लखनऊ में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। जहरीली गैस और दम घुटने से दो युवकों की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और परिवारों में चीख-पुकार मच गई।
बताया जा रहा है कि सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए पहले एक युवक नीचे उतरा था। काफी देर तक जब उसकी ओर से कोई हलचल नहीं हुई तो दूसरा युवक उसे देखने के लिए टैंक के अंदर चला गया। लेकिन वह भी बाहर नहीं निकल सका।
कुछ देर बाद आसपास मौजूद लोगों को अनहोनी का अंदेशा हुआ। लोगों ने शोर मचाया और दोनों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। सूचना मिलने पर पुलिस और राहत टीम भी मौके पर पहुंच गई।
लखनऊ में हुए इस हादसे के बाद दोनों युवकों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सेप्टिक टैंक के अंदर जहरीली गैस भरी हुई थी। बिना सुरक्षा उपकरण और ऑक्सीजन सपोर्ट के अंदर उतरने की वजह से दोनों युवकों की जान चली गई।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लोगों ने बताया कि दोनों युवक मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि सफाई का काम इतना जानलेवा साबित होगा।
उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में सेप्टिक टैंक और सीवर की सफाई के दौरान हादसे लगातार सामने आते रहे हैं। सुरक्षा नियमों की अनदेखी और पर्याप्त उपकरणों की कमी को इसकी बड़ी वजह माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सेप्टिक टैंक और सीवर के अंदर मिथेन और अन्य जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं। बिना सुरक्षा जांच और ऑक्सीजन व्यवस्था के अंदर उतरना बेहद खतरनाक होता है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। लोगों ने कहा कि सफाई कर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं बरती जाती।
लखनऊ पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि सफाई कार्य किसके निर्देश पर कराया जा रहा था और सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए थे।
सोशल मीडिया पर भी घटना को लेकर लोगों में दुख और गुस्सा दिखाई दे रहा है। कई लोगों ने मृतकों के परिवार को मुआवजा देने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मैन्युअल सफाई की जगह मशीनों और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी है ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटे हैं, जबकि मृतकों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है