महापरिनिर्वाण दिवस पर मायावती का सवाल: ‘बहुजनों के अच्छे दिन अब तक क्यों नहीं आए?’

महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर बसपा प्रमुख मायावती ने बहुजनों के अच्छे दिन अब तक क्यों नहीं आए, यह सवाल उठाया। जानें उनके बयान की पूरी जानकारी और राजनीतिक संदर्भ

बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि महापरिनिर्वाण दिवस पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने बहुजन समाज की ओर से बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में जातिवादी पार्टियों की नीतियां बहुजन समाज के उत्थान और अधिकारों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा हैं।

लखनऊ: अम्बेडकर परिनिर्वाण दिवस पर BSP सुप्रीमो मायावती ने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की और साथ ही एक बड़ा सवाल उठाया कि बहुजनों के आत्मसम्मान से जुड़े ‘अच्छे दिन’ अब तक क्यों नहीं आए। मायावती ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती व पुण्यतिथि पर यह सवाल हमेशा बना रहेगा कि संविधान के पवित्र मानवतावादी और कल्याणकारी उद्देश्यों पर आधारित देश में बहुजनों के आत्म-सम्मान और स्वाभिमान युक्त 'अच्छे दिन' कब आएंगे। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में बाबा साहेब के मार्ग पर चलना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

बाबा साहेब को श्रद्धांजलि 

मायावती ने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर महापरिनिर्वाण दिवस पर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और अंबेडकर जयंती जैसी पावन अवसरों पर यह सवाल बार-बार उठता है कि संविधान के मानवतावादी और कल्याणकारी उद्देश्यों के आधार पर बहुजनों के ‘अच्छे दिन’ कब आएंगे। मायावती ने जोर देकर कहा कि अम्बेडकर के मार्ग पर चलना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में बसपा सरकारों के दौरान बहुजन समाज के उत्थान और उनके आत्मसम्मान के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए थे। इन पहलों में शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक अधिकारों के लिए विशेष योजनाएं शामिल थीं, जो आज भी बहुजन समाज की प्रगति की दिशा में मील का पत्थर मानी जाती हैं।

सामाजिक न्याय और बहुजन अधिकार

मायावती ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों में जातिवादी नीतियां बहुजन हितों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। बहुजनों को सत्ता की ‘मास्टर चाबी’ हासिल करने से रोकने के लिए लगातार राजनीतिक और रणनीतिक हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे बहुजन समाज की समानता और अधिकारों के प्रति प्रतिकूल बताया।

मायावती ने यह भी चेतावनी दी कि बहुजन समाज को अपने स्वाभिमान और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए सतत संघर्ष करना होगा। उन्होंने सभी समर्थकों और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे वोटर लिस्ट पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) में सक्रिय भागीदारी करें, ताकि हर योग्य व्यक्ति लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर सके।

बसपा सुप्रीमो ने हाल में रुपये के भारी अवमूल्यन पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आर्थिक मामला नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक और राष्ट्रहित से भी गहरा संबंध है। मायावती ने सरकार से कहा कि केवल आर्थिक सलाहकारों पर भरोसा करने के बजाय खुद हस्तक्षेप किया जाए और गिरते रुपये को संभालने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

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