दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू परिवार को नौकरी-के-बदले जमीन मामले में 1 से 25 फरवरी तक पेशी से राहत दी। मीसा भारती और हेमा यादव ने आरोपों से इनकार किया। सुनवाई 9 मार्च से रोजाना होगी।
New Delhi: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने नौकरी के बदले जमीन मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को थोड़ी राहत दी है। कोर्ट ने आज आदेश दिया कि लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव 1 से 25 फरवरी के बीच आरोप तय होने के लिए पेश होने से मुक्त रहेंगे। यह फैसला परिवार को आगामी सुनवाई तक राहत देने के लिए लिया गया है। इस मामले में मीसा भारती और हेमा यादव आज अदालत में पेश हुईं और उन्होंने आरोपों से इनकार किया।
इस राहत से लालू परिवार के नेताओं को आगामी सुनवाई से पहले तैयारी का समय मिला है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जांच और सुनवाई 9 मार्च से रोजाना शुरू होगी। इस दौरान सबूतों का रिकॉर्डिंग और केस की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से न्यायिक निगरानी में होगी।
मीसा भारती और हेमा यादव की पेशी
आज अदालत में पेश होने पर मीसा भारती और हेमा यादव ने चार्ज से इनकार किया। उनका कहना था कि उन्हें इस मामले में कोई अपराधी भूमिका नहीं निभाई है। दोनों नेताओं की उपस्थिति ने अदालत को यह संकेत दिया कि वे न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अदालत ने इसे सकारात्मक कदम माना और आगे की सुनवाई की तैयारी के लिए समय तय किया।
केस की पृष्ठभूमि
यह मामला सीबीआई द्वारा दर्ज किया गया था और इसे नौकरियों के बदले जमीन हासिल करने की योजना के रूप में देखा गया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने पहले ही नोट किया था कि इस मामले में लालू परिवार सहित 41 आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। इस मामले में कुल 52 लोगों को पहले ही बरी कर दिया गया था।

कोर्ट के अनुसार, यह एक सुनियोजित साजिश थी जिसमें सरकारी नौकरियों के बदले संपत्ति हासिल करने का प्रयास किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इसमें परिवार और उनके करीबी सहयोगियों की भूमिका शामिल थी।
अदालत की सख्त टिप्पणी
पिछली सुनवाई में स्पेशल जज विशाल गोग्ने ने कड़ी टिप्पणी की थी। जज ने कहा कि लालू यादव और उनके परिवार ने आपराधिक गिरोह की तरह कार्य किया। अदालत के अनुसार, सरकारी नौकरियों के बदले संपत्ति हासिल करना केवल एक व्यक्तिगत लाभ का मामला नहीं था, बल्कि यह एक सुनियोजित और संरचित योजना का हिस्सा था।
जज ने इस मामले में सभी आरोपियों की जिम्मेदारी पर जोर दिया और कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और सख्ती के साथ होगी। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की ढील या विलंब को अनुमति नहीं दी जाएगी।
9 मार्च से शुरू होगी सुनवाई
राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च से रोजाना करने का निर्णय लिया है। इस दौरान सभी सबूतों को रिकॉर्ड किया जाएगा और ट्रायल की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न होगी। अदालत ने कहा कि इससे न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होगी और मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी।
सुनवाई में यह देखा जाएगा कि नौकरी के बदले जमीन हासिल करने की योजना में परिवार के कौन-कौन से सदस्य शामिल थे और किस तरह से संपत्ति का लेन-देन हुआ। अदालत की यह तैयारी यह सुनिश्चित करेगी कि केस का निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान हो।
न्यायिक प्रक्रिया में परिवार की भूमिका
लालू परिवार की अदालत में उपस्थिति यह दर्शाती है कि वे न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं। हालांकि, अदालत ने कहा कि यह राहत केवल पेशी से संबंधित है और आरोपों की गंभीरता पर कोई प्रभाव नहीं डालेगी। इस मामले में सभी साक्ष्यों की जांच पूरी गहनता से की जाएगी और दोषियों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
मीसा भारती और हेमा यादव की उपस्थिति ने यह दिखाया कि परिवार के अन्य सदस्य भी न्यायिक प्रक्रिया में शामिल हैं। यह कदम अदालत के लिए सकारात्मक माना गया क्योंकि इससे मामले की सुनवाई में व्यवधान नहीं आएगा और ट्रायल समय पर पूरी हो सकेगी।









