MP Politics: दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म, कोर्ट के फैसले से मचा सियासी हड़कंप

MP Politics में बड़ा घटनाक्रम, दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म। कोर्ट ने 3 साल की सजा सुनाई, अब उपचुनाव और हाईकोर्ट राहत पर टिकी नजर।

मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता कोर्ट द्वारा तीन साल की सजा के बाद समाप्त कर दी गई है। अब इस सीट पर उपचुनाव की संभावना बढ़ गई है और मामला राजनीतिक चर्चा में है।

Bhopal: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां दतिया विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त कर दी गई है। विधानसभा सचिवालय ने उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

कोर्ट के फैसले के बाद हुई कार्रवाई

यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब दिल्ली की MP-MLA कोर्ट ने राजेंद्र भारती को बैंक धोखाधड़ी और दस्तावेजों में हेरफेर के मामले में दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले के बाद जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त होने की प्रक्रिया शुरू हो गई।

विधानसभा सचिवालय ने अदालत के आदेश के आधार पर उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया, जिससे अब दतिया सीट पर उपचुनाव की संभावना बढ़ गई है।

जनप्रतिनिधित्व कानून का असर

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसी विधायक को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। इसी नियम के तहत राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म की गई है।

हालांकि अदालत ने उन्हें अपील के लिए 60 दिन का समय दिया है, लेकिन केवल अपील करना सदस्यता को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए दोषसिद्धि पर उच्च न्यायालय से स्टे (stay) लेना जरूरी होता है।

हाईकोर्ट से राहत पर टिकी नजर

अब इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका हाईकोर्ट की होगी। यदि राजेंद्र भारती को अपनी सजा पर हाईकोर्ट से स्थगन मिल जाता है, तो उनकी सदस्यता बहाल हो सकती है।

लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो उनकी सदस्यता का वापस मिलना मुश्किल होगा और दतिया सीट पर स्थायी रूप से खालीपन बना रहेगा, जिसके लिए चुनाव आयोग को उपचुनाव कराना पड़ सकता है।

क्या है पूरा मामला

यह मामला भूमि विकास बैंक से जुड़ी एक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से संबंधित है। आरोप है कि विधायक रहते हुए राजेंद्र भारती ने अपनी मां सावित्री श्याम के नाम पर कराई गई 10.50 लाख रुपये की FD की अवधि में गड़बड़ी की। बताया गया कि इस FD की अवधि तीन साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी गई थी, जो नियमों के खिलाफ था। इस मामले में दस्तावेजों में हेरफेर के आरोप भी लगे।

इस पूरे मामले की शिकायत बैंक कर्मचारी नरेंद्र सिंह ने की थी। शिकायत के बाद जांच शुरू हुई और जांच में कई अनियमितताएं सामने आईं। जांच के दौरान यह पाया गया कि दस्तावेजों में बदलाव किया गया था, जिसके आधार पर अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कार्रवाई की।

अदालत का फैसला

अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद राजेंद्र भारती को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत दोषी ठहराया और तीन साल की सजा सुनाई। यह सजा ही उनकी सदस्यता समाप्त होने का मुख्य कारण बनी, क्योंकि कानून के अनुसार दो साल से अधिक की सजा मिलने पर जनप्रतिनिधि पद पर बने रहना संभव नहीं होता।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बदला ट्रायल

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि पहले यह केस ग्वालियर की MP-MLA कोर्ट में चल रहा था। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इसे दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया। दिल्ली की अदालत ने ही हाल ही में इस मामले में अंतिम फैसला सुनाया, जिसके बाद राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल गया।

2023 चुनाव में बड़ी जीत

राजेंद्र भारती ने 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया सीट से जीत दर्ज की थी। उन्होंने उस चुनाव में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराया था, जो अपने आप में एक बड़ी राजनीतिक जीत मानी गई थी। इस जीत के बाद वे क्षेत्र में एक मजबूत नेता के रूप में उभरे थे, लेकिन अब सजा और सदस्यता समाप्त होने के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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