लोकसभा में राहुल गांधी का हमला, बोले- आम जनता की जिंदगी बनी नर्क की तरह

लोकसभा में राहुल गांधी का हमला, बोले- आम जनता की जिंदगी बनी नर्क की तरह

राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि शहरों में लालच और भ्रष्टाचार ने बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि गंदगी और पानी की समस्या को सामान्य मानना समाज के लिए गंभीर खतरा है।

New Delhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को देश में शहरी बुनियादी ढांचे की खराब स्थिति पर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश में लालच की महामारी फैल चुकी है और शहरी क्षेत्रों की सड़न अब “न्यू नॉर्मल” बन गई है।

राहुल गांधी ने एक पत्रकार द्वारा साझा किए गए वीडियो का हवाला देते हुए दिल्ली के किराड़ी इलाके में कई घरों के सामने जमा पानी और कचरे का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक मामला नहीं बल्कि पूरे देश में शहरी व्यवस्था की स्थिति का डरावना चेहरा है।

आम जनता की जिंदगी नर्क बन गई

राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा, “हर आम भारतीय की जिंदगी आज ऐसी ही नर्क की यातना बन गई है। सिस्टम सत्ता के सामने बिक चुका है। सब एक-दूसरे की पीठ थपथपाते हैं और मिलकर जनता को रौंदते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन और सत्ता के बीच घनिष्ठ रिश्तों के कारण आम लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने जोर देकर कहा कि लालच और भ्रष्टाचार ने समाज को सुन्न, निशब्द और बेपरवाह बना दिया है। उनका कहना था कि यह स्थिति गंभीर है और अगर समय पर जवाबदेही की मांग नहीं की गई तो यह सड़न हर दरवाजे तक पहुंच जाएगी।

शहरी सड़न को ‘न्यू नॉर्मल’ मानने का खतरा

राहुल गांधी ने कहा कि शहरों में खराब बुनियादी ढांचे, गंदगी और पानी की समस्या को सामान्य मान लेना समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा, “देश में लालच की महामारी फैल चुकी है, शहरी सड़न इसका सबसे डरावना चेहरा है। हमारा समाज इसलिए मर रहा है क्योंकि हमने इस सड़न को ‘न्यू नॉर्मल’ मान लिया है।”

उन्होंने लोकसभा में यह भी चेतावनी दी कि यदि नागरिक और मीडिया सक्रिय नहीं हुए और जवाबदेही की मांग नहीं की गई तो यह समस्या बढ़ती ही जाएगी। उनका मानना है कि जनता को अपनी आवाज उठानी होगी ताकि प्रशासन और सत्ता प्रभावी कार्रवाई करे।

प्रशासन और जनता के बीच दूरी

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सत्ता के लिए आम लोगों की समस्याओं का कोई महत्व नहीं है। अधिकारियों और नेताओं के बीच आपसी तालमेल और संरक्षण के कारण जनता की शिकायतें अनसुनी रह जाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि नागरिक और समाज मिलकर अपनी आवाज नहीं उठाएंगे तो यह सड़न और भ्रष्टाचार की समस्या और गंभीर होगी।

नेता प्रतिपक्ष ने जोर देकर कहा कि जवाबदेही की मांग हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर लोग चुप रहे तो भ्रष्टाचार और शहरी सड़न समाज के हर स्तर पर फैल जाएगी। उनका मानना है कि मीडिया, नागरिक और प्रशासन मिलकर ही इस समस्या का समाधान निकाल सकते हैं।

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