लोकसभा में मनरेगा की जगह नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने पर तीखी बहस हुई। कांग्रेस ने विरोध किया, जबकि शशि थरूर ने गांधीजी का नाम हटाने को देश की आत्मा और ग्रामीण भारत के खिलाफ कदम बताया।
New Delhi: लोकसभा में मंगलवार को उस वक्त तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली, जब केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा की जगह एक नया कानून लाने का प्रस्ताव रखा। जैसे ही सरकार ने यह संकेत दिया कि मनरेगा को समाप्त कर उसकी जगह नया बिल लाया जा रहा है, विपक्षी दलों ने सदन में जोरदार विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इसे ग्रामीण भारत के हितों के खिलाफ कदम बताया और सरकार पर महात्मा गांधी की विरासत को कमजोर करने का आरोप लगाया।
नया कानून पेश होते ही बढ़ा हंगामा
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण बिल 2025 पेश किया। इस बिल को संक्षेप में VB–G RAM G Bill कहा जा रहा है। बिल के पेश होते ही विपक्षी बेंचों से शोर शुरू हो गया। विपक्ष का कहना था कि मनरेगा सिर्फ एक रोजगार योजना नहीं बल्कि ग्रामीण भारत की रीढ़ है और इससे महात्मा गांधी का नाम हटाना राष्ट्रपिता के विचारों का अपमान है।
शशि थरूर का तीखा और शायराना विरोध
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस बिल का खुलकर विरोध किया और इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि मनरेगा से गांधीजी का नाम हटाना सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि देश की आत्मा और नैतिक मूल्यों पर हमला है। थरूर ने सदन में कहा कि यह फैसला राष्ट्रपिता के साथ अन्याय है और इससे ग्रामीण रोजगार योजना की ऐतिहासिक और नैतिक पहचान खत्म हो जाएगी।
थरूर का अंदाज हमेशा की तरह अलग और प्रभावशाली रहा। उन्होंने कहा कि गांधीजी का नाम मनरेगा से जुड़ा होना केवल प्रतीकात्मक नहीं था, बल्कि यह उनकी सोच और दर्शन को दर्शाता था। गांधीजी का राम राज्य का सपना केवल राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्राम स्वराज की भावना पर आधारित था।
‘राम का नाम बदनाम मत करो’
सदन में बहस के दौरान शशि थरूर ने एक भावनात्मक और शायराना टिप्पणी की, जिसने पूरे सदन का ध्यान खींच लिया। उन्होंने कहा कि इस बिल का नाम सुनकर उन्हें बचपन का एक गीत याद आ गया। इसके बाद उन्होंने कहा, ‘राम का नाम बदनाम मत करो’। थरूर के इस वाक्य ने कुछ पलों के लिए सदन में सन्नाटा पैदा कर दिया। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने जोरदार तालियां बजाईं।
थरूर ने कहा कि बिल के नाम में दो भाषाओं का इस्तेमाल सिर्फ एक खास संक्षिप्त नाम बनाने के लिए किया गया है, जो संविधान के अनुच्छेद 348 की भावना के खिलाफ लगता है। उनका कहना था कि नामकरण का यह तरीका न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि यह जानबूझकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश भी है।
गांधीजी का नाम हटाने पर क्यों है विवाद
मनरेगा योजना की शुरुआत महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर की गई थी। इस योजना का मकसद ग्रामीण गरीबों को रोजगार देकर उन्हें सम्मानजनक जीवन देना था। शशि थरूर ने कहा कि गांधीजी का नाम हटाने से इस योजना की आत्मा खत्म हो जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि इससे उस विचारधारा पर चोट पहुंचती है, जिसने दशकों तक ग्रामीण भारत को सहारा दिया।
विपक्ष का कहना है कि गांधीजी का नाम इस योजना से हटाना देश के इतिहास और मूल्यों को नजरअंदाज करने जैसा है। उनका तर्क है कि सरकार को अगर योजना में सुधार करना है, तो वह सुधार करे, लेकिन गांधीजी का नाम हटाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
सरकार का नया बिल
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि नया बिल ग्रामीण रोजगार को और मजबूत करेगा। उन्होंने बताया कि VB–G RAM G Bill के तहत हर ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन का मजदूरी वाला काम मिलेगा, जबकि मनरेगा में यह सीमा 100 दिन थी। सरकार का दावा है कि यह बिल ग्रामीण रोजगार के लिए एक आधुनिक और व्यापक ढांचा तैयार करेगा।
मंत्रालय के अनुसार, यह योजना विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ी है। इसके तहत पानी की सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से जुड़े कार्य और climate change से निपटने के उपायों पर खास ध्यान दिया जाएगा।











