हेल्थ और फिटनेस इंडस्ट्री में इन दिनों “मशरूम सप्लीमेंट्स” तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। सोशल मीडिया, जिम और वेलनेस कम्युनिटी में इन्हें इम्यूनिटी बढ़ाने, दिमाग तेज करने और एनर्जी बढ़ाने वाला सुपरफूड बताया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये दावे सच में वैज्ञानिक रूप से सही हैं या यह सिर्फ एक ट्रेंड बनकर रह जाएगा?
मशरूम सप्लीमेंट क्या होते हैं?
मशरूम सप्लीमेंट्स ऐसे न्यूट्रिशनल प्रोडक्ट्स हैं, जिन्हें औषधीय गुणों वाले मशरूम से तैयार किया जाता है। ये आमतौर पर पाउडर, कैप्सूल, लिक्विड एक्सट्रैक्ट या हेल्थ ड्रिंक्स के रूप में उपलब्ध होते हैं।
इनमें अलग-अलग प्रकार के मशरूम का उपयोग किया जाता है, जैसे रीशी (इम्यूनिटी और तनाव के लिए), लायन्स मेन (ब्रेन हेल्थ), कॉर्डिसेप्स (एनर्जी और स्टैमिना) और शिटाके (हार्ट हेल्थ)। इन मशरूम्स में पाए जाने वाले एक्टिव कंपाउंड्स को केंद्रित करके सप्लीमेंट तैयार किए जाते हैं।
खाने वाले मशरूम से कैसे अलग हैं?
खाने वाले मशरूम और सप्लीमेंट्स दोनों एक ही स्रोत से आते हैं, लेकिन इनके उपयोग और प्रभाव में फर्क होता है।
जहां सामान्य मशरूम रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा होते हैं और पोषण देते हैं, वहीं सप्लीमेंट्स को खास हेल्थ गोल्स जैसे इम्यूनिटी, मेमोरी या एनर्जी बढ़ाने के लिए बनाया जाता है।
सप्लीमेंट्स में मशरूम को प्रोसेस करके उसमें मौजूद खास तत्वों, जैसे बीटा-ग्लूकन्स, को अधिक मात्रा में रखा जाता है, जिससे इनका असर ज्यादा केंद्रित माना जाता है।
मशरूम सप्लीमेंट्स क्यों हो रहे हैं पॉपुलर?
पिछले कुछ वर्षों में हेल्थ के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ लोग नेचुरल और प्लांट-बेस्ड विकल्पों की ओर तेजी से बढ़े हैं। कोविड-19 के बाद इम्यूनिटी को लेकर लोगों का फोकस काफी बढ़ा है, जिससे ऐसे सप्लीमेंट्स की मांग भी बढ़ी है।
इसके अलावा, मशरूम को “एडाप्टोजेन” माना जाता है, यानी यह शरीर को तनाव और बदलती परिस्थितियों के अनुसार ढलने में मदद कर सकता है। यही कारण है कि इसे वेलनेस इंडस्ट्री में “सुपरफूड” के रूप में प्रमोट किया जा रहा है।

क्या साइंस इन फायदों को सपोर्ट करती है?
कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, मशरूम में पाए जाने वाले बीटा-ग्लूकन्स इम्यून सिस्टम को सक्रिय कर सकते हैं। लैब और एनिमल स्टडीज में इसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिले हैं।
इंसानों पर किए गए सीमित क्लिनिकल ट्रायल्स में यह पाया गया है कि कुछ मशरूम इम्यून रिस्पॉन्स को बेहतर बना सकते हैं और सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं।
ब्रेन हेल्थ के मामले में, खासकर लायन्स मेन मशरूम में पाए जाने वाले कंपाउंड्स नर्व ग्रोथ को बढ़ावा देने से जुड़े पाए गए हैं। कुछ स्टडीज में हल्का कॉग्निटिव सुधार भी देखा गया है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अभी इन दावों को पूरी तरह “क्लिनिकली प्रूवेन” नहीं कहा जा सकता, क्योंकि स्टडीज का सैंपल साइज छोटा है और लॉन्ग-टर्म प्रभाव स्पष्ट नहीं हैं।
क्या इसके साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं?
हालांकि मशरूम सप्लीमेंट्स को नेचुरल माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ये पूरी तरह सुरक्षित हैं। कुछ लोगों में इससे एलर्जी, पेट से जुड़ी समस्याएं या ब्लड शुगर में बदलाव जैसी समस्याएं देखी गई हैं।
इसके अलावा, ये कुछ दवाओं के साथ रिएक्ट भी कर सकते हैं, खासकर ब्लड थिनर, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और इम्यून सिस्टम से जुड़ी दवाओं के साथ। इसलिए इन्हें लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
क्या ये रेगुलेटेड और सुरक्षित हैं?
मशरूम सप्लीमेंट्स को Food and Drug Administration (FDA) और Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) जैसे संस्थानों के तहत कुछ हद तक नियंत्रित किया जाता है।
लेकिन चूंकि ये फूड सप्लीमेंट्स हैं, इसलिए इन्हें दवाओं की तरह पूरी तरह टेस्ट और अप्रूव नहीं किया जाता। ऐसे में सही ब्रांड और क्वालिटी चुनना उपभोक्ता की जिम्मेदारी होती है।
क्या असली मशरूम ज्यादा बेहतर हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य खाने वाले मशरूम अधिक सुरक्षित और संतुलित विकल्प हैं, क्योंकि वे प्राकृतिक रूप से पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
सप्लीमेंट्स का उपयोग केवल विशेष परिस्थितियों में किया जाना चाहिए, जैसे जब किसी व्यक्ति को खास हेल्थ गोल हासिल करना हो या डॉक्टर इसकी सलाह दें।











