नेहरू पेपर्स विवाद: केंद्र सरकार का स्पष्ट बयान- 'दस्तावेज ‘लापता’ नहीं, सोनिया गांधी के पास सुरक्षित'

नेहरू पेपर्स विवाद: केंद्र सरकार का स्पष्ट बयान- 'दस्तावेज ‘लापता’ नहीं, सोनिया गांधी के पास सुरक्षित'

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निजी पत्रों और दस्तावेजों को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। संस्कृति मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नेहरू के पत्र ‘लापता’ नहीं हैं, बल्कि वे सोनिया गांधी के पास सुरक्षित हैं।

नई दिल्ली: भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जुड़े ऐतिहासिक पत्रों और दस्तावेजों को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस पार्टी के बीच राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। केंद्र सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि नेहरू से संबंधित कोई भी दस्तावेज “लापता” नहीं है, बल्कि ये कागजात कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के पास सुरक्षित हैं। सरकार ने इन्हें “राष्ट्रीय दस्तावेजी विरासत” बताते हुए प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (PMML) को लौटाने की मांग दोहराई है।

यह विवाद तब चर्चा में आया जब भाजपा सांसद संबित पात्रा ने संसद में सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय से जवाहरलाल नेहरू के निजी पत्र और दस्तावेज गायब हो गए हैं। इसके जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने संसद में लिखित उत्तर देते हुए स्पष्ट किया कि PMML से नेहरू से संबंधित कोई भी दस्तावेज लापता नहीं है।

राजनीतिक बयानबाज़ी और कांग्रेस की प्रतिक्रिया

संस्कृति मंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला और आरोप लगाया कि पहले सरकार द्वारा दस्तावेजों के गुम होने की बात फैलाई गई, जिससे भ्रम की स्थिति बनी। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र से सार्वजनिक माफी की मांग भी की। हालांकि, सरकार ने अपने रुख को और स्पष्ट करते हुए कहा कि दस्तावेजों का स्थान ज्ञात है, इसलिए उन्हें “लापता” कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है।

संस्कृति मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर सिलसिलेवार पोस्ट जारी कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी साझा की। मंत्रालय के अनुसार, 29 अप्रैल 2008 को सोनिया गांधी के प्रतिनिधि एम.वी. राजन ने एक औपचारिक पत्र के माध्यम से जवाहरलाल नेहरू के निजी पारिवारिक पत्रों और नोट्स को PMML से वापस लेने की इच्छा जताई थी। इसके बाद ये दस्तावेज सोनिया गांधी को सौंप दिए गए।

सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया आपसी सहमति से हुई थी, लेकिन चूंकि ये पत्र देश के पहले प्रधानमंत्री से जुड़े हैं, इसलिए इनका ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व अत्यंत अधिक है।

दस्तावेजों की वापसी के लिए लगातार प्रयास

संस्कृति मंत्रालय ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय लगातार सोनिया गांधी के कार्यालय के संपर्क में है। वर्ष 2024 में 28 जनवरी और 3 जुलाई को औपचारिक पत्र भेजकर दस्तावेजों को PMML को लौटाने का अनुरोध किया गया है। सरकार का कहना है कि इन दस्तावेजों को सार्वजनिक संग्रह में लाना शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और आम नागरिकों के हित में है।

केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि जवाहरलाल नेहरू से जुड़े पत्र और दस्तावेज किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय धरोहर हैं। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, ये दस्तावेज देश की “दस्तावेजी विरासत” का अभिन्न हिस्सा हैं और इनकी संरक्षित सार्वजनिक पहुंच अत्यंत आवश्यक है।

सरकार का तर्क है कि यदि ये दस्तावेज PMML की कस्टडी में रहते हैं, तो न केवल उनकी वैज्ञानिक ढंग से संरक्षण संभव होगा, बल्कि वैश्विक शोधकर्ताओं को भी आधुनिक भारत के इतिहास को समझने में मदद मिलेगी।

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