RBI ने मिस-सेलिंग रोकने के लिए नए नियमों का प्रस्ताव रखा है। जुलाई से लागू होने वाले इन नियमों के तहत बैंकों को हर फाइनेंशियल प्रोडक्ट के लिए अलग सहमति लेनी होगी और जबरन बंडलिंग पर रोक लगेगी।
RBI Rule: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों को गलत बिक्री यानी मिस-सेलिंग से बचाने के लिए बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है। RBI द्वारा जारी किए गए नए मसौदा नियमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बैंक या वित्तीय संस्था ग्राहक की जानकारी और स्पष्ट सहमति के बिना कोई प्रोडक्ट न बेचे। इन नियमों के लागू होने के बाद लोन, बीमा, म्यूचुअल फंड और अन्य फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की बिक्री का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।
RBI का मानना है कि हाल के वर्षों में थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेल्स एजेंटों के जरिए गलत बिक्री की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। इसी वजह से ग्राहकों के हितों की सुरक्षा के लिए सख्त और एक-जैसे नियमों की जरूरत महसूस की गई।
जुलाई से लागू होंगे नए नियम
RBI ने फिलहाल इन नियमों को ड्राफ्ट के रूप में जारी किया है और इस पर 4 मार्च तक सुझाव मांगे हैं। सभी सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे। RBI ने साफ कर दिया है कि ये नियम 1 जुलाई से लागू होंगे। इसके बाद बैंक और NBFC को अपनी सेल्स प्रक्रिया, ट्रेनिंग सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म में बदलाव करने होंगे।
नए नियम लागू होने के बाद फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों को अपने फैसले खुद लेने का पूरा अधिकार मिलेगा।
सभी बैंकों और NBFC पर लागू होंगे नियम
ये नियम सिर्फ बड़े प्राइवेट या सरकारी बैंकों तक सीमित नहीं रहेंगे। RBI ने स्पष्ट किया है कि ये सभी रेगुलेटेड संस्थाओं पर लागू होंगे। इसमें कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक, लोकल एरिया बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंक, NBFC और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां शामिल हैं।
इसका मतलब यह है कि ग्राहक किसी भी संस्था से जुड़ा हो, उसे एक जैसी सुरक्षा और नियमों का फायदा मिलेगा।
जबरन बंडलिंग पर लगेगी सख्त रोक
नए नियमों का सबसे बड़ा असर जबरन बंडलिंग पर पड़ेगा। अब कोई भी बैंक लोन के साथ बीमा, म्यूचुअल फंड या अन्य थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स को जोड़कर जबरन नहीं बेच सकेगा।
अक्सर देखा गया है कि लोन अप्रूवल के नाम पर ग्राहकों को अनचाहे बीमा या निवेश प्रोडक्ट लेने के लिए मजबूर किया जाता है। RBI ने इसे गलत प्रैक्टिस मानते हुए पूरी तरह बंद करने का फैसला किया है।
हर प्रोडक्ट के लिए अलग सहमति जरूरी
अगर किसी ग्राहक को एक से ज्यादा फाइनेंशियल प्रोडक्ट ऑफर किए जा रहे हैं, तो अब हर प्रोडक्ट के लिए अलग-अलग सहमति लेनी होगी। एक ही फॉर्म या एक ही क्लिक में सभी प्रोडक्ट्स की मंजूरी लेना मान्य नहीं होगा।
ग्राहक को यह साफ बताया जाएगा कि वह किस प्रोडक्ट के लिए सहमति दे रहा है और उसकी शर्तें क्या हैं। इससे भ्रम की स्थिति खत्म होगी और गलत बिक्री पर रोक लगेगी।
सेल्स कॉल के समय पर लगेगी सीमा
ग्राहकों को बार-बार आने वाली परेशान करने वाली कॉल्स से राहत देने के लिए RBI ने सेल्स कॉल का समय भी तय कर दिया है। अब बैंक कर्मचारी या सेल्स एजेंट सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक ही कॉल या विजिट कर सकेंगे।
इसके अलावा, कॉल या विजिट करने से पहले ग्राहक की अनुमति लेना भी जरूरी होगा। इससे ग्राहकों की प्राइवेसी सुरक्षित रहेगी और अनचाही मार्केटिंग कॉल्स में कमी आएगी।
डार्क पैटर्न पर पूरी तरह रोक
RBI ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल होने वाले डार्क पैटर्न पर भी सख्ती दिखाई है। अब बैंकिंग ऐप और वेबसाइट पर पहले से टिक किए गए बॉक्स, छिपी हुई शर्तें या गुमराह करने वाले डिजाइन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
ग्राहक को हर विकल्प समझने और खुद चुनने का मौका देना अनिवार्य होगा।
गलत बिक्री पर पूरा रिफंड और मुआवजा
अगर यह साबित होता है कि किसी ग्राहक को गलत जानकारी देकर या बिना सहमति के कोई फाइनेंशियल प्रोडक्ट बेचा गया है, तो संस्था को पूरा पैसा वापस करना होगा। इसके साथ ही ग्राहक को मुआवजा भी देना पड़ेगा। RBI ने साफ किया है कि बिक्री चाहे एजेंट के जरिए हुई हो या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से, उसकी जिम्मेदारी पूरी तरह बैंक या वित्तीय संस्था की होगी।










