मणिपुर में नामदिलोंग प्रदर्शन पर विवाद, लियांगमई नागा परिषद ने लगाया बल प्रयोग का आरोप

मणिपुर के नामदिलोंग जिले में प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग को लेकर लियांगमई नागा काउंसिल ने जांच और हिरासत में लिए ग्रामीणों की रिहाई की मांग की है।

मणिपुर के नामदिलोंग में प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग को लेकर लियांगमई नागा काउंसिल ने सुरक्षा बलों पर आरोप लगाए हैं। परिषद के अनुसार चार नागरिक घायल हुए। संगठन ने हिरासत में लिए लोगों की रिहाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

इम्फाल: मणिपुर में विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों पर कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने का मामला सामने आया है। लियांगमई नागा काउंसिल मणिपुर (LNC-M) ने नामदिलोंग में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आंसू गैस और बल प्रयोग का आरोप लगाते हुए घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिषद का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई में चार नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए। लियांगमई नागा काउंसिल मणिपुर के अनुसार, गुरुवार दोपहर नामदिलोंग में बड़ी संख्या में लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन में पहाड़ी क्षेत्रों और स्थानीय आदिवासी समुदायों से जुड़े लोग शामिल थे। प्रदर्शनकारी कथित तौर पर छह नागा पुरुषों और लांगा के दो ग्रामीणों की हत्या के विरोध में अपनी आवाज उठा रहे थे।

परिषद का दावा है कि इसी दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और अन्य सुरक्षा बलों के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और अन्य बल का इस्तेमाल किया। संगठन ने इस कार्रवाई को अनुचित और चिंताजनक बताया है। हालांकि, सुरक्षा बलों की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर स्वतंत्र पुष्टि या विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।

चार नागरिकों के घायल होने का दावा

LNC-M ने कहा कि कथित कार्रवाई के दौरान चार नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए। परिषद ने घायलों की पहचान 36 वर्षीय विखोनलिउ, 33 वर्षीय विलोबौ, चुनविबौ और 44 वर्षीय मासेनवांगबौ के रूप में की है। संगठन के मुताबिक, घायलों को चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है और उनकी स्थिति को लेकर प्रशासन को तत्काल कदम उठाने चाहिए।

परिषद ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की घटना ने स्थानीय लोगों के बीच सरकार और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से मौजूद अविश्वास को और बढ़ाया है। संगठन ने सरकार से घायलों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की अपील की है।

छह नागा पुरुषों की कथित हत्या के विरोध में प्रदर्शन

LNC-M के अनुसार, नामदिलोंग में प्रदर्शन का संबंध छह नागा पुरुषों और लांगा के दो ग्रामीणों की कथित हत्या से था। परिषद इन घटनाओं को लेकर जवाबदेही और न्याय की मांग कर रही है। संगठन का कहना है कि प्रभावित समुदायों को अपनी मांग लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है।

मणिपुर लंबे समय से जातीय तनाव और हिंसा से प्रभावित रहा है। ऐसे माहौल में किसी भी प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों और नागरिकों के बीच टकराव की घटना संवेदनशील मानी जाती है। इसलिए स्थानीय संगठनों की ओर से घटना की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर प्रशासन पर पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है।

हिरासत में लिए गए लोगों की तत्काल रिहाई की मांग

लियांगमई नागा काउंसिल ने प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी ग्रामीणों को तत्काल रिहा करने की मांग की है। परिषद का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

संगठन ने पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सुरक्षा बलों ने किन परिस्थितियों में बल का इस्तेमाल किया। परिषद के मुताबिक, यदि जांच में किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

BNS की धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग

LNC-M ने जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। परिषद ने विशेष रूप से BNS की धारा 115, 117 और 125 का उल्लेख किया है और कहा है कि जहां ये धाराएं लागू होती हैं, वहां इनके तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

हालांकि, किसी घटना में किसी विशेष कानूनी धारा का अंतिम रूप से लागू होना जांच और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है। इसलिए परिषद की मांग को फिलहाल संगठन के आरोप और मांग के रूप में देखा जाना चाहिए।

परिषद ने सरकार पर भरोसा बहाल करने की अपील की

LNC-M ने कहा कि कथित बल प्रयोग की घटना ने सरकार के प्रति लोगों के भरोसे को नुकसान पहुंचाया है। संगठन का कहना है कि प्रशासन को मामले में पारदर्शी जांच करनी चाहिए और घायलों को उचित चिकित्सा सहायता तथा प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहयोग देना चाहिए।

परिषद ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को बलपूर्वक दबाने के बजाय बातचीत और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से लोगों की शिकायतों का समाधान किया जाना चाहिए। संगठन के मुताबिक, ऐसा कदम ही समुदायों के बीच भरोसा बहाल करने में मदद कर सकता है।

यूनाइटेड नागा काउंसिल की मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने का ऐलान

लियांगमई नागा काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि वह यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) के चार्टर में शामिल मांगों के समाधान तक अपना लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रखेगी। परिषद ने कहा कि उसकी प्राथमिकता शांतिपूर्ण तरीके से समुदाय की मांगों को सरकार तक पहुंचाना है।

आंदोलन जारी रखने की घोषणा के बीच प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती भी रहेगी। स्थानीय संगठनों और प्रशासन के बीच संवाद इस तरह की घटनाओं के बाद तनाव कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

घटना की निष्पक्ष जांच पर टिकी नजर

नामदिलोंग की घटना को लेकर फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या हुआ और सुरक्षा बलों ने किन परिस्थितियों में कार्रवाई की। परिषद ने गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन इन दावों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच और आधिकारिक तथ्यों का सामने आना जरूरी है।

घटना में घायल बताए गए लोगों को चिकित्सा सहायता, हिरासत में लिए गए ग्रामीणों की स्थिति और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की परिस्थितियों को लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत जानकारी आने का इंतजार है। निष्पक्ष जांच से ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

मणिपुर में पहले से संवेदनशील सामाजिक और सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए नामदिलोंग की घटना का असर व्यापक हो सकता है। ऐसे में प्रशासन और समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच संवाद, कानून के अनुसार कार्रवाई और पारदर्शी जांच से स्थिति को और बिगड़ने से रोकने में मदद मिल सकती है।

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