कांग्रेस ने Sonia Gandhi और Rahul Gandhi द्वारा प्रधानमंत्री Narendra Modi को लिखे गए पुराने पत्रों का हवाला देते हुए मंगलवार को आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर इसके कार्यान्वयन में देरी कर रही है।
नई दिल्ली: भारत में लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण विधेयक को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह इस महत्वपूर्ण विधेयक को लागू करने में जानबूझकर देरी कर रही है और इसे परिसीमन (delimitation) से जोड़कर टालने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस का कहना है कि यह मुद्दा महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण से जुड़ा है, लेकिन सरकार इसे अनावश्यक रूप से आगे बढ़ा रही है।
कांग्रेस का आरोप: “परिसीमन का बहाना बनाकर देरी”
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर इसके कार्यान्वयन को टालने का प्रयास किया जा रहा है। रमेश ने दावा किया कि यह रुख महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की प्रक्रिया को धीमा कर रहा है, जबकि देश में इस सुधार की लंबे समय से मांग की जा रही है।
कांग्रेस ने अपने आरोपों को मजबूत करने के लिए पार्टी नेतृत्व द्वारा लिखे गए पुराने पत्रों का भी उल्लेख किया है। रमेश ने बताया कि वर्ष 2018 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर महिला आरक्षण विधेयक को तुरंत पारित करने की मांग की थी। इस पत्र में कहा गया था कि संसद के मानसून सत्र में इस विधेयक को बिना शर्त समर्थन दिया जाना चाहिए ताकि इसे समय पर लागू किया जा सके।
“महिलाओं को संसद में उचित प्रतिनिधित्व मिले” – कांग्रेस
राहुल गांधी के पत्र का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि महिलाओं को सार्वजनिक जीवन और राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की आवश्यकता है। पत्र में यह भी कहा गया था कि:
- महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं में उचित स्थान मिलना चाहिए
- इस मुद्दे पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लिया जाना चाहिए
- किसी भी तरह की देरी से महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण पर असर पड़ेगा
कांग्रेस का कहना है कि यह दृष्टिकोण पार्टी की दीर्घकालिक नीति का हिस्सा रहा है।
सोनिया गांधी के पत्र का भी उल्लेख
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कांग्रेस ने 2017 में तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र का भी उल्लेख किया। पार्टी का कहना है कि उस समय भी महिला आरक्षण को लेकर मजबूत समर्थन व्यक्त किया गया था। जयराम रमेश के अनुसार, कांग्रेस का रुख हमेशा स्पष्ट और स्थिर रहा है और पार्टी लगातार इस विधेयक के शीघ्र लागू होने की मांग करती रही है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर निष्क्रिय रही है और अब इसे परिसीमन से जोड़कर एक नई शर्त जैसी स्थिति बना दी गई है। पार्टी ने कहा कि इससे महिला आरक्षण के लागू होने में अनावश्यक देरी हो रही है, जो लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से उचित नहीं है।
“महिला आरक्षण नहीं, राजनीतिक एजेंडा” का आरोप
कांग्रेस ने इससे पहले भी केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि महिला आरक्षण को लेकर उसकी प्राथमिकता स्पष्ट नहीं है। पार्टी का दावा है कि सरकार का असली एजेंडा महिलाओं के सशक्तिकरण की बजाय राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखना है। महिला आरक्षण विधेयक भारतीय राजनीति में एक लंबे समय से लंबित सुधार है, जिसका उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए निश्चित प्रतिशत सीटें सुनिश्चित करना है। समर्थकों का मानना है कि इससे:
- महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी
- नीति निर्माण में विविधता आएगी
- सामाजिक समानता को बढ़ावा मिलेगा
महिला आरक्षण को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बहस लगातार बढ़ती जा रही है। जहां कांग्रेस इसे तत्काल लागू करने की मांग कर रही है, वहीं सरकार इसे परिसीमन और संवैधानिक प्रक्रियाओं से जोड़कर देख रही है।











