‘मां का सम’ एक अनोखे कॉन्सेप्ट वाली वेब सीरीज है, जो गणित और भावनाओं के टकराव को दिखाती है। दिलचस्प कहानी और मजबूत एक्टिंग इसे खास बनाती है, हालांकि कुछ हिस्सों में कहानी खिंची हुई लगती है। यह सीरीज रिश्तों की सादगी और भावनात्मक जुड़ाव पर फोकस करती है।
Maa Ka Sum Review: अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज यह वेब सीरीज एक मैथ जीनियस बेटे और उसकी सिंगल मदर की कहानी दिखाती है, जहां बेटा एल्गोरिदम के जरिए मां के लिए परफेक्ट पार्टनर खोजने की कोशिश करता है। इस सीरीज में मोना सिंह और मिहिर आहूजा मुख्य भूमिकाओं में हैं। कहानी का उद्देश्य यह दिखाना है कि क्या रिश्तों को गणित से समझा जा सकता है या नहीं। ईमानदार राइटिंग और दमदार एक्टिंग के बावजूद, कुछ सब-प्लॉट्स इसकी रफ्तार को प्रभावित करते हैं, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव इसे देखने लायक बनाता है।
कहानी में नया ट्विस्ट
‘मां का सम रिव्यू’ की सबसे बड़ी खासियत इसका यूनिक कॉन्सेप्ट है। कहानी अगस्त्य नाम के एक मैथ जीनियस की है, जो अपनी सिंगल मदर के लिए परफेक्ट पार्टनर ढूंढने के लिए एल्गोरिदम और डेटा का सहारा लेता है।
हालांकि, जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, इसमें पारंपरिक इमोशनल उतार-चढ़ाव नजर आने लगते हैं। सीरीज ज्यादा चौंकाने की कोशिश नहीं करती, बल्कि रिश्तों की गर्माहट और सुकून भरे पलों पर फोकस करती है, जो इसे देखने लायक बनाता है।

डायरेक्शन और राइटिंग में ईमानदारी
सीरीज की राइटिंग ईमानदार है और अगस्त्य का किरदार खासतौर पर ध्यान खींचता है। गणित को एक भावनात्मक सुरक्षा कवच की तरह दिखाना कहानी को अलग पहचान देता है।
हालांकि, आठ एपिसोड की लंबाई कुछ जगह खिंची हुई लगती है। कुछ सब-प्लॉट्स कहानी की रफ्तार को धीमा करते हैं और जरूरी असर नहीं छोड़ते। फिर भी, निर्देशन कुल मिलाकर दर्शकों को जोड़े रखने में सफल रहता है।
एक्टिंग बनी सबसे मजबूत कड़ी
मोना सिंह ने विनीता के किरदार को सहज और आत्मविश्वास के साथ निभाया है। उनका प्रदर्शन सीरीज को मजबूती देता है और किरदार को वास्तविक बनाता है।
मिहिर आहूजा ने एक जीनियस लेकिन भावनात्मक रूप से उलझे हुए युवक की भूमिका को सादगी और प्रभाव के साथ पेश किया है। सपोर्टिंग कास्ट, खासकर अंगिरा धर और रणवीर बरार, कहानी में संतुलन और गहराई जोड़ते हैं।










