मेरठ में यूट्यूबर शादाब जकाती पर FIR दर्ज। ज्वेलरी शोरूम उद्घाटन पर बिना अनुमति 2 हजार की भीड़ जुटाने का आरोप।
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नॉएडा-उत्तर प्रदेश के मेरठ में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और यूट्यूबर शादाब जकाती से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने प्रशासन और स्थानीय लोगों दोनों को असहज स्थिति में डाल दिया। मामला एक ज्वेलरी शोरूम के उद्घाटन कार्यक्रम से जुड़ा है, जहां बिना अनुमति हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई और देखते ही देखते पूरा इलाका जाम और अव्यवस्था की चपेट में आ गया।
बताया जा रहा है कि शादाब जकाती के शोरूम ओपनिंग की जानकारी सोशल मीडिया पर पहले से ही वायरल हो गई थी। उनके फॉलोअर्स और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने लगे। धीरे-धीरे यह संख्या इतनी बढ़ गई कि मौके पर करीब 2 हजार से अधिक लोगों की भीड़ जमा हो गई। सड़कें पूरी तरह से जाम हो गईं और आसपास के बाजारों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ इतनी ज्यादा थी कि लोगों का एक-दूसरे पर चढ़ जाना जैसी स्थिति बन गई थी। कई लोग सिर्फ यूट्यूबर को देखने के लिए आए थे, जबकि कुछ लोग उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने के उद्देश्य से पहुंचे थे। भीड़ के कारण दुकानों के सामने रास्ता बंद हो गया और स्थानीय व्यापारियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।
स्थिति को बिगड़ता देख स्थानीय पुलिस को मौके पर बुलाया गया। पुलिस टीम ने पहुंचकर बैरिकेडिंग की और भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की। हालांकि, शुरुआत में भीड़ इतनी ज्यादा थी कि पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई जगहों पर हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा, ताकि लोगों को हटाया जा सके और रास्ता खाली कराया जा सके।
प्रशासन का कहना है कि इस तरह के बड़े सार्वजनिक आयोजन के लिए पहले से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। आयोजकों को यह जानकारी होती है कि अगर भीड़ जुटने की संभावना है, तो सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए प्रशासन को पहले से सूचित करना जरूरी है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया, जिसके चलते कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हुई।
इसी आधार पर पुलिस ने शादाब जकाती समेत आयोजन से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आयोजन की योजना किसने बनाई, किस स्तर पर लापरवाही हुई और क्या जानबूझकर भीड़ जुटाई गई थी।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो फुटेज की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भीड़ जुटाने के लिए किस तरह का प्रचार किया गया था। साथ ही, कार्यक्रम में मौजूद अन्य आयोजकों और स्टाफ से भी पूछताछ की जा रही है।
इस घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों और निवासियों में नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि बिना योजना और अनुमति के इस तरह के आयोजन से आम लोगों को भारी परेशानी होती है। कई लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसे मामलों पर सख्ती से कार्रवाई की जाए।
ट्रैफिक विभाग ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों का कहना है कि अचानक इतनी बड़ी भीड़ जुटने से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। कई घंटों तक वाहन जाम में फंसे रहे, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बिना अनुमति भीड़ जुटाना, सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करना और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में आयोजकों पर सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स की लोकप्रियता किस तरह से वास्तविक दुनिया में भीड़ नियंत्रण की चुनौती बन सकती है। प्रशासन के सामने अब यह बड़ी चुनौती है कि वह इस तरह के आयोजनों को कैसे नियंत्रित करे और कानून-व्यवस्था बनाए रखे।
फिलहाल, मेरठ पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और यह स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।