चूरू अस्पताल के नवजात वार्ड में लगी आग, 15 बच्चों को सुरक्षित निकालकर बचाई गई जान

चूरू अस्पताल के नवजात वार्ड में लगी आग, 15 बच्चों को सुरक्षित निकालकर बचाई गई जान
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चूरू के भरतिया अस्पताल में नवजातों के पीकू वार्ड में शार्ट सर्किट से आग लगी। 15 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई। जिला कलेक्टर ने पैनल बदलने और सेफ्टी ऑडिट के आदेश दिए।

Rajasthan: बुधवार को चूरू के भरतिया अस्पताल के नवजात वार्ड में अचानक आग लग गई। एक महिला अपने बच्चे का नेबुलाइजेशन कर रही थी और बिजली पैनल में प्लग लगाते समय शार्ट सर्किट हुआ। जोरदार धमाके के साथ आग की लपटें उठीं और धुआं फैल गया। वार्ड में मौजूद स्टाफ और तीमारदारों में अफरा-तफरी मच गई।

पीकू वार्ड में उस समय करीब 15 नवजात बच्चे एडमिट थे। बच्चों और स्टाफ की सुरक्षा के लिए तुरंत उन्हें पीडियाट्रिक वार्ड में शिफ्ट किया गया। आग पर नियंत्रण पाने के लिए स्टाफ ने 6 अग्निशमन यंत्रों का उपयोग किया। गनीमत रही कि किसी को चोट नहीं आई और आग अन्य मशीनों तक नहीं फैली।

प्रशासनिक लापरवाही उजागर

जिला कलेक्टर अभिषेक सुराणा सहित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। प्रारंभिक जांच में कई लापरवाही सामने आईं:

  • अनदेखी: वार्ड स्टाफ ने पहले ही जर्जर पैनल बदलने की लिखित शिकायत प्रशासन को दी थी, लेकिन इसे समय पर नहीं बदला गया।

  • सुरक्षा में कमी: वार्ड में आपातकालीन एग्जिट की सही व्यवस्था नहीं थी, जिससे बच्चों को बाहर निकालने में अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ी।

कलेक्टर ने आदेश दिए कि बिजली पैनल तुरंत बदला जाए और अस्पताल का पूर्ण सुरक्षा ऑडिट किया जाए। दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बचाव में तत्परता

हादसे के समय स्टाफ की त्वरित प्रतिक्रिया और आग बुझाने की कोशिश ने बड़ी दुर्घटना टाल दी। नवजातों को गोद में उठाकर बाहर निकालना और अग्निशमन यंत्रों का सही समय पर उपयोग राहत की बात रही।

स्थानीय लोग भी अस्पताल में सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और मांग कर रहे हैं कि नियमित रूप से बिजली पैनल, वार्ड उपकरण और आपातकालीन निकासी की जाँच हो।

भविष्य के लिए कदम

इस हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि सभी वार्डों में सुरक्षा उपाय तुरंत मजबूत किए जाएं। जर्जर बिजली पैनल और उपकरणों को बदलना, आपातकालीन निकासी मार्गों को सुरक्षित करना और स्टाफ को नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण देना जरूरी है। इसके अलावा, वार्डों में अग्निशमन यंत्रों की समय-समय पर जांच और रखरखाव किया जाएगा। यह कदम भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने और नवजातों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे हैं।

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