उत्तराखंड में द्वितीय केदार भगवान मध्यमेश्वर धाम के कपाट गुरुवार सुबह श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच आयोजित इस धार्मिक आयोजन से यात्रा मार्ग के पड़ावों पर फिर से चहल-पहल बढ़ गई है।
ऊखीमठ: उत्तराखंड के प्रसिद्ध द्वितीय केदार भगवान मध्यमेश्वर धाम के कपाट गुरुवार सुबह विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए। भगवान मध्यमेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली पारंपरिक लोकवाद्यों, जयकारों और महिलाओं के मंगल गीतों के बीच विभिन्न पड़ावों से होते हुए धाम पहुंची। कपाट खुलने के साथ ही मध्यमेश्वर घाटी में तीर्थ यात्रियों की आवाजाही बढ़ने लगी है।
पारंपरिक विधि-विधान के साथ खुले कपाट
भगवान मध्यमेश्वर धाम के कपाट गुरुवार सुबह तय शुभ मुहूर्त में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। इस दौरान मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पावन अवसर के साक्षी बने।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान मध्यमेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली बुधवार को गौंडार गांव पहुंची थी, जहां रात्रि प्रवास किया गया। गुरुवार सुबह डोली विभिन्न यात्रा पड़ावों से होते हुए मंदिर पहुंची।
यात्रा मार्ग पर लौटने लगी रौनक
डोली यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। रास्तेभर जयकारों, लोकवाद्यों और महिलाओं के मंगल गीतों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में नजर आया। बनातोली, खटारा, नानौ, मैखम्भा और कूनचट्टी जैसे पड़ावों से होकर यात्रा धाम तक पहुंची।
कपाट खुलने के साथ ही मध्यमेश्वर घाटी के यात्रा पड़ावों पर फिर से रौनक लौटने लगी है। स्थानीय कारोबारियों और यात्रा मार्ग से जुड़े लोगों को भी तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
धाम के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान मध्यमेश्वर के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर जरूरी इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
चारधाम और पंचकेदार यात्रा के बीच मध्यमेश्वर धाम के कपाट खुलने को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है।









