पंजाबी संस्कृति की आत्मा, रिश्तों की गर्माहट और नई शुरुआत का प्रतीक लोहड़ी सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि भावनाओं का उत्सव है। इस खास मौके पर अभिनेत्री माही गिल ने अपने बचपन की यादों से लेकर मां बनने, अपनी ज़िंदगी के कई अहम पहलुओं पर खुलकर बात की।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: पंजाबी संस्कृति का रंग, आग की गर्माहट और परिवार के साथ जश्न का नाम है लोहड़ी। यह त्योहार सिर्फ मौसम के बदलाव का ही नहीं, बल्कि रिश्तों, परंपराओं और नई शुरुआत का भी प्रतीक माना जाता है। लोहड़ी के इस खास मौके पर अभिनेत्री माही गिल ने अमर उजाला से खास बातचीत में अपने बचपन की यादों से लेकर मां बनने के अनुभव तक कई पहलुओं को साझा किया।
उन्होंने अपने करियर से लिए गए ब्रेक, उससे जुड़ी चुनौतियों और फिर दमदार कमबैक की कहानी भी खुलकर बताई, जिससे उनकी निजी और पेशेवर जिंदगी के कई खूबसूरत पहलू सामने आए।
बचपन की लोहड़ी: परिवार और परंपराओं की खुशबू
माही गिल बताती हैं कि चंडीगढ़ में बिताया उनका बचपन लोहड़ी की खूबसूरत यादों से भरा हुआ है। उनके लिए लोहड़ी का मतलब था पूरा परिवार, घर की रौनक और आग के चारों ओर बैठकर खुशियां बांटना। रेवड़ियां, गजक, मूंगफली और पूजा—सब कुछ मिलकर इस त्योहार को खास बना देता था। वह कहती हैं कि उत्तर भारत में लोहड़ी का सामाजिक और पारिवारिक महत्व बहुत गहरा है।
शादी की पहली लोहड़ी हो या बच्चे की पहली लोहड़ी, पूरा परिवार एक जगह इकट्ठा होता था। आज भले ही परिवार अलग-अलग देशों और शहरों में रहता हो, लेकिन वे यादें आज भी उनके दिल में जिंदा हैं।
करियर से ब्रेक और मदरहुड को प्राथमिकता

माही गिल मानती हैं कि लोहड़ी जैसे त्योहार हमारी संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सबसे मजबूत जरिया हैं। आज वह गोवा में रहती हैं, जहां पंजाबी संस्कृति कम देखने को मिलती है, लेकिन वहां भी पंजाबी परिवार पूरे सम्मान के साथ लोहड़ी मनाते हैं। एक मां के रूप में उनके लिए यह और भी जरूरी हो गया है कि उनकी बेटी अपनी जड़ों को समझे।
माही कहती हैं कि उनकी बेटी पंजाब में नहीं पली-बढ़ी, लेकिन वह चाहती हैं कि वह अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों से जुड़ी रहे। इसी वजह से वह हर साल लोहड़ी मनाती हैं, ताकि यह विरासत आगे बढ़े। लोहड़ी नई शुरुआत और शुक्रगुज़ारी का प्रतीक है, और माही गिल अपनी ज़िंदगी को लेकर बेहद आभारी हैं। वह बताती हैं कि उन्होंने जानबूझकर करीब चार से छह साल का ब्रेक लिया था।
इस दौरान उन्होंने शूटिंग से दूरी बनाकर अपनी बेटी को पूरा समय दिया। उनके अनुसार, बेटी का बचपन, उसका मानसिक विकास और भावनात्मक जुड़ाव उनके लिए करियर से ज्यादा अहम था। आज जब वह बेटी नौ साल की हो चुकी है और पहले से ज्यादा समझदार है, तब माही ने फिर से एक्टिंग की दुनिया में वापसी की है—बिना किसी पछतावे के।
सेट पर वापसी का अनुभव
लंबे ब्रेक के बाद सेट पर लौटना आसान नहीं था। माही स्वीकार करती हैं कि पहले दिन थोड़ा डर और घबराहट थी। लेकिन जैसे ही कैमरा ऑन हुआ और उन्होंने डायलॉग बोले, उन्हें महसूस हुआ कि अभिनय अब भी उनके भीतर पूरी तरह जिंदा है। वेब सीरीज़ ‘रक्तांचल’ की शूटिंग उनके लिए खास साबित हुई। टीम के सहयोग और सकारात्मक माहौल ने उनका आत्मविश्वास लौटा दिया। माही के मुताबिक, सही समय पर लिया गया ब्रेक और सही समय पर की गई वापसी ही असली संतुलन है।
माही के लिए लोहड़ी का जश्न बिना पंजाबी गानों, आग के चारों ओर डांस और स्वादिष्ट खाने के अधूरा है। चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में हों, लोहड़ी के दिन पंजाबी म्यूजिक पर डांस करना उनके लिए ज़रूरी है।











