माही नदी नाव हादसा: 48 घंटे बाद दो शव बरामद, SDRF ने वाइब्रेशन तकनीक से चलाया सर्च ऑपरेशन

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की माही नदी हादसे में 48 घंटे बाद 2 शव मिले। SDRF ने वाइब्रेशन तकनीक से जयेश और मानव के शव बरामद किए। नाव पलटने से 11 लोग सवार थे।

राजस्थान की माही नदी में नाव पलटने के 48 घंटे बाद 21 वर्षीय जयेश और 8 वर्षीय मानव के शव बरामद हुए। SDRF ने पानी में वाइब्रेशन तकनीक और जाल का इस्तेमाल कर दोनों शवों को 100 मीटर दायरे से निकाला।

बांसवाड़ा: राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में माही नदी में हुए नाव हादसे के 48 घंटे बाद दो शव बरामद किए गए हैं। मृतकों की पहचान 21 वर्षीय जयेश और 8 वर्षीय मानव के रूप में हुई है। दोनों के शव गुरुवार को लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद नदी से निकाले गए। हादसे के बाद से लगातार एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें सर्च ऑपरेशन में जुटी हुई थीं।

यह हादसा मंगलवार को उस समय हुआ था जब नाव अचानक अनियंत्रित होकर नदी में पलट गई थी। नाव में कुल 11 लोग सवार थे, जिनमें से 9 लोग किसी तरह तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए थे, लेकिन जयेश और मानव लापता हो गए थे।

कैसे हुआ हादसा: माही नदी में पलटी नाव

यह घटना अरथूना थाना क्षेत्र के पांचवाड़ा पंचायत के भैंसाउ गांव के पास माही नदी में हुई। मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे नाव नदी के बीच में पहुंचते ही असंतुलित होकर पलट गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नाव में सवार लोग अचानक हुए हादसे से घबरा गए, लेकिन कुछ लोगों ने तैरकर अपनी जान बचा ली। नाव पर सवार जयेश और 8 वर्षीय मानव पानी के तेज बहाव में बह गए और लापता हो गए।

जयेश (21) भानो का पाड़ा का रहने वाला था, जबकि मानव मोटागांव थाना क्षेत्र के चंदूजी का गढ़ा का निवासी था। मानव अपने मामा के घर आया हुआ था और संगमेश्वर महादेव मंदिर दर्शन के लिए गया था।

48 घंटे चला लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसे के तुरंत बाद एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंच गई थी। स्थानीय ग्रामीणों और मछुआरों की मदद से मंगलवार से ही तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया था।

बुधवार को पूरे दिन सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन दोनों शव नहीं मिल सके। नदी के तेज बहाव और गहराई के कारण राहत टीमों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

गुरुवार सुबह एक बार फिर बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। इस दौरान टीम ने आधुनिक तकनीक के साथ-साथ स्थानीय संसाधनों का भी उपयोग किया।

SDRF की अनोखी रणनीति: पानी में वाइब्रेशन से मिली सफलता

गुरुवार को एसडीआरएफ टीम ने एक विशेष तकनीक अपनाई, जिसे स्थानीय स्तर पर “वाइब्रेशन सर्च मेथड” कहा गया। इस प्रक्रिया में नाव की मोटर का उपयोग करके नदी के पानी में कंपन (vibration) उत्पन्न किया गया।

इसके साथ ही पानी में बड़े जाल (net) भी डाले गए, ताकि यदि शव तल में फंसे हों तो ऊपर आ सकें।

इस तकनीक के परिणामस्वरूप कुछ ही समय में जयेश का शव जाल में फंस गया और उसे बाहर निकाला गया। शव घटनास्थल से लगभग 100 मीटर के दायरे में मिला।

इसके बाद दोबारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया और कुछ ही देर में मानव का शव भी पानी की सतह पर दिखाई दिया। उसका शव भी उसी क्षेत्र के करीब मिला, जहां जयेश का शव बरामद हुआ था।

नाव भी मिली घटनास्थल के पास

सर्च ऑपरेशन के दौरान टीम को वही नाव भी मिल गई, जिससे यह हादसा हुआ था। यह नाव घटनास्थल से लगभग 100 मीटर की दूरी पर मिली। जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि नाव पलटने का मुख्य कारण क्या था—अधिक भार, तकनीकी खराबी या नदी की तेज धारा।

मृतकों की पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि

जयेश (21 वर्ष) भानो का पाड़ा गांव का निवासी था। वह युवा था और परिवार की जिम्मेदारियों में मदद करता था। हादसे की खबर से परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है।

वहीं 8 वर्षीय मानव एक मासूम बच्चा था, जो अपने रिश्तेदारों के साथ मंदिर दर्शन के लिए गया था। परिवार को उसकी अचानक मौत की खबर ने गहरा सदमा दिया है।

दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए परतापुर अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया है।

प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई

अरथूना थानाधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि हादसे के बाद से ही पुलिस और एसडीआरएफ लगातार रेस्क्यू में जुटी हुई थी। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की मदद से सर्च ऑपरेशन को गति मिली, लेकिन नदी की परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण थीं।

प्रशासन अब इस मामले की विस्तृत जांच कर रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि नाव में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

माही नदी हादसा: सुरक्षा पर उठे सवाल

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर नदी परिवहन और स्थानीय नाव संचालन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे नाव संचालन में लाइफ जैकेट और सुरक्षा उपकरणों की अनिवार्यता होनी चाहिए।

ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर नावों का उपयोग आवागमन के लिए किया जाता है, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी कई बार जानलेवा साबित होती है।

स्थानीय लोगों में शोक और आक्रोश

हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि माही नदी में नाव संचालन के लिए सख्त नियम बनाए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा उपाय मजबूत होते तो शायद यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था।

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