दो पद छात्राओं के लिए आरक्षित, MBPG कॉलेज में बवाल; चुनाव से 11 दिन पहले रोस्टर पर हंगामा

हल्द्वानी के MBPG कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव से पहले रोस्टर जारी होने पर हंगामा हुआ। दो पद छात्राओं के लिए आरक्षित हैं। छात्रों की पुलिस से नोकझोंक भी हुई।
दो पद छात्राओं के लिए आरक्षित, MBPG कॉलेज में बवाल; चुनाव से 11 दिन पहले रोस्टर पर हंगामा
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हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव से पहले माहौल एक बार फिर गरमा गया है। चुनाव से करीब 11 दिन पहले जारी किए गए रोस्टर को लेकर छात्रों में नाराजगी सामने आई और कॉलेज परिसर में हंगामा हुआ। रोस्टर में दो पद छात्राओं के लिए आरक्षित किए जाने की जानकारी के बाद कुछ छात्र विरोध जताने कॉलेज परिसर में पहुंच गए। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच नोकझोंक की स्थिति भी बनी। कॉलेज में पहले से चल रही चुनावी सरगर्मियों और हाल के विवादों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी है।

एमबीपीजी कॉलेज कुमाऊं विश्वविद्यालय से संबद्ध प्रमुख महाविद्यालयों में शामिल है और यहां छात्रसंघ चुनाव को लेकर हर साल काफी राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिलती हैं। कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार संस्थान नैनीताल रोड, हल्द्वानी में स्थित है और कुमाऊं विश्वविद्यालय से संबद्ध है। इस बार छात्रसंघ चुनाव की तारीख 29 सितंबर निर्धारित की गई है। चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद से ही संभावित प्रत्याशी और उनके समर्थक कैंपस में सक्रिय हैं।

रोस्टर जारी होने के बाद विवाद का मुख्य कारण पदों का आरक्षण बताया जा रहा है। छात्रों के बीच इस बात को लेकर चर्चा शुरू हुई कि किन पदों पर कौन चुनाव लड़ सकेगा और आरक्षण की व्यवस्था किस तरह लागू होगी। इसी को लेकर कुछ छात्र कॉलेज परिसर में पहुंच गए और अपनी आपत्ति जताई। विरोध के दौरान माहौल बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने स्थिति संभालने की कोशिश की। छात्रों और पुलिस के बीच इसी दौरान नोकझोंक हुई। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में किसी बड़े नुकसान या गंभीर चोट की पुष्टि नहीं हुई है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कॉलेज पहले से ही चुनावी गतिविधियों को लेकर संवेदनशील बना हुआ है। 12 सितंबर को चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद छात्रों ने कॉलेज परिसर से लेकर नैनीताल रोड तक शक्ति प्रदर्शन किया था। रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान जुलूस और नारेबाजी के कारण कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस बल मौके पर मौजूद था और प्रशासन ने चुनावी माहौल में नियमों का पालन करने की अपील की थी।

इसके बाद 13 सितंबर को भी कॉलेज में चुनावी जुलूस और प्रचार को लेकर दो गुटों के समर्थक आमने-सामने आ गए थे। उपाध्यक्ष पद के संभावित प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच पहले कॉलेज परिसर में कहासुनी हुई और बाद में कॉलेज गेट के पास धक्का-मुक्की और हाथापाई की स्थिति बन गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। दूसरी ओर कोषाध्यक्ष पद के संभावित प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच भी विवाद की सूचना सामने आई थी।

लगातार हो रहे विवादों के बाद कॉलेज प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने का फैसला किया है। रिपोर्ट के अनुसार मुख्य गेट पर मेटल डिटेक्टर से जांच और परिचय पत्र देखने के बाद ही छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा है। प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य भी गेट पर निगरानी रख रहे हैं। इसका उद्देश्य बाहरी लोगों को कॉलेज परिसर में प्रवेश करने से रोकना और चुनावी गतिविधियों के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति को नियंत्रित करना है।

पुलिस और कॉलेज प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि चुनाव के दौरान बाहरी लोगों को परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। 14 सितंबर को हुई बैठक में लिंगदोह समिति से जुड़े नियमों पर भी चर्चा की गई थी। इसमें तय किया गया कि जिन लोगों का कॉलेज में दाखिला नहीं है, उनका परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। छात्रों को भी बिना पहचान पत्र के प्रवेश नहीं दिया जाएगा। कॉलेज के बाहर सड़क पर रैली निकालने पर भी रोक रहेगी।

प्रशासन ने संभावित प्रत्याशियों को चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। कॉलेज परिसर में किसी कार्यक्रम या प्रचार के लिए पहले अनुमति लेना जरूरी बताया गया है। सड़क पर जुलूस और शक्ति प्रदर्शन से यातायात प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए ऐसी गतिविधियों पर प्रतिबंध रखा गया है। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि चुनाव की आड़ में अराजकता या उपद्रव करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।

एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव का इतिहास भी काफी सक्रिय रहा है। 2022 में यहां पहली बार महिला छात्रसंघ अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं। इससे यह स्पष्ट होता है कि छात्रसंघ चुनाव में महिला उम्मीदवारों की भागीदारी पहले भी महत्वपूर्ण रही है। इस बार रोस्टर में छात्राओं के लिए पद आरक्षित किए जाने को लेकर छात्रों की प्रतिक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि चुनावी मैदान में उतरने वाले दावेदारों को आरक्षण के अनुसार अपनी रणनीति तय करनी होगी।

फिलहाल विवाद का केंद्र रोस्टर और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े नियम हैं। छात्रों की आपत्तियों पर कॉलेज प्रशासन की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है, यह आगे की स्थिति के लिए महत्वपूर्ण होगा। दूसरी ओर पुलिस का जोर कानून व्यवस्था बनाए रखने पर है। प्रशासन नहीं चाहता कि रोस्टर या चुनावी दावेदारी को लेकर शुरू हुआ विवाद हाथापाई या सड़क पर प्रदर्शन में बदल जाए।

29 सितंबर को होने वाले चुनाव के लिए अब समय काफी कम रह गया है। ऐसे में संभावित प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की गतिविधियां आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं। कॉलेज प्रशासन के सामने एक ओर चुनाव प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुसार पूरा कराने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर कैंपस में पढ़ाई और सामान्य गतिविधियां प्रभावित न हों, यह भी सुनिश्चित करना होगा। पिछले कुछ दिनों में हुए विवादों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पहले ही सतर्क है।

चुनावी माहौल में समर्थकों के बीच होने वाले विवादों को रोकने के लिए पुलिस ने भी स्पष्ट संदेश दिया है कि नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कॉलेज परिसर में बाहरी लोगों की मौजूदगी, बिना अनुमति रैली, सड़क पर जुलूस और पहचान पत्र के बिना प्रवेश जैसे मामलों पर प्रशासन पहले ही रोक लगा चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में पुलिस और कॉलेज प्रशासन की निगरानी और बढ़ सकती है।

एमबीपीजी कॉलेज में रोस्टर को लेकर हुआ ताजा विवाद अब किस दिशा में जाता है, यह प्रशासन की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और छात्रों की अगली प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल छात्रसंघ चुनाव की तारीख 29 सितंबर तय है और चुनाव से पहले कैंपस में माहौल पूरी तरह शांत रखना कॉलेज प्रशासन और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ-साथ नामांकन, प्रचार और मतदान के दौरान भी सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष नजर रखी जाएगी।

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