Hockey Coach Baldev Singh: भारतीय हॉकी के ‘गुरु’ बलदेव सिंह को मिलेगा पद्मश्री सम्मान

भारतीय हॉकी के दिग्गज कोच Baldev Singh को पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। खेल जगत में उनके योगदान को देखते हुए यह सम्मान दिया जा रहा है। जानें उनके करियर

भारतीय हॉकी के दिग्गज खिलाड़ी Baldev Singh को उनके लंबे और उल्लेखनीय योगदान के लिए देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान Padma Shri से सम्मानित किया जाएगा।

स्पोर्ट्स न्यूज़: भारतीय हॉकी के विकास और नई प्रतिभाओं को तराशने में चार दशकों से अधिक समय तक महत्वपूर्ण योगदान देने वाले अनुभवी कोच Baldev Singh को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu आगामी 25 मई को उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी।

भारतीय खेल जगत में बलदेव सिंह को हॉकी प्रतिभाओं के निर्माता और मार्गदर्शक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने हरियाणा के छोटे से शहर शाहाबाद मारकंडा को देश की प्रमुख हॉकी नर्सरी में बदलने में अहम भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।

शाहाबाद मारकंडा को बनाया हॉकी प्रतिभाओं का केंद्र

75 वर्षीय बलदेव सिंह ने वर्ष 1982 में हरियाणा खेल विभाग में हॉकी कोच के रूप में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। उसी दौरान उन्हें शाहाबाद मारकंडा में नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देना शुरू किया। सीमित संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं के बावजूद उन्होंने वहां ऐसी खेल संस्कृति विकसित की जिसने आने वाले वर्षों में भारतीय हॉकी को कई सितारे दिए।

चार वर्षों तक सेवा देने के बाद वह कुछ समय के लिए अलग हुए, लेकिन वर्ष 1993 में दोबारा शाहाबाद लौटे। इसके बाद उन्होंने वहां की हॉकी अकादमी को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाओं का प्रमुख केंद्र बना दिया। आज शाहाबाद मारकंडा को भारतीय महिला और पुरुष हॉकी खिलाड़ियों की मजबूत नर्सरी माना जाता है।

80 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को दिया प्रशिक्षण

बलदेव सिंह का कोचिंग करियर भारतीय हॉकी इतिहास में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। उन्होंने अपने लंबे करियर में 80 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया। उनके मार्गदर्शन में तैयार हुए कई खिलाड़ी भारतीय टीम के कप्तान भी बने। उन्होंने अपने खेल जीवन की शुरुआत नमधारी हॉकी टीम, भैणी साहिब से की थी। बाद में उन्होंने बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय खेल संस्थान (NIS) से हॉकी कोचिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया और पेशेवर कोचिंग करियर की शुरुआत की।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि बलदेव सिंह की सबसे बड़ी विशेषता खिलाड़ियों की तकनीकी क्षमता के साथ-साथ मानसिक मजबूती विकसित करना रही है। उन्होंने ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाले खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार किया।

भारतीय हॉकी टीम के साथ अहम भूमिका

Baldev Singh ने भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम के मुख्य कोच और चयनकर्ता के रूप में भी काम किया। वर्ष 1996 में मद्रास (अब चेन्नई) में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम के सहायक कोच के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में उन्हें भारतीय सीनियर पुरुष हॉकी टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया। वर्ष 2001 से 2004 तक उन्होंने राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व किया और इस दौरान टीम के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

उनके नेतृत्व में भारत ने 2004 एशिया कप में स्वर्ण पदक जीता, जिसे भारतीय हॉकी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। इसके अलावा उन्होंने नीदरलैंड्स के एम्सटेलवीन में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी में भी भारतीय टीम का मार्गदर्शन किया।

शिक्षा और खेल संस्थानों में भी योगदान

राष्ट्रीय टीम के अलावा बलदेव सिंह ने कई शैक्षणिक और खेल संस्थानों में भी अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी और खालसा कॉलेज जैसे संस्थानों में हॉकी कोच के रूप में कार्य किया। उनका योगदान केवल मैदान तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने खिलाड़ियों के लिए अनुशासन, फिटनेस और दीर्घकालिक खेल विकास की संस्कृति विकसित करने पर भी जोर दिया।

केंद्र सरकार द्वारा गठित ओलंपिक टास्क फोर्स में भी बलदेव Singh को शामिल किया गया था। इस समिति का उद्देश्य भारत की ओलंपिक तैयारियों को मजबूत बनाना था। उन्होंने 2020 टोक्यो, 2024 पेरिस और 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए रणनीतिक रोडमैप तैयार करने में योगदान दिया। खेल प्रशासन और कोचिंग दोनों क्षेत्रों में उनके अनुभव को भारतीय खेल विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

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