आर्यन नाम का एक 9 साल का लड़का था, जिसे नींद बहुत पसंद थी, लेकिन उसे सुबह स्कूल के लिए उठना दुनिया का सबसे बुरा काम लगता था। उसकी हमेशा शिकायत रहती थी, 'मुझे कभी अच्छे सपने नहीं आते, या तो मैं इम्तिहान में फेल हो रहा होता हूँ या कोई राक्षस मेरा पीछा कर रहा होता है।' उसे नहीं पता था कि उसके जन्मदिन पर उसकी नानी उसे एक ऐसा तोहफ़ा देने वाली थीं, जो उसकी रातों को हमेशा के लिए बदलने वाला था।
कहानी
आर्यन के जन्मदिन पर उसे ढेर सारे खिलौने और किताबें मिलीं। लेकिन सबसे अजीब तोहफ़ा उसकी नानी का था। यह एक बड़ा, बेहद मुलायम और रेशमी तकिया था। उस पर गहरे नीले रंग के कपड़े पर सुनहरे धागों से चाँद और सितारे काढ़े गए थे। यह देखने में बहुत पुराना लेकिन शाही लग रहा था। आर्यन थोड़ा निराश हुआ। उसने सोचा, 'तकिया? यह भी कोई बर्थडे गिफ्ट है?'
लेकिन रात को सोने से पहले, नानी उसके कमरे में आईं। उन्होंने उस तकिए को आर्यन के सिर के नीचे ठीक किया और उसके कान में फुसफुसा कर बोलीं, 'आर्यन, यह कोई साधारण तकिया नहीं है। यह सपनों का जादुई तकिया है। सोने से ठीक पहले, अपना सिर इस पर रखो और धीरे से वह सपना बोलो जो तुम देखना चाहते हो। यह तकिया तुम्हारी बात सुन लेगा।' आर्यन को यकीन नहीं हुआ, लेकिन उसने सोचा कि कोशिश करने में क्या हर्ज है। उस रात, लाइट बंद करके उसने अपना सिर उस नरम तकिए पर रखा और धीरे से बुदबुदाया, 'मैं चाहता हूँ कि आज रात मैं एक सुपरहीरो बन जाऊँ और आसमान में उड़ूँ।' अगले ही पल, वह गहरी नींद में सो गया।
अब तो आर्यन को रात का बेसब्री से इंतज़ार रहने लगा क्योंकि हर रात एक नया रोमांच उसका स्वागत करता था। एक रात उसने तकिए से चॉकलेट की दुनिया में जाने की इच्छा जताई, तो सपने में उसने चॉकलेट की नदियों में तैराकी की और लॉलीपॉप के पेड़ों से फल तोड़े। दूसरी रात उसने डायनासोर से मिलने की मांग की, जहाँ एक टी-रेक्स उसका दोस्त बन गया और उसने उसकी पीठ पर सवारी की। कभी वह अंतरिक्ष यात्री बनकर तारों के बीच घूमता, तो कभी गोताखोर बनकर गहरे समुद्र में तैरता। आर्यन बहुत खुश था क्योंकि उसकी दुनिया बदल गई थी, लेकिन इसी खुशी के साथ धीरे-धीरे एक समस्या भी शुरू हो गई।
आर्यन को सपनों की दुनिया असली दुनिया से इतनी ज़्यादा अच्छी लगने लगी कि अब उसे सुबह उठना पहले से भी ज़्यादा बुरा लगने लगा। वह दिन भर स्कूल में ऊँघता रहता। उसका होमवर्क अधूरा रहने लगा। शाम को दोस्त उसे क्रिकेट खेलने बुलाते, तो वह मना कर देता और जल्दी सोने की तैयारी करने लगता, ताकि वह अपनी जादुई दुनिया में लौट सके। वह आलसी और अकेला रहने वाला लड़का बन गया था। असली ज़िंदगी उसे फीकी लगने लगी थी।
एक दिन, उसके स्कूल में विज्ञान मेला था। आर्यन को एक रोबोट का मॉडल बनाना था, लेकिन उसने कुछ नहीं किया था क्योंकि वह तो रात भर सपनों में रोबोटों की दुनिया की सैर कर रहा था। उस रात, उसने तकिए से कहा, 'मुझे सपना दिखाओ कि मैंने विज्ञान मेले में प्रथम पुरस्कार जीता है और सब मेरी तारीफ कर रहे हैं।' उसे वैसा ही सपना आया। वह बहुत खुश हुआ। लेकिन जब सुबह उसकी आँख खुली, तो उसके सामने कोई ट्रॉफी नहीं थी, बल्कि उसका अधूरा पड़ा कबाड़ का प्रोजेक्ट था।
आर्यन उस प्रोजेक्ट को देखकर रोने लगा। उसे एहसास हुआ कि तकिया उसे सिर्फ़ सपना दिखा सकता है, लेकिन असली दुनिया में जीत हासिल करने के लिए उसे खुद मेहनत करनी होगी। चॉकलेट के सपने देखने से पेट नहीं भरता और सुपरहीरो के सपने देखने से होमवर्क पूरा नहीं होता।
उस दिन आर्यन ने एक बड़ा फैसला लिया। उसने वह जादुई तकिया उठाया और उसे अपनी अलमारी के सबसे ऊपर वाले शेल्फ में रख दिया। उसने तय किया कि वह इस तकिए का इस्तेमाल सिर्फ़ सप्ताहांत पर करेगा, एक इनाम की तरह। बाकी दिन, वह अपनी असली दुनिया को बेहतर बनाने के लिए मेहनत करेगा। उस दिन आर्यन ने दिन-रात एक करके अपना साइंस प्रोजेक्ट पूरा किया। उसे पहला इनाम तो नहीं मिला, लेकिन उसे तीसरा स्थान मिला। जब वह मंच पर अपना सर्टिफिकेट लेने गया, तो उसे जो खुशी महसूस हुई, वह किसी भी जादुई सपने से कहीं ज़्यादा बड़ी और असली थी।
सीख
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि 'सपने देखना बहुत अच्छी बात है, वे हमें प्रेरणा देते हैं। लेकिन अगर हम सिर्फ़ सपनों की दुनिया में ही खोए रहेंगे और असली दुनिया में मेहनत नहीं करेंगे, तो वे सपने कभी सच नहीं होंगे। कल्पना का मज़ा तभी है जब वास्तविकता से उसका संतुलन बना रहे।'













