प्रस्तावित है। 22 सितंबर को सुंदरकांड और नंदा चालीसा पाठ होगा तथा शाम को नैनी झील में दीपदान किया जाएगा।

महोत्सव का प्रमुख आकर्षण 23 सितंबर को होने वाला मां नंदा-सुनंदा का डोला नगर भ्रमण होगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार देवी पूजन के बाद दोपहर 12 बजे डोला नगर भ्रमण के लिए निकलेगा। इसके बाद मंदिर के समीप विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस दौरान नैनीताल के विभिन्न बाजारों और प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने की संभावना है, जिसके लिए प्रशासन ने यातायात और सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी की है।

नैनीताल में मां नंदा-सुनंदा के दर्शन का धार्मिक महत्व श्रद्धालुओं के बीच विशेष माना जाता है। हर साल महोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुंचते हैं। पिछले वर्षों में भी प्राण प्रतिष्ठा के बाद दर्शन के लिए तड़के से ही लंबी कतारें लगती रही हैं। 2024 में भी मां नंदा-सुनंदा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे और मंदिर परिसर से बाहर तक कतारें देखी गई थीं।

इस वर्ष भी सुबह के समय मंदिर परिसर में यही दृश्य दिखाई दिया। कतार में खड़े श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते रहे और मां के जयकारे लगाते रहे। कई परिवार बच्चों और बुजुर्गों के साथ दर्शन के लिए पहुंचे। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने मां नंदा-सुनंदा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की और पूजा-अर्चना कर प्रसाद ग्रहण किया।

महोत्सव की खास बात यह भी है कि इसमें धार्मिक परंपराओं के साथ उत्तराखंड की स्थानीय संस्कृति को प्रमुखता दी जाती है। कदली वृक्षों की यात्रा से लेकर लोकगीत, झोड़ा और छोलिया तक अलग-अलग आयोजन कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत को सामने लाते हैं। इस वजह से नंदा देवी महोत्सव स्थानीय लोगों के साथ-साथ नैनीताल आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

फिलहाल शनिवार सुबह प्राण प्रतिष्ठा के बाद मां नंदा-सुनंदा के दर्शन का सिलसिला जारी है और मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ रहा है, दर्शन के लिए आने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ रही है। प्रशासन और पुलिस की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा तथा भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए निगरानी की जा रही है। आने वाले दिनों में महोत्सव के अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ शहर में भक्तिमय माहौल और अधिक देखने को मिलेगा।

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