कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को सुप्रीम कोर्ट ने टेरर फंडिंग मामले में जमानत दे दी है। शाह 2019 से जेल में बंद थे और अब उन्हें कुछ शर्तों के साथ राहत मिली है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उन पर आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग में शामिल होने का आरोप लगाया था।
नई दिल्ली: Supreme Court of India ने कश्मीरी अलगाववादी नेता Shabbir Ahmad Shah को गुरुवार को जमानत दे दी है। यह फैसला जम्मू-कश्मीर से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में आया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शब्बीर अहमद शाह की जमानत मंजूर की जा रही है। अदालत ने यह भी बताया कि जमानत पर विस्तृत आदेश कुछ शर्तों के साथ जल्द ही जारी किया जाएगा। इन शर्तों में क्या-क्या शामिल होगा, यह आदेश में स्पष्ट किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को शब्बीर शाह की जमानत मंजूर की। अदालत ने कहा कि जमानत पर विस्तृत आदेश जल्द ही जारी किया जाएगा, जिसमें सभी शर्तों का उल्लेख होगा। फिलहाल अदालत ने यह स्पष्ट किया कि जमानत पर कुछ शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा। शब्बीर शाह के वकील ने कहा कि यह फैसला उनके लिए बड़ी राहत है। हालांकि अदालत की शर्तों और आगे की प्रक्रिया का पालन करना शाह के लिए आवश्यक होगा।
शब्बीर शाह का जन्म 14 जून 1953 को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के कादीपोरा गांव में एक व्यापारी परिवार में हुआ था। उनके पिता गुलाम मोहम्मद वरियर ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर थे, जिनकी 1989 में पुलिस हिरासत में मौत हो गई। शाह ने कम उम्र में ही राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया। मात्र 14 साल की उम्र में 1968 में उन्होंने भारत सरकार के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व किया, जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया और तीन महीने कैद में रखा गया। इसके बाद उन्होंने अपने साथियों के साथ यंग मेन लीग की स्थापना की।

जेल और नजरबंदी का दौर
शब्बीर शाह ने अपने राजनीतिक जीवन में बार-बार जेल और नजरबंदी का सामना किया। उन्होंने श्रीनगर की सेंट्रल जेल में कई अन्य अलगाववादी नेताओं के संपर्क में आने का अनुभव भी हासिल किया।
- 1974: अपने साथियों के साथ जम्मू कश्मीर पीपुल्स लीग बनाई।
- 1998: उन्होंने JKDFP (जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रंट पार्टी) की स्थापना की।
- 1968 से लगातार जेल, हिरासत और घर में नजरबंदी का सामना करना पड़ा।
- 1975 में इंदिरा-शेख समझौते का विरोध करने पर भी उन्हें जेल जाना पड़ा।
- 1988-89 में भूमिगत रहने के बाद 1989 में गिरफ्तार हुए।
- 2017 में उन्होंने तहरीक-ए-हुर्रियत से सचिव पद से इस्तीफा दिया।
शाह की राजनीतिक गतिविधियां और गिरफ्तारी इतिहास ने उन्हें कश्मीर में प्रमुख अलगाववादी नेता के रूप में स्थापित किया। NIA ने शब्बीर शाह पर आरोप लगाया था कि वे आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग में शामिल थे। यह मामला 2019 में उजागर हुआ और तब से शाह जेल में बंद थे। जमानत मिलने के बाद उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत कुछ शर्तों का पालन करना होगा।












