तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने G RAM G विधेयक को गरीब विरोधी बताया। उन्होंने केंद्र सरकार पर राज्यों पर वित्तीय बोझ डालने और ग्रामीण आजीविका पर सीधा असर डालने का आरोप लगाते हुए कड़ा विरोध किया।
New Delhi: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने G RAM G विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे राज्य सरकारों पर थोपा गया एक भारी वित्तीय बोझ करार दिया और कहा कि यह बदलाव गरीबों की आजीविका पर सीधा हमला है। स्टालिन का आरोप है कि भाजपा सरकार एकता और विकास की बात तो करती है, लेकिन हकीकत में उसकी नीतियां ग्रामीण गरीबों के पेट पर वार कर रही हैं।
एमजीएनआरईजीए में बदलाव पर कड़ा विरोध
मुख्यमंत्री स्टालिन ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी MGNREGA में प्रस्तावित बदलावों को बेहद खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि नई विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन-ग्रामीण यानी VBGRAMG योजना असल में एक छलावा है। सरकार 125 दिन के रोजगार का दावा कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि 100 दिन के काम की कानूनी गारंटी होने के बावजूद भाजपा शासन में लोगों को केवल 20 से 25 दिन का ही काम मिला।
स्टालिन ने यह भी कहा कि मजदूरी और परियोजना खर्च समय पर जारी नहीं किए गए, जिससे मजदूरों को महीनों तक अपने बकाया के लिए संघर्ष करना पड़ा। उनके मुताबिक, यह स्थिति अपने आप में ग्रामीण गरीबों के साथ अन्याय को दर्शाती है।
नियमों में बदलाव से और बिगड़ी स्थिति
मुख्यमंत्री ने X पर पोस्ट के जरिए कहा कि नए नियमों के बाद हालात और भी बदतर हो गए हैं। अब अधिकारी अपनी इच्छा से और केंद्र सरकार के विवेकाधिकार के तहत ही काम देने की स्थिति में हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि कई इलाकों में एक या दो दिन का काम मिलना भी मुश्किल हो गया है।
स्टालिन का कहना है कि इस बदलाव से तमिलनाडु जैसे राज्यों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। केंद्र द्वारा निधि आवंटन में कटौती से राज्य सरकारों पर दबाव बढ़ेगा और ग्रामीण रोजगार की स्थिति और कमजोर होगी।
राज्यों पर 40 प्रतिशत खर्च का बोझ

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि नई व्यवस्था के तहत राज्यों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी कर परिवर्तनों के बाद राज्य सरकारें पहले ही गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही हैं। ऐसे में यह शर्त राज्यों पर थोपा गया एक अन्यायपूर्ण बोझ है।
स्टालिन ने इसे सीधे तौर पर राज्यों को दंड देने जैसा कदम बताया और कहा कि केंद्र सरकार संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ काम कर रही है।
पलानीस्वामी पर भी साधा निशाना
एमके स्टालिन ने एआईएडीएमके नेता थिरु पलानीस्वामी पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पलानीस्वामी द्वारा इन बदलावों का समर्थन करना अक्षम्य कृत्य है। स्टालिन ने इसे ग्रामीण महिलाओं और गरीब कृषि श्रमिकों के खिलाफ हरित राजद्रोह करार दिया।
उन्होंने कहा कि जिस योजना ने ग्रामीण महिलाओं और मजदूरों को सुरक्षा दी, उसी एमजीएनआरईजीए के समापन जैसे कदम का समर्थन करना जनता के साथ विश्वासघात है।
लोकसभा में लंबी बहस
G RAM G विधेयक पर बुधवार को लोकसभा में करीब 14 घंटे लंबी बहस हुई। विपक्षी दलों ने इस विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की और कहा कि इसके प्रभावों पर गहन चर्चा जरूरी है।
वहीं सत्तारूढ़ भाजपा ने विधेयक का जोरदार बचाव किया और इसे 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया। सरकार का कहना है कि यह योजना रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा करेगी।
गरीबों की आजीविका पर सवाल
स्टालिन का तर्क है कि केंद्र सरकार के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। उन्होंने कहा कि अगर पहले से मौजूद कानून के तहत 100 दिन का काम नहीं मिल पाया, तो नई योजना में किए जा रहे वादों पर कैसे भरोसा किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण महिलाओं, गरीब किसानों और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ेगा, जिनके लिए एमजीएनआरईजीए जीवन रेखा जैसी योजना रही है।











