संसार में हर प्राणी का अपना एक विशिष्ट स्थान और उपयोगिता है। समस्या तब खड़ी होती है जब हम अपनी खूबियों को नजरअंदाज करके दूसरों जैसा बनने की कोशिश करते हैं। ईर्ष्या और तुलना हमें अक्सर मूर्खतापूर्ण कार्यों की ओर ले जाती है। यह कहानी एक ऐसे गधे की है जो अपनी पहचान भूलकर कुछ और बनने की कोशिश करता है।
कहानी
एक गाँव में एक अमीर किसान रहता था। उसके पास कई जानवर थे, जिनमें एक गधा और एक छोटा सा पालतू कुत्ता प्रमुख थे।
गधा दिन भर खेत में कड़ी मेहनत करता, भारी बोझ उठाता और शाम को थककर अपने अस्तबल में सो जाता। उसे खाने में सूखी घास मिलती थी।
दूसरी तरफ, वह छोटा कुत्ता कोई काम नहीं करता था। वह दिन भर घर में इधर-उधर कूदता-फांदता रहता। जब शाम को किसान थका-हारा घर लौटता, तो कुत्ता दौड़कर उसके पास जाता, अपनी पूंछ हिलाता, किसान की गोद में उछलकर बैठ जाता और प्यार से उसका मुँह चाटने लगता।
किसान भी अपनी सारी थकान भूलकर कुत्ते को गोद में उठा लेता, उसके सिर पर हाथ फेरता और उसे खाने के लिए अपनी थाली से अच्छे-अच्छे टुकड़े देता।
गधा यह सब दूर से देखता रहता था। उसके मन में धीरे-धीरे ईर्ष्या घर करने लगी। वह सोचता, 'यह दुनिया कितनी अन्यायपूर्ण है! मैं दिन भर कमर तोड़ मेहनत करता हूँ, मालिक का इतना काम करता हूँ, फिर भी मुझे सिर्फ रूखी-सूखी घास मिलती है और अस्तबल में रहना पड़ता है। और यह छोटा सा जानवर, जो कोई काम नहीं करता, सिर्फ दुम हिलाता है, उसे मालिक गोद में बिठाते हैं और इतना प्यार करते हैं।'
गधे ने सोचा, 'शायद मालिक को 'दुम हिलाना' और 'गोद में बैठना' पसंद है। अगर कुत्ते के ऐसा करने से उसे प्यार मिलता है, तो मैं भी यही करूँगा। मैं भी अब कुत्ते जैसा ही बनूँगा।'
अगले दिन शाम को, जब किसान खेत से लौटकर अपने बरामदे में कुर्सी पर बैठकर आराम कर रहा था, गधे ने अपना प्लान शुरू किया।
वह रेंकता हुआ दौड़कर किसान के पास पहुँचा और जोर-जोर से अपनी पूंछ हिलाने लगा। फिर, कुत्ते की नकल करते हुए, उसने अपने आगे के दोनों भारी पैर उठाकर किसान की गोद में रखने की कोशिश की। वह किसान को 'प्यार' करने के लिए उसका चेहरा चाटने के लिए आगे बढ़ा।
किसान, जो आराम से बैठा था, अचानक हुए इस हमले से घबरा गया। गधे का भारी भरकम शरीर और उसके खुरों की चोट से वह कुर्सी समेत पीछे गिर पड़ा। वह गधे के वजन के नीचे दब गया और दर्द व डर के मारे जोर-जोर से चिल्लाने लगा, 'बचाओ! बचाओ! यह गधा पागल हो गया है!'
मालिक की चीखें सुनकर घर के नौकर लाठियां लेकर दौड़े। उन्होंने देखा कि गधा मालिक के ऊपर चढ़ा हुआ है। उन्होंने गधे को पागल समझकर लाठियों से बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। गधा मार खाकर दर्द से कराहता हुआ वहाँ से भागा और अपने अस्तबल में जाकर छिप गया।
रात को भूखा और दर्द से कराहता हुआ गधा सोच रहा था कि उसने क्या गलती की। उसने तो वही किया था जो कुत्ता करता था, फिर उसे प्यार के बदले मार क्यों मिली? उसे समझ नहीं आया कि कुत्ता छोटा और हल्का है, इसलिए उसका गोद में बैठना प्यारा लगता है। लेकिन गधा बड़ा और भारी है, उसका वही काम करना जानलेवा और मूर्खतापूर्ण है।
सीख
नकल मत करो: दूसरों को देखकर उनकी नकल करने से पहले यह सोचो कि क्या वह काम तुम्हारे स्वभाव और शरीर के अनुकूल है। जो एक के लिए अच्छा है, जरूरी नहीं कि वह दूसरे के लिए भी अच्छा हो।













