Maharashtra Politics: बिहार जनादेश के बाद भाजपा को महाराष्ट्र से बड़ा झटका, छह नेताओं ने छोड़ी पार्टी

बिहार चुनाव के नतीजों के बाद महाराष्ट्र में BJP को बड़ा झटका लगा। छह वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़ दी। जानिए इस कदम से राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा

महाराष्ट्र में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा है। उल्हासनगर से पार्टी के छह पूर्व नगरसेवकों ने शुक्रवार को भाजपा का दामन छोड़कर शिंदे गुट की शिवसेना और टीम ओमी कालानी (टीओके) में शामिल हो गए। 

मुंबई: महाराष्ट्र में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा है। उल्हासनगर से भाजपा के छह पूर्व नगरसेवकों ने शुक्रवार को पार्टी छोड़कर शिंदे गुट के शिवसेना और उसकी स्थानीय सहयोगी टीम ओमी कालानी (टीओके) का दामन थाम लिया। इनमें से तीन नेता शहर में भाजपा के सबसे मजबूत चेहरों में गिने जाते थे। 

जबकि बिहार में भाजपा समर्थित एनडीए गठबंधन ने प्रचंड बहुमत हासिल कर सत्ता में अपनी स्थिति मजबूत की है, वहीं महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले छह नेताओं का पार्टी छोड़ना भाजपा के लिए चिंता का विषय बन गया है।

बिहार के जनादेश के बाद महाराष्ट्र में भाजपा को झटका

हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा समर्थित एनडीए गठबंधन ने प्रचंड बहुमत हासिल किया और सत्ता में अपना स्थान मजबूत किया। वहीं दूसरी ओर, महाराष्ट्र निकाय चुनावों से पहले छह नेताओं का भाजपा छोड़ना पार्टी के लिए बुरी खबर बन गया है। उल्हासनगर और कल्याण लोकसभा क्षेत्र में होने वाले आगामी चुनावों से पहले यह टूट भाजपा की साख पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। 

इसके साथ ही, दो महीने पहले भाजपा में शामिल हुए पांच पूर्व नगरसेवकों की मदद से कमजोर हुई कालानी परिवार की पकड़ को यह घटना फिर से मजबूत कर सकती है।

कौन-कौन हुए शामिल 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल हुए नेता हैं:

  • किशोर वनवारी
  • मीना सोनडे
  • टीओके में शामिल हुए नेता हैं:
  • जम्नु पुरसवानी (पांच बार के नगरसेवक और पूर्व उपमहापौर)
  • प्रकाश माखीजा (चार बार स्थायी समिति अध्यक्ष)
  • महेश सुखरामानी (महाराष्ट्र साहित्य अकादमी में राज्य मंत्री रहे)
  • चार्ली परवानी

इन नेताओं का स्वागत सांसद श्रीकांत शिंदे और टीओके प्रमुख ओमी कालानी ने किया। प्रकाश माखीजा ने भाजपा छोड़ने के फैसले का कारण स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भाजपा और शिवसेना के वरिष्ठ नेता एक-दूसरे के खिलाफ काम कर रहे थे, इसलिए उन्होंने टीओके में जाने का निर्णय लिया। सूत्रों का मानना है कि यदि पार्टी के शीर्ष नेता समय रहते हस्तक्षेप नहीं करते, तो यह खींचतान अन्य क्षेत्रों में भी फैल सकती है।

महाराष्ट्र में निकाय चुनाव से पहले भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। उल्हासनगर और कल्याण लोकसभा क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच खींचतान तब और तेज हुई, जब इस साल रविंद्र चव्हाण राज्य भाजपा अध्यक्ष बने।

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