कोटा-बीकानेर प्रसूता मौत मामले पर अशोक गहलोत का हमला, बोले- राजस्थान का स्वास्थ्य तंत्र खुद वेंटिलेटर पर

अशोक गहलोत ने कोटा और बीकानेर में प्रसूताओं की मौत पर सरकार को घेरा। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था को वेंटिलेटर पर बताते हुए अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोटा और बीकानेर के अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत पर राज्य सरकार को घेरते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था को वेंटिलेटर पर बताया। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के निलंबन, आपराधिक कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की।

जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने कोटा और बीकानेर के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत और गंभीर रूप से बीमार हुई महिलाओं के मामले को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग गंभीर संकट में है और सरकारी लापरवाही के कारण गरीब परिवारों की महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।

गहलोत ने कहा कि हालिया घटनाएं केवल चिकित्सा व्यवस्था की खामियों को नहीं दर्शातीं, बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विफलता का संकेत हैं। उन्होंने सरकार से जिम्मेदार अधिकारियों और चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की।

कोटा मेडिकल कॉलेज की जांच रिपोर्ट पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत की जांच रिपोर्ट में उपचार में लापरवाही के संकेत सामने आना बेहद गंभीर मामला है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यदि जांच में चिकित्सा प्रक्रियाओं और अस्पताल प्रबंधन की कमियां सामने आई हैं, तो इसे सामान्य घटना नहीं माना जा सकता। गहलोत ने कहा कि ऐसी घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की आशंका संबंधी रिपोर्ट सही है, तो यह अस्पताल प्रशासन के दावों के विपरीत स्थिति को दर्शाता है और मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

कई महिलाएं अब भी गंभीर स्थिति में

गहलोत ने कहा कि प्रसूताओं की मौतों के बाद भी कई महिलाएं अस्पताल में गंभीर स्थिति में भर्ती हैं और कुछ को किडनी संबंधी जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ मरीजों का इलाज डायलिसिस के जरिए किया जा रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पीड़ित परिवारों से मुलाकात के दौरान उन्होंने गहरी चिंता और असुरक्षा की भावना देखी। परिजनों को इस बात का डर है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी लंबे समय तक चलने वाले इलाज का खर्च वहन करना उनके लिए संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए ऐसी चिकित्सा जटिलताएं जीवनभर का संकट बन सकती हैं।

कोटा-बीकानेर प्रसूता मौत मामले पर अशोक गहलोत का हमला, बोले- राजस्थान का स्वास्थ्य तंत्र खुद वेंटिलेटर पर

सरकार से आजीवन इलाज की जिम्मेदारी लेने की मांग

गहलोत ने राज्य सरकार से मांग की कि यदि प्रभावित महिलाओं की किडनी को स्थायी नुकसान पहुंचता है, तो उनके किडनी ट्रांसप्लांट और भविष्य के संपूर्ण उपचार का खर्च सरकार उठाने की सार्वजनिक घोषणा की जाए।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में हुई कथित लापरवाही का भार मरीजों और उनके परिवारों पर नहीं डाला जा सकता। यदि सरकारी अस्पतालों में इलाज के दौरान मरीजों को गंभीर नुकसान हुआ है, तो राज्य सरकार की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी बनती है कि वह उनके इलाज की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करे। विशेषज्ञों का भी मानना है कि गंभीर चिकित्सा जटिलताओं से जूझ रहे मरीजों के लिए दीर्घकालिक उपचार योजनाएं आवश्यक होती हैं, जिनका खर्च सामान्य परिवारों के लिए उठाना मुश्किल हो सकता है।

बीकानेर के अस्पतालों की स्थिति पर भी चिंता

गहलोत ने कहा कि समस्या केवल कोटा तक सीमित नहीं है। उन्होंने बीकानेर के अस्पतालों में सामने आए मामलों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वहां भी प्रसूताओं की स्वास्थ्य जटिलताओं के पीछे अस्पतालों की बदहाल स्थिति, स्वच्छता संबंधी समस्याएं और संक्रमण की आशंकाएं सामने आई हैं।

उन्होंने कहा कि यदि अलग-अलग शहरों के सरकारी अस्पतालों में समान प्रकार की घटनाएं सामने आ रही हैं, तो इसे किसी एक संस्थान की समस्या नहीं माना जा सकता। इसके बजाय पूरे स्वास्थ्य तंत्र की समीक्षा की आवश्यकता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग में मौजूद संरचनात्मक कमियों और निगरानी की कमजोर व्यवस्था के कारण मरीजों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है।

"स्वास्थ्य महकमा खुद वेंटिलेटर पर"

अपने बयान में गहलोत ने कहा कि राजस्थान का स्वास्थ्य विभाग स्वयं गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है। उनका कहना था कि अस्पतालों में संसाधनों की कमी, निगरानी तंत्र की कमजोरियां और प्रशासनिक उदासीनता के कारण आम नागरिकों का भरोसा प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब और ग्रामीण परिवार सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि वे मुख्य रूप से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। गहलोत ने कहा कि जब सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध नहीं होगा, तब सबसे ज्यादा नुकसान समाज के कमजोर वर्गों को उठाना पड़ेगा।

सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार पर संवेदनशीलता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि इन घटनाओं को केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा मानकर आगे बढ़ना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है या जिनकी महिलाएं गंभीर बीमारियों से जूझ रही हैं, उनके लिए यह केवल एक प्रशासनिक मामला नहीं बल्कि जीवन बदल देने वाली त्रासदी है। गहलोत के अनुसार, सरकार को प्रभावित परिवारों के साथ सीधे संवाद करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें हर संभव चिकित्सा और आर्थिक सहायता मिले।

जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

गहलोत ने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारियों और चिकित्साकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि केवल जांच समिति गठित करना पर्याप्त नहीं है। यदि जांच में गंभीर चूक सामने आती है, तो जवाबदेही तय करना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना भी उतना ही आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने और उनके पुनर्वास के लिए विशेष सहायता पैकेज तैयार करने की मांग भी की।

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर राष्ट्रीय बहस की जरूरत

कोटा और बीकानेर की घटनाओं ने एक बार फिर भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, अस्पतालों की स्वच्छता और मरीजों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में संक्रमण नियंत्रण, ऑपरेशन थिएटर प्रबंधन और प्रसूता देखभाल की गुणवत्ता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मामला अब केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की जवाबदेही और गुणवत्ता को लेकर व्यापक बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्टों और सरकारी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि प्रभावित परिवार न्याय और बेहतर चिकित्सा सुरक्षा की उम्मीद कर रहे हैं।

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