कर्नाटक के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री बने सिद्धारमैया, देवराज उर्स का ऐतिहासिक रिकॉर्ड टूटा

कर्नाटक के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री बने सिद्धारमैया, देवराज उर्स का ऐतिहासिक रिकॉर्ड टूटा

कर्नाटक की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।

बेंगलुरु: सिद्धरमैया ने जनवरी में कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे डी. देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय उन्होंने जनता के आशीर्वाद को दिया। देवराज उर्स ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में सात साल और 239 दिन कार्य किया था, जबकि सिद्धरमैया ने बुधवार को सात साल और 240 दिन पूरे कर लिए। 

उन्होंने देवराज उर्स और अपने बीच एक महत्वपूर्ण अंतर भी उजागर किया, कहा कि जहां देवराज उर्स शासक वर्ग से संबंधित थे, वहीं वह सामाजिक रूप से पिछड़े समुदाय (कुरुबा या चरवाहा) से आते हैं।

डीके शिवकुमार ने दी बधाई, बताया गर्व का क्षण

इस अवसर पर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह केवल कांग्रेस पार्टी के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के लिए गर्व का क्षण है। डीके शिवकुमार ने कहा, यह खुशी का पल है। सिद्धारमैया का नाम इतिहास में दर्ज रहेगा। उन्होंने जिस तरह से जनता का भरोसा जीता है, वह सराहनीय है।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय सीधे तौर पर कर्नाटक की जनता को दिया। उन्होंने कहा कि जनता के विश्वास और आशीर्वाद के कारण ही वह इस मुकाम तक पहुंच सके हैं। सिद्धारमैया ने यह भी रेखांकित किया कि यह गर्व की बात है कि वह और देवराज उर्स दोनों मैसूरु क्षेत्र से आते हैं।उन्होंने कहा, मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि मैं मुख्यमंत्री बनूंगा। मंत्री बनना भी मेरे सपनों में नहीं था। यह सब जनता के समर्थन से संभव हो पाया है।

सामाजिक पृष्ठभूमि का किया उल्लेख

सिद्धारमैया ने देवराज उर्स से अपनी तुलना पर बात करते हुए एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहलू को उजागर किया। उन्होंने कहा कि जहां देवराज उर्स शासक वर्ग से आते थे, वहीं वह स्वयं सामाजिक रूप से पिछड़े कुरुबा (चरवाहा) समुदाय से हैं। उनके अनुसार, यह तथ्य इस उपलब्धि को और अधिक अर्थपूर्ण बनाता है। उन्होंने कहा कि देवराज उर्स एक बेहद लोकप्रिय नेता थे और सामाजिक पृष्ठभूमि अलग होने के बावजूद जनता ने दोनों नेताओं को समान रूप से स्वीकार किया।

अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए सिद्धारमैया ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कुल 13 चुनाव लड़े हैं। इनमें से उन्होंने आठ चुनावों में जीत दर्ज की, जबकि दो लोकसभा और दो विधानसभा चुनावों में हार का सामना भी किया। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य शुरू में सिर्फ तालुक बोर्ड सदस्य बनना था, लेकिन परिस्थितियों और जनता के समर्थन ने उन्हें यहां तक पहुंचा दिया।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़ने की उम्मीद थी, तो सिद्धारमैया ने मुस्कराते हुए कहा, रिकॉर्ड तोड़ने के लिए ही होते हैं। उन्होंने इस उपलब्धि की तुलना क्रिकेट से करते हुए कहा कि जैसे विराट कोहली ने सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड तोड़े, वैसे ही राजनीति में भी नए मानक स्थापित होते रहते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका और देवराज उर्स का दौर अलग-अलग परिस्थितियों में रहा है, इसलिए सीधी तुलना नहीं की जा सकती।

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