World Economic Forum Davos में ग्रीनलैंड विवाद ने अमेरिका को घेर लिया है। ट्रंप की टैरिफ धमकी से यूरोपीय देश नाराज हैं। NATO और EU नेताओं ने संप्रभुता और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था पर जोर दिया।
World Economic Forum 2026: स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे World Economic Forum में अमेरिका इस समय जबरदस्त दबाव में नजर आ रहा है। ग्रीनलैंड को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख ने वैश्विक राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। सम्मेलन शुरू होने से पहले ही यूरोपीय और NATO देशों ने अमेरिका के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह के जबरन नियंत्रण को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है।
दावोस में बुधवार को ट्रंप के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन उनके आने से पहले ही माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। विश्व नेताओं ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि ग्रीनलैंड का मुद्दा इस बार चर्चा के केंद्र में रहेगा।
अमेरिका पर बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की महत्वाकांक्षा ने उसके पुराने सहयोगियों को भी असहज कर दिया है। यूरोपीय देशों का मानना है कि किसी भी संप्रभु क्षेत्र पर दबाव बनाना नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था के खिलाफ है।
सम्मेलन में मौजूद कई नेताओं ने अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय कठघरे में खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी दबाव केवल एक क्षेत्रीय मामला नहीं बल्कि वैश्विक संतुलन से जुड़ा विषय है।
ट्रंप के लिए दावोस की चुनौती
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को World Economic Forum में शामिल होने वाले हैं। यह यात्रा उनके लिए आसान नहीं मानी जा रही है। ट्रंप ऐसे समय दावोस पहुंच रहे हैं जब उन्होंने डेनमार्क समेत सात सहयोगी देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है।
उनकी यह चेतावनी ग्रीनलैंड पर अमेरिकी रुख का समर्थन न करने वाले देशों के लिए है। इससे यूरोपीय देशों में नाराजगी और गहरी हो गई है। दावोस में ट्रंप को इसी मुद्दे पर तीखे सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
टैरिफ की धमकी से बिगड़ते रिश्ते
ट्रंप ने साफ किया है कि अगले महीने से टैरिफ 10 प्रतिशत से शुरू होंगे और जून तक 25 प्रतिशत तक बढ़ाए जाएंगे। यह बयान यूरोप के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
यूरोपीय नेताओं का कहना है कि इस तरह की नीति से वैश्विक व्यापार व्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा। World Economic Forum जैसे मंच पर यह मुद्दा अमेरिका के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
ट्रंप का दावोस से पहले बयान
दावोस रवाना होने से पहले ट्रंप ने कई चौंकाने वाले बयान दिए। उन्होंने यूरोपीय अधिकारियों के बीच प्रसारित एक टेक्स्ट मैसेज में ग्रीनलैंड पर अपने आक्रामक रुख को पिछले साल Nobel Peace Prize न मिलने से जोड़ा।
नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोर से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अब उन्हें केवल शांति के बारे में सोचने की कोई बाध्यता महसूस नहीं होती। यह बयान यूरोपीय कूटनीति के लिए चिंता का विषय बन गया।
एयर फोर्स वन की तकनीकी परेशानी
ट्रंप की दावोस यात्रा की शुरुआत भी मुश्किलों भरी रही। Air Force One में एक मामूली इलेक्ट्रिकल समस्या आ गई। इसके चलते विमान को उड़ान के करीब 30 मिनट बाद एहतियातन वापस मोड़ दिया गया।
इस वजह से राष्ट्रपति की स्विट्जरलैंड पहुंच में देरी हुई। व्हाइट हाउस ने इसे तकनीकी सावधानी बताया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे प्रतीकात्मक घटना के रूप में भी देखा जा रहा है।
यूरोपीय आयोग की कड़ी चेतावनी
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen ने दावोस में ट्रंप की नीतियों पर साफ शब्दों में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका टैरिफ लागू करता है तो यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया अटल, एकजुट और आनुपातिक होगी।
उन्होंने संकेत दिया कि ट्रंप की टैरिफ धमकी अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में बने व्यापार ढांचे को कमजोर कर सकती है। यह वही समझौता है जिसे पिछले जुलाई में कड़ी बातचीत के बाद हासिल किया गया था।
व्यापार समझौते पर मंडराता खतरा

Ursula von der Leyen ने याद दिलाया कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच पिछले साल एक व्यापार समझौते पर सहमति बनी थी। उनका कहना था कि नई टैरिफ नीति उस समझौते की भावना के खिलाफ जाती है।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि ट्रंप दावोस जैसे मंच पर आवास जैसे घरेलू मुद्दों पर चर्चा क्यों करना चाहते हैं, जबकि वैश्विक व्यापार गंभीर संकट का सामना कर रहा है।
दावोस में ट्रंप का एजेंडा
ट्रंप का कहना है कि वे World Economic Forum में अपनी मौजूदगी का उपयोग housing affordability और cost of living जैसे मुद्दों पर बात करने के लिए करेंगे। उनके मुताबिक ये अमेरिकी नागरिकों की प्राथमिक चिंताएं हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनलैंड और टैरिफ विवाद के बीच उनके इस एजेंडे को गंभीरता से लेना मुश्किल हो सकता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
Cato Institute के आर्थिक विशेषज्ञ स्कॉट लिंसिकोम ने कहा कि यदि ट्रंप की टैरिफ नीति अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार युद्धविराम को तोड़ देती है तो इसका सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
उनके अनुसार इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हो सकता है। ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। housing affordability और भी मुश्किल हो सकती है। यह स्थिति ट्रंप के लिए राजनीतिक झटका बन सकती है।
ट्रंप ने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने जवाबी कदम उठाए तो अमेरिका भी उसी तरह प्रतिक्रिया देगा। उन्होंने कहा कि वे जैसा करेंगे, मैं वैसा ही जवाब दूंगा।
युद्ध और आतंकवाद पर चर्चा
World Economic Forum में केवल ग्रीनलैंड और टैरिफ ही नहीं बल्कि रूस यूक्रेन युद्ध, ईरान अमेरिका तनाव और आतंकवाद जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में हैं। विश्व नेताओं का मानना है कि मौजूदा वैश्विक माहौल में सहयोग की जरूरत है, न कि दबाव की राजनीति की।
कनाडा और फ्रांस का सख्त रुख
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप का नाम लिए बिना बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था कमजोर हो चुकी है। शक्तिशाली देश कमजोर देशों की संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी ट्रंप की नीति की आलोचना की। उन्होंने ग्रीनलैंड समर्थक देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने के फैसले को गलत बताया। साथ ही NATO और यूरोपीय देशों की एकजुटता दोहराई।
दावोस में भारत की मजबूत मौजूदगी
World Economic Forum की 56वीं वार्षिक बैठक में भारत ने अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल भेजा है। इसमें केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव समेत कई मुख्यमंत्री और 100 से अधिक CEO शामिल हैं।
अश्विनी वैष्णव ने AI और Technology पर पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि केवल बड़े मॉडल बनाना पर्याप्त नहीं है। ROI और low cost solutions पर फोकस जरूरी है। उन्होंने Fifth Industrial Revolution की अवधारणा पर जोर दिया। वैष्णव के मुताबिक भारत की AI approach समावेशी, scalable और democratized है।












