मां को शब्दों में पूरी तरह से बयां करना लगभग असंभव है, क्योंकि उनके प्यार और समर्पण की गहराई शब्दों में सिमट नहीं सकती। सिनेमा ने हमेशा मां की छवि पेश करने की कोशिश की है, लेकिन ज्यादातर बड़े और छोटे पर्दे पर यह सिर्फ उनके त्याग और बलिदान तक ही सीमित रहा है।
- Movie Review: मां का सम
- कलाकार: मोना सिंह , मिहिर आहुजा , अंगिरा धर , रणवीर बरार , सेलेस्टी बैरागी और पूजा बनर्जी
- लेखक: रविंद्र रंधावा और सुमरित शाही
- निर्देशक: निकोलस खरकोंगोर
- निर्माता: रुचिर जोशी
- रिलीज डेट: 3 अप्रैल 2026
- रेटिंग: 3/5
एंटरटेनमेंट न्यूज़: मोना सिंह छोटे पर्दे से लेकर बड़े परदे तक अपने अभिनय के लिए जानी जाती हैं। उनकी नई वेब सीरीज ‘मां का सम’ हाल ही में रिलीज़ हुई है, जिसमें उन्होंने एक आधुनिक मां का किरदार निभाया है। इस सीरीज में मां-बेटे के रिश्ते को एक नए और अनोखे अंदाज में दिखाया गया है। सिनेमा और टीवी पर मां की छवि अक्सर त्याग और बलिदान तक सीमित रह जाती है।
अधिकांश कहानियों में मां के अपने सपनों और इच्छाओं को नजरअंदाज किया जाता है। ‘मां का सम’ इस सोच को बदलने की कोशिश करती है। इस सीरीज में विनीता (मोना सिंह) परफेक्ट नहीं है, लेकिन बहुत वास्तविक और relatable लगती हैं।

कहानी का सार
सीरीज की कहानी अगस्त्य (मिहिर आहुजा) और उसकी मां विनीता (मोना सिंह) के इर्द-गिर्द घूमती है। अगस्त्य एक स्मार्ट और इंटेलिजेंट कॉलेज स्टूडेंट है। अपने आगे की पढ़ाई के लिए घर से दूर जाने से पहले, वह अपनी मां की खुशियों के लिए एक परफेक्ट पार्टनर ढूंढना चाहता है। विनीता की जिंदगी में कई मुश्किलें रही हैं। उसका पति अचानक गायब हो गया था और उन्होंने अकेले ही अगस्त्य को बड़ा किया। अब विनीता रियल एस्टेट एजेंट के रूप में काम कर रही हैं। अगस्त्य अपनी मैथ्स की स्किल्स का इस्तेमाल करते हुए डेटिंग एप्स के जरिए मां के लिए सही पार्टनर खोजने की कोशिश करता है।
सीरीज में अगस्त्य की अपनी लव लाइफ भी दिखाई जाती है। पहले वह एनी (सेलेस्टी बैरागी) के साथ रिलेशन में है, लेकिन बाद में उनका रिश्ता दोस्ती में बदल जाता है। कहानी में अंगिरा धर और रणवीर बरार के किरदारों की एंट्री विनीता और अगस्त्य की जिंदगी में नए मोड़ लाती है। मुख्य सवाल यह है: क्या अगस्त्य अपनी मां के लिए सही पार्टनर ढूंढ पाता है? क्या विनीता अपने जीवन में नई शुरुआत कर पाती हैं?
अभिनय की बारीकी
मोना सिंह ने विनीता के किरदार में आधुनिक मां की परिपूर्ण छवि पेश की है। उनका पहनावा, सोच और बेटे के साथ दोस्ताना रिश्ता दर्शकों को आकर्षित करता है। मोना सिंह ने मां की परेशानियों और उसकी खुशियों दोनों को सहज तरीके से पर्दे पर उतारा है। मिहिर आहुजा ने अगस्त्य के किरदार में संतुलित प्रदर्शन किया है। मां के लिए चिंता करने वाले बेटे के रोल में उनका अभिनय स्वाभाविक और भरोसेमंद लगता है। वे अपने पिता के अचानक चले जाने के बचपन के ट्रॉमा को अच्छे ढंग से दिखाते हैं।
अंगिरा धर और रणवीर बरार ने भी अपने किरदारों में जान डाल दी है। विशेष रूप से रणवीर बरार, जो शेफ से अभिनेता बने हैं, कुछ सीन में दर्शकों का दिल जीत लेते हैं।
निर्देशन और प्रस्तुति

इस सीरीज के निर्देशक निकोलस खरकोंगोर ने 21वीं सदी की शहरी मां की छवि पेश करने की पूरी कोशिश की है। विनीता संघर्ष करती हैं लेकिन अपने सपनों को नजरअंदाज नहीं करतीं। 19 साल का बेटा होने के बावजूद, वह अपनी लव लाइफ को भी एक नई शुरुआत देने से पीछे नहीं हटती। हालांकि, कुछ दर्शकों को मां के इस बदलाव और लव स्टोरी का अंदाज अजीब लग सकता है, लेकिन यह किसी भी महिला के जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हो सकता है।
सीरीज में मां का नया रूप, प्यार की नई सोच और मैथ्स के प्रयोग जैसे कई पहलुओं को शामिल करने की कोशिश की गई है। लेकिन कहानी में कई जगह यह बिखरी हुई लगती है। मोना सिंह और रणवीर बरार का लव एंगल अच्छा है, लेकिन अगस्त्य और अंगिरा की लव स्टोरी को दर्शाने की जरूरत शायद नहीं थी।चार एपिसोड के बाद सीरीज कहीं न कहीं खिंची हुई महसूस होती है।
अंत भी दर्शकों के लिए अनुमानित होता है और कोई चौंकाने वाला मोड़ नहीं देता। यहां तक कि कलाकारों का बेहतरीन अभिनय भी कमजोर कथानक को पूरी तरह संभाल नहीं पाता। संगीत की भूमिका भी सीमित रहती है और कहानी में कोई एक्स-फैक्टर नहीं जोड़ पाता।
देखें या ना देखें?
अगर आप एक्शन, थ्रिलर या हाई-एंटरटेनमेंट सीरीज की तलाश में हैं, तो ‘मां का सम’ आपके लिए नहीं है। लेकिन अगर आप साधारण, भावनात्मक और रिश्तों पर केंद्रित कहानी देखना चाहते हैं, और मोना सिंह के अभिनय के फैन हैं, तो यह सीरीज आपके लिए देखी जा सकती है।









